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मुख्य बिंदु

  • दिल्ली ने ‘एसेंशियलिटी सर्टिफिकेट’ की जगह ‘सेल्फ-सर्टिफिकेशन’ सिस्टम लागू किया है.
  • ये सुधार प्राइवेट स्कूलों की मान्यता को RTE एक्ट, 2009 के साथ जोड़ता है.
  • अब आवेदकों को इस बात के लिए सरकारी मंजूरी की जरूरत नहीं है कि किसी इलाके में स्कूल की जरूरत है या नहीं.
  • प्राइवेट स्कूलों के लिए जमीन की कम से कम जरूरत के नियमों में ढील दी गई है.
  • स्कूलों को अभी भी इंफ्रास्ट्रक्चर, सेफ्टी और टीचर के क्वालिफिकेशन के स्टैंडर्ड्स का पालन करना होगा.

Self Certification for Private Schools In Delhi: दिल्ली सरकार ने प्राइवेट स्कूल शुरू करने की प्रॉसेस शुरू करने को आसान बनाने के लिए एक बड़े सुधार को मंजूरी दी है. इसके तहत, जरूरी ‘एसेंशियलिटी सर्टिफिकेट’ की जगह अब ‘सेल्फ-सर्टिफिकेशन’ सिस्टम लागू किया जाएगा. शिक्षा मंत्री आशीष सूद की तरफ से मंजूर किया गया ये फैसला, नियमों की अड़चनों को कम करने और स्कूल की मान्यता के नियमों को ‘राइट टू एजुकेशन’ (RTE) एक्ट, 2009 के प्रावधानों के हिसाब से बनाने की एक बड़ी पहल का हिस्सा है.

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स्कूल खोलने के लिए क्या करना होगा?

इससे पहले किसी नए प्राइवेट स्कूल के लिए मान्यता चाहने वाले को ‘एसेंशियलिटी सर्टिफिकेट’ लेना पड़ता था. इसके लिए अधिकारियों को ये तय करना होता था कि किसी खास इलाके में नए स्कूल की जरूरत है या नहीं. नए नियमों के तहत, आवेदकों को बस ‘सेल्फ-सर्टिफिकेशन’ के जरिए ये बताना होगा कि वो RTE एक्ट के तहत तय सभी मानकों को पूरा करते हैं. इन स्टैंडर्ड्स में इंफ्रास्ट्रक्चर, सेफ्टी के उपाय, क्वालिफाइड टीचर्स और जरूरी स्टूडेंट-टीचर रेश्यो शामिल हैं.

कई पुराने नियम हटेंगे

शिक्षा विभाग ने बताया कि इस सुधार से ‘दिल्ली स्कूल एजुकेशन एक्ट एंड रूल्स’ (DSER), 1973 के कई पुराने प्रावधान भी हट जाएंगे. इन बदलावों का मकसद प्रशासनिक प्रक्रियाओं को आसान बनाना है, साथ ही ये एनश्योर करना है कि स्कूल क्वालिटी और सुरक्षा के नियमों का पालन करते रहें. संशोधनों के तहत, नियम 44(3) में बदलाव किया गया है. अब स्कूल प्रमोटरों को सरकार को पहले से नोटिफाई करने और प्रपोज्ड इलाके में किसी दूसरे स्कूल की जरूरत है या नहीं, इसका आकलन करवाने की जरूरत नहीं होगी. उम्मीद है कि इस कदम से मंजूरी मिलने में होने वाली देरी कम होगी.

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इस नियम को किया खत्म

इसके अलावा, सरकार ने नियम 50(ii) को भी खत्म कर दिया है. इस नियम के तहत, किसी नए संस्थान को मान्यता देने से पहले अधिकारियों को इलाके में पहले से मौजूद स्कूलों की संख्या का आकलन करना पड़ता था. अधिकारियों का मानना ​​है कि इस बदलाव से शिक्षा के क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा मिलेगा और साथ ही निष्पक्ष मानकों के जरिए नियमों का पालन भी सुनिश्चित किया जा सकेगा.

मिनिम लैंड एरिया की शर्त

दिल्ली में जमीन की कमी और ज्यादा आबादी की डेंसिटी को देखते हुए, सरकार ने प्राइवेट स्कूल खोलने के लिए मिनिम लैंड एरिया की शर्त में भी ढील दी है. अधिकारियों ने साफ किया कि भले ही जगह से जुड़े नियमों में ढील दी गई है, लेकिन संस्थानों को सेफ्टी, इंफ्रास्ट्रक्चर और शिक्षा से जुड़े सभी जरूरी स्टैंडर्ड्स को पूरा करना होगा.

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क्वालिटी से समझौता नहीं

शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने कहा कि इन सुधारों से ध्यान प्रशासनिक कागजी कार्रवाई से हटकर अच्छी क्वालिटी की शिक्षा देने पर फोकस्ड होगा. उनके मुताबिक, अब मान्यता इस बात पर डिपेंड करेगी कि नियम पारदर्शी और मापने लायक हैं या नहीं, न कि इस बात पर कि किसी खास जगह पर स्कूल की जरूरत है या नहीं. उन्होंने कहा कि अपडेटेड सिस्टम से ट्रांसपेरेसी बढ़ेगी, RTE नियमों का पालन करने को बढ़ावा मिलेगा और दिल्ली भर में सुरक्षित और अच्छी सुविधाओं वाले शिक्षण संस्थानों तक पहुंच बढ़ेगी.

निष्कर्ष

दिल्ली सरकार का ये फैसला एजुकेशन के क्वालिटी को मेंटेन रखते हुए प्राइवेट स्कूल खोलने के प्रॉसेस को आसान बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है. RTE मानकों के आधार पर ‘सेल्फ-सर्टिफिकेशन’ को अपनाकर, प्रशासन का मकसद अफसरशाही की वजह से होने वाली देरी को कम करना और ज्यादा स्कूल खोलने को बढ़ावा देना है. ये सुधार सुरक्षा या एकेडेमिक स्टैंडर्ड से समझौता किए बिना जमीन की जरूरतों में ढील देकर दिल्ली की शहरी चुनौतियों को भी ध्यान में रखते हैं. कुल मिलाकर, इस कदम से ट्रांसपेरेंसी बढ़ने, शिक्षा के मौके बढ़ने और अच्छी क्वालिटी वाली स्कूली शिक्षा तक बेहतर पहुंच मिलने की उम्मीद है.

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Frequently Asked Questions

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First published on: Jul 19, 2026 10:00 AM

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Shariqul Hoda

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