दिल्ली मेट्रो के विस्तार को लेकर कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है, ताकि रोजाना यात्रा करने वाले लोगों को आसान और घर के नजदीक मेट्रो उपलब्ध हो सके. इससे ना सिर्फ घर से दूर मेट्रो स्टेशन जाने वाला भारी खर्चा बचेगा, बल्कि सड़क पर ट्रैफिक दबाव से भी राहत मिलेगा. इसी कड़ी में दिल्ली मेट्रो के चौथे चरण के तहत रिठाला-कुंडली कॉरिडोर को कैबिनेट द्वारा आधिकारिक मंजूरी मिल गई है. इस मंजूरी से दिल्ली मेट्रो की रेड लाइन हरियाणा में प्रवेश कर वहां रहने वाले लोगों और नौकरी करने वाले लोगों को आसान कनेक्टिविटी देने का काम करेगी. खासकर कश्मीरी गेट, राजीव चौक नरेला, बावाना और सोनीपत, आदि के बीच आसान परिवहन सुविधा मिलेगी.
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काम शुरू होने से क्या फायदा मिलेगा?
यह मेट्रो कॉरिडोर चौथे चरण का हिस्सा है, जिसका काम फिलहाल रुका हुआ था, क्योंकि अन्य कॉरिडोर को पहले मंजूरी मिल गई थी. लेकिन इस मंजूरी के बाद परियोजना अब तेजी से आगे बढ़ रही है. डीएमआरसी के अगले चरणों में निविदाएं जारी करना और आवश्यक भूमि भूखंडों का अधिग्रहण करना शामिल है ताकि वास्तविक निर्माण कार्य शुरू हो सके. इस लाइन के विस्तार से कई फायदे होंगे;
- कुल दूरी: यह लाइन 26.463 किलोमीटर की दूरी तय करती है. लेकिन विस्तार के बाद यह 26.463 किमी की दूरी तय कर सकेगी.
- नए स्टेशन: इस नए विस्तार से रूट पर 21 नए स्टेशन बनाए जाएंगे.
- डिजाइन क्या रहेगा: पूरा कॉरिडोर एलिवेटेड होगा, जिसका मतलब है कि भूमिगत सुरंग बनाने की कोई आवश्यकता नहीं होगी.
- लागत: 26 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड मेट्रो ट्रैक के निर्माण में भारी बजट की आवश्यकता है. इस कॉरिडोर को पूरा करने की कुल अनुमानित लागत 6,230 करोड़ रुपये है.
क्या रहेगा इस नए कॉरिडोर रूट मैप?
इस नए विस्तार के पूरा होने के बाद यात्री आसानी से रोहिणी स्थित रिठाला टर्मिनल से मेट्रो में बैठेंगे, यहां से विस्तार शुरू होगा. फिर रोहिणी के विभिन्न क्षेत्रों से गुजरती हैं और विशाल औद्योगिक केंद्र बावाना से होते हुए नरेला के आवासीय परिसरों के पास पहुंचेगी. फिर यह लाइन दिल्ली से बाहर निकलकर हरियाणा की सीमा पार करती है और सोनीपत के कुंडली में समाप्त होती है. इस रूट के तैयार होने से यात्रियों को कश्मीरी गेट जैसे प्रमुख केंद्रों तक पहुंचने के लिए आपको ट्रेन बदलने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी. कश्मीरी गेट पहुंचने के बाद, येलो या वायलेट लाइन पर जाना बेहद आसान है.
कब तक पूरा होगा काम?
डीएमआरसी ने सिविल कार्य में तेजी लाने के लिए प्री-कास्ट कंक्रीट संरचनाओं का उपयोग करने की योजना बनाई है. इस परियोजना की समयसीमा चार साल निर्धारित की गई है, और भूमि अधिग्रहण और वित्तपोषण की व्यवस्था पूरी तरह से हो जाने के बाद इसका लाइन का काम जल्दी से शुरू हो जाएगा. उम्मीद है कि यह लाइन 2029 के आखिर या 2030 की शुरुआत तक परीक्षण और सुरक्षा मंजूरी चरण में पहुंच जाएगी.
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