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दिल्ली सरकार ने दिया प्राइवेट बिजली कंपनी के ऑडिट का आदेश, 38,000 करोड़ रुपये का होगा हिसाब

Delhi Government News: दिल्ली सरकार ने एक बड़ा आदेश दिया है, अब राजधानी की 3 प्राइवेट इलेक्ट्रिसिटी डिस्ट्रीब्यूशन कंपनीज का सीएजी ऑडिट किया जाएगा. जिसमें 38,000 करोड़ रुपये से ज्यादा के रेगुलेटरी एसेट्स का हिसाब होगा.

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AI Generated Image

मुख्य बिंदु

  • दिल्ली ने तीनों निजी बिजली वितरण कंपनियों (discoms) के CAG ऑडिट का आदेश दिया है.
  • यह ऑडिट सुप्रीम कोर्ट के अगस्त 2025 के निर्देशों के तहत किया जा रहा है.
  • लगभग ₹38,552 करोड़ की रेगुलेटरी एसेट्स (regulatory assets) की जांच की जाएगी.
  • BRPL, BYPL और TPDDL को सभी जरूरी रिकॉर्ड देकर सहयोग करना होगा.
  • ऑडिट के तीन महीने में पूरा होने की उम्मीद है, हालांकि समय बढ़ाया जा सकता है.

Audit of Private Power Discoms In Delhi: दिल्ली सरकार ने राजधानी की 3 प्राइवेट बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) का CAG से कंप्रिहेंसिव ऑडिट कराने का आदेश दिया है. ये कदम सुप्रीम कोर्ट के 6 अगस्त, 2025 के उस फैसले के बाद उठाया गया है, जिसमें बिजली वितरण प्रणाली और रेगुलेटरी एसेट्स (नियामक संपत्तियों) के जमा होने की सख्त और विस्तृत जांच का निर्देश दिया गया था.

कस्टमर्स को कैसे होगा फायदा?

बिजली मंत्री आशीष सूद ने इस फैसले को दिल्ली के बिजली क्षेत्र में पारदर्शिता, जवाबदेही और गवर्नेंस को बेहतर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम बताया. उन्होंने कहा कि ऑडिट से बिजली उपभोक्ताओं को फायदा होगा क्योंकि इससे बेहतर वित्तीय जांच और सार्वजनिक संसाधनों का जिम्मेदार प्रबंधन सुनिश्चित होगा.

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इन कंपनियों का होगा ऑडिट

दिल्ली बिजली विभाग की तरफ से जारी आदेश के मुताबिक, ऑडिट में बीएसईएस राजधानी पावर लिमिटेड (BRPL), बीएसईएस यमुना पावर लिमिटेड (BYPL) और टाटा पावर दिल्ली डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड (TPDDL) शामिल होंगी. CAG ने इस साल की शुरुआत में ही इस प्रक्रिया के लिए सैद्धांतिक मंजूरी दे दी थी, जिससे औपचारिक आदेश का रास्ता साफ हो गया.

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इन हालात पर रखेंगे ध्यान

ऑडिट उन हालात पर ध्यान फोकस करेगा जिनके तहत ये वितरण कंपनियां बिना रिकवरी के बड़ी मात्रा में रेगुलेटरी एसेट्स को बनाए रखती रहीं. रेगुलेटरी एसेट्स का मतलब उन लागतों से है जो बिजली कंपनियों को तब उठानी पड़ती हैं जब आपूर्ति का खर्च बढ़ने के बावजूद बिजली टैरिफ नहीं बढ़ाया जाता है. इन लागतों को टाल दिया जाता है और बाद में उपभोक्ताओं से वसूला जाता है, अक्सर ब्याज के साथ.

11 सालों में बदलाव नहीं

दिल्ली में बिजली की दरें 2014-15 से नहीं बदली हैं, जिसके कारण तकरीबन 38,552 करोड़ रुपये के रेगुलेटरी एसेट्स जमा हो गए हैं. इस राशि में BRPL का हिस्सा लगभग 19,174 करोड़ रुपये, BYPL का 12,333 करोड़ रुपये और TPDDL का 7,046 करोड़ रुपये है. ऑडिट उन सभी संबंधित वित्तीय और प्रशासनिक मामलों की भी जांच करेगा जो ये पता लगाने के लिए जरूरी हैं कि ये देनदारियां कैसे जमा हुईं.

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CAG को सहयोग करने की अपील

सरकार ने सभी संबंधित विभागों, प्राधिकरणों और तीनों डिस्कॉम को निर्देश दिया है कि वो रिकॉर्ड और दूसरी जरूरी जानकारी देकर CAG के साथ पूरा सहयोग करें. अधिकारियों ने संकेत दिया है कि ऑडिट आदर्श रूप से 3 महीने के भीतर पूरा हो जाना चाहिए, हालांकि प्रॉसेस के बड़े पैमाने को देखते हुए जरूरत पड़ने पर समय सीमा बढ़ाई जा सकती है.

पहले भी हुई है कोशिशें

इससे पहले ऑडिट शुरू करने की कोशिश तब टल गई थी जब अपीलेट ट्रिब्यूनल फॉर इलेक्ट्रिसिटी (APTEL) ने प्रक्रियात्मक आधार पर पिछले आदेश को रद्द कर दिया था. नई बातचीत, बिजली वितरण कंपनियों (Discoms) के साथ सुनवाई और मंत्रिपरिषद की सिफारिशों के बाद, उपराज्यपाल ने ऑडिट को मंजूरी दे दी. उन्होंने कहा कि कंपनियों की आपत्तियों से जांच रोकने के लिए कोई ठोस आधार नहीं मिलता. दिल्ली सरकार का मानना ​​है कि इस ऑडिट से वित्तीय समस्याओं की पहचान करने, रेगुलेटरी निगरानी को मजबूत करने और बिजली वितरण क्षेत्र में कामकाज के तरीके (गवर्नेंस) को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी.

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निष्कर्ष

CAG ऑडिट दिल्ली के बिजली क्षेत्र में एक अहम कदम है, जिसका मकसद पारदर्शिता और वित्तीय जवाबदेही को बेहतर बनाना है. निजी बिजली वितरण कंपनियों के कामकाज और बढ़ती रेगुलेटरी एसेट्स की जांच करके, सरकार उपभोक्ताओं का भरोसा और रेगुलेटरी निगरानी को मजबूत करना चाहती है. जांच के नतीजे भविष्य की नीतिगत फैसलों पर असर डाल सकते हैं, गवर्नेंस के मानकों को बेहतर बना सकते हैं और बिजली वितरण में ज्यादा जवाबदेही सुनिश्चित कर सकते हैं. ऑडिट पूरा होने के बाद, ये ऐसे सुधारों का रास्ता भी खोल सकता है जो ज्यादा कुशल और पारदर्शी बिजली क्षेत्र को बढ़ावा दें.

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लेखक के बारे में

Shariqul Hoda

न्यूज़ 24 डिजिटल में शारिकुल होदा सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. मुख्य तौर पर वह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खबरें लिखते हैं. शारिकुल ने 2008 में दूरदर्शन में बतौर इंटर्न अपनी शुरुआत की, इसके बाद वह दैनिक जागरण, टीवी टुडे नेटवर्क, जनसंदेश, श्री न्यूज़, भारत खबर, स्पोर्ट्सकीड़ा, WION और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. उन्होंने 3 लोकसभा चुनाव और कई विधानसभा चुनाव से लेकर देश की बड़ी घटनाओं को कवर किया है. अपने डेढ़ दशक के मीडिया करियर में शारिकुल ने देश की राजनीति, इंटरनेशनल डिप्लोमेसी, खेलकूद से जुड़ी घटनाओं की अच्छी समझ हासिल की है. कितने साल का तजुर्बा: 16 साल शिक्षा: शारिकुल ने बैंगलोर यूनिवर्सिटी (आचार्य इंस्टीट्यूट) से बीए जर्नलिज्म और गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी (एपीजे इंस्टीट्यूट) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म और मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई की है.
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