मुख्य जानकारी:
- भारत की पहली 8-लेन वाइल्डलाइफ हाईवे टनल अगस्त के महीने में पूरी तरह से खुलने के लिए तैयार है.
- यह सुरंग राजस्थान के कोटा जिले में मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व के नीचे 4.9 किमी लंबाई में बनी है.
- वर्तमान में सुरंग के अंदर केवल कारों और एम्बुलेंस जैसे आपातकालीन वाहनों का ट्रायल लिया जा रहा है.
- मोबाइल नेटवर्क और सुरक्षा मानकों की अंतिम जांच पूरी होने के बाद भारी वाहनों को एंट्री दी जाएगी.
- इस टनल के शुरू होने से दिल्ली और वडोदरा के बीच सफर का समय घटकर लगभग आधा रह जाएगा.
First Wildlife Tunnel: दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर सफर करने वाले यात्रियों के लिए एक बेहद बड़ी और अच्छी खबर सामने आई है. भारत की पहली आठ लेन वाली ऐसी हाईवे सुरंग, जो एक प्रसिद्ध टाइगर रिजर्व के ठीक नीचे से गुजरती है, आगामी अगस्त 2026 में सभी प्रकार के वाहनों के लिए आधिकारिक रूप से खोल दी जाएगी. राजस्थान के कोटा जिले में स्थित इस 4.9 किलोमीटर लंबी जुड़वां सुरंग (ट्विन-ट्यूब टनल) का निर्माण मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व के नीचे किया गया है. वर्तमान में इस टनल के भीतर कारों जैसे हल्के वाहनों और आपातकालीन गाड़ियों के लिए सुरक्षा से जुड़े कड़े ट्रायल सफलतापूर्वक शुरू कर दिए गए हैं.
यह सुरंग किस स्थान पर बनी है?
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के अनुसार यह आधुनिक सुरंग दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के दिल्ली-वडोदरा खंड के अंतर्गत आती है. भौगोलिक रूप से यह मार्ग राजस्थान राज्य के कोटा जिले में पड़ने वाले मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व के घने जंगलों के ठीक नीचे से निकाला गया है. इसकी कुल लंबाई 4.9 किलोमीटर है और इसे पूरी तरह से जमीन के नीचे तैयार किया गया है ताकि ऊपर मौजूद प्राकृतिक संपदा और घने जंगलों को हाईवे के भारी ट्रैफिक की वजह से किसी भी तरह का नुकसान न उठाना पड़े.
टनल की मुख्य बनावट कैसी है?
इस अनूठी सुरंग की सबसे बड़ी इंजीनियरिंग विशेषता इसकी भव्य बनावट है. यह भारत की पहली आठ लेन वाली सुरंग है, जिसे ट्विन-ट्यूब डिजाइन के आधार पर विकसित किया गया है. इसका मतलब यह है कि इस सुरंग में दो अलग-अलग समानांतर ट्यूब बनाई गई हैं और इन दोनों ही ट्यूब के भीतर यातायात के लिए चार-चार लेन निर्धारित की गई हैं. वन्यजीव अभयारण्य के नीचे इतनी बड़ी क्षमता वाली सुरंग का निर्माण करना भारतीय इंजीनियरिंग और बुनियादी ढांचे के इतिहास में अपने आप में एक बड़ा मील का पत्थर है.
वन्यजीवों को इससे क्या फायदा होगा?
इस मेगा प्रोजेक्ट को पूरी तरह से टाइगर रिजर्व के नीचे बनाने का सबसे मुख्य उद्देश्य पर्यावरण और वन्यजीवों का संरक्षण करना है. इस बेहतरीन डिजाइन की वजह से राष्ट्रीय उद्यान के बाघ और अन्य जंगली जानवर बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप या गाड़ियों के शोर-शराबे के सुरंग के ठीक ऊपर जंगलों में खुलकर आ-जा सकेंगे. सुरंग के निर्माण के दौरान इस बात का विशेष ध्यान रखा गया है कि सदियों पुराने वन्यजीव गलियारे (कॉरिडोर) सुरक्षित रहें और हाईवे के ट्रैफिक से जंगल के पारिस्थितिकी तंत्र को कोई नुकसान न पहुंचे.
अभी किन गाड़ियों का ट्रायल चल रहा है?
एनएचएआई कोटा के परियोजना निदेशक संदीप अग्रवाल के मुताबिक वर्तमान में इस आठ लेन की सुरंग को सभी श्रेणियों के वाहनों के लिए पूरी तरह नहीं खोला गया है. सुरक्षा जांच पूरी होने के बाद शुरुआती चरण में केवल कारों और आपातकालीन वाहनों के लिए ही इसके द्वार खोले गए हैं ताकि प्रणालियों की जांच की जा सके. सुरंग के भीतर मोबाइल नेटवर्क कनेक्टिविटी, आधुनिक संचार प्रणालियों और आपातकालीन सुरक्षा तंत्रों की पूरी तरह से टेस्टिंग की जा रही है, जिसके बाद ही भारी कमर्शियल वाहनों को प्रवेश मिलेगा.
सफर के समय में कितनी बचत होगी?
इस आधुनिक टनल के पूरी तरह चालू हो जाने से दिल्ली-वडोदरा खंड पर यात्रा करने वाले लोगों के समय और पैसे दोनों की भारी बचत होगी. यह सुरंग वन्यजीव क्षेत्र के बीच से गुजरने वाले लगभग 25 किलोमीटर लंबे घुमावदार और संकरे रास्तों की जरूरत को पूरी तरह खत्म कर देगी. अधिकारियों का अनुमान है कि जब यह पूरा एक्सप्रेसवे चालू हो जाएगा, तब दिल्ली से वडोदरा के बीच लगने वाला समय 20-22 घंटे से घटकर मात्र 10 से 12 घंटे रह जाएगा, जिससे व्यापार को भी गति मिलेगी.
दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे वाइल्डलाइफ टनल विवरण (Table):
| टनल की मुख्य विशेषताएं | संबंधित महत्वपूर्ण आंकड़े | प्रभावित क्षेत्र और जिला (Entities) | वर्तमान स्थिति और प्लान |
| सुरंग की कुल लंबाई | 4.9 किलोमीटर (ट्विन-ट्यूब) | कोटा जिला, राजस्थान | सिविल निर्माण कार्य पूरी तरह संपन्न |
| कुल उपलब्ध लेन | 8 लेन (प्रत्येक ट्यूब में 4 लेन) | मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व | हल्के वाहनों के लिए सेफ्टी ट्रायल जारी |
| यात्रा समय में कटौती | 20-22 घंटे से घटकर 10-12 घंटे | दिल्ली से वडोदरा रूट खंड | अगस्त 2026 में पूर्ण संचालन का लक्ष्य |
निष्कर्ष:
दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर बनी यह नई वाइल्डलाइफ टनल आधुनिक इंजीनियरिंग का एक अद्भुत उदाहरण है. यह परियोजना यह साबित करती है कि पर्यावरण और वन्यजीवों को सुरक्षित रखते हुए भी देश में बेहतरीन बुनियादी ढांचे का विकास किया जा सकता है. अगस्त से इस टनल के पूरी तरह शुरू होने के बाद यात्रियों को जाम और घुमावदार रास्तों से मुक्ति मिलेगी और सफर की रफ्तार दोगुनी हो जाएगी.