दिल्ली में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने वाले कोचिंग सेंटरों की मनमानी और सुरक्षा में लापरवाही के दिन अब लदने वाले हैं. दिल्ली सरकार राजधानी के कोचिंग सेक्टर को रेगुलेट करने के लिए एक बेहद सख्त नीति पर काम शुरू कर चुकी है. इस नई नीति के दायरे में कोचिंग संस्थानों की मनमानी फीस से लेकर छात्रों की सुरक्षा और बिल्डिंग का इंफ्रास्ट्रक्चर तक सब कुछ होगा.
गुरुवार को दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद की अध्यक्षता में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में इस नीति के ड्राफ्ट को लेकर रूपरेखा तैयार की गई. सरकार ने इस पूरी पॉलिसी का मसौदा तैयार करने के लिए उच्च शिक्षा निदेशक को नोडल अधिकारी नियुक्त किया है.
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एस्पिरेंट्स पर सीधा असर
दिल्ली का कोचिंग हब (जैसे मुखर्जी नगर, ओल्ड राजेंद्र नगर, कालू सराय) देश भर के लाखों छात्रों का ठिकाना है, जो यहां UPSC, इंजीनियरिंग (JEE), मेडिकल (NEET) जैसी परीक्षाओं की तैयारी के लिए आते हैं. अगर यह नीति लागू होती है, तो यह दिल्ली की कोचिंग इंडस्ट्री के इतिहास का सबसे बड़ा बदलाव साबित होगी.
क्या-क्या बदलेगा?
फीस में पारदर्शिता – कोचिंग सेंटरों की मनमानी फीस वसूलने पर रोक लगेगी और रेगुलेशन तय होगा.
सुरक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर – कोचिंग सेंटरों की इमारतों के लिए कड़े सुरक्षा मानक तय होंगे.
फायर सेफ्टी – आग और किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए पुख्ता इंतजाम जरूरी होंगे.
मेंटल हेल्थ सपोर्ट – पढ़ाई के तनाव से जूझ रहे छात्रों के लिए काउंसलिंग और मानसिक स्वास्थ्य सहायता अनिवार्य होगी.
शिकायत निवारण – छात्रों और कोचिंग स्टाफ की समस्याओं को सुनने के लिए एक मजबूत शिकायत तंत्र बनेगा.
नियमित जांच – कोचिंग सेंटरों की समय-समय पर औचक जांच और मॉनिटरिंग की जाएगी.
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अब क्यों जागी सरकार?
दरअसल, यह कदम करीब दो साल पहले ओल्ड राजेंद्र नगर के एक कोचिंग सेंटर के बेसमेंट में पानी भरने के कारण तीन UPSC उम्मीदवारों की दर्दनाक मौत के बाद उठाया गया है. उस हादसे ने कोचिंग हबों में सुरक्षा के खोखले दावों, इंफ्रास्ट्रक्चर की कमियों और प्रशासनिक लापरवाही की पोल खोलकर रख दी थी.
हादसे के बाद छात्रों के भारी विरोध प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने रिटायर्ड जज आरके गॉबा की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई थी. इस कमेटी ने कोचिंग संस्थानों की नियामक कमियों को उजागर करते हुए एक सख्त निगरानी तंत्र बनाने की सिफारिश की थी, जिसे अब इस नई नीति में शामिल किया जा रहा है.
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सिंगल विंडो सिस्टम की तैयारी
मौजूदा व्यवस्था में कोचिंग सेंटरों के अलग-अलग नियमों की देखरेख कई अलग-अलग एजेंसियां (जैसे MCD, फायर विभाग, पुलिस) करती हैं, जिससे तालमेल की कमी रहती है. सरकार का उद्देश्य एक ऐसा ‘यूनिफॉर्म स्टैंडर्ड’ बनाना है जिससे सभी कोचिंग संस्थान एक ही कड़े नियम के तहत जवाबदेह बनें.
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