Delhi Dehradun Expressway: दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे को लेकर एक हैरान करने वाली खबर सामने आई है. उद्घाटन के कुछ ही महीनों बाद उस पर गड्ढे पाए जाने का मामला अब संसद तक पहुंच गया है. राज्यसभा में केंद्र सरकार ने माना कि एक्सप्रेसवे पर दो गड्ढे पाए गए थे. हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया कि सड़क अभी डिफेक्ट लायबिलिटी अवधि के तहत आती है, इसलिए निर्माण कंपनी ने बिना किसी सरकारी खर्च के उनकी मरम्मत कर दी है.

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राज्यसभा में सांसद अशोक सिंह द्वारा पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने बताया कि दिल्ली-देहरादून एक्सेस कंट्रोल्ड हाईवे अभी 10 साल की डिफेक्ट लायबिलिटी अवधि में है. उन्होंने कहा कि ठेकेदार ने अनुबंध के तहत अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए दोनों गड्ढों की मरम्मत अपने खर्च पर पूरी कर दी है. डिफेक्ट लायबिलिटी पीरियड वह तय समय होता है जिसमें सड़क में आई किसी भी तकनीकी खराबी या निर्माण दोष को ठीक करने की पूरी वित्तीय जिम्मेदारी ठेकेदार की ही होती है.

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गड्ढों की वजह पर चुप्पी क्यों?

करीब 12 हजार करोड़ रुपये की लागत से बने 210 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे का उद्घाटन 14 अप्रैल 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था. मॉनसून के दौरान शामली के पास सड़क पर बने गड्ढों के वीडियो वायरल होने पर सुरक्षा और निर्माण गुणवत्ता को लेकर सवाल उठने लगे थे. इससे पहले एनएचएआई के अधिकारियों ने जलभराव और अधूरी ड्रेनेज व्यवस्था को इसका कारण बताया था, लेकिन सरकार ने संसद में दिए गए अपने लिखित जवाब में गड्ढे बनने की असली वजह का कोई जिक्र नहीं किया.

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103 निर्माण एजेंसियों पर हुई बड़ी कार्रवाई

इसी सवाल के जवाब में केंद्र सरकार ने बताया कि राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में खराब निर्माण गुणवत्ता और नियमों के उल्लंघन पर सख्त रुख अपनाया जा रहा है. पिछले तीन वर्षों के दौरान देश भर में ऐसी 103 एजेंसियों और ठेकेदारों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की गई है. सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2023-24 में 29, वर्ष 2024-25 में 29 और वर्ष 2025-26 में 45 निर्माण कंपनियों पर जुर्माना लगाने और ब्लैकलिस्ट करने जैसे कड़े कदम उठाए गए हैं.

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