बिहार में शराबबंदी कानून को लेकर राजनीति एक बार फिर गर्मा गई है. एनडीए के सहयोगी और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने बिहार में गुजरात की तर्ज पर शराबबंदी लागू करने की जोरदार वकालत की है. पटना में आयोजित हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) की युवा इकाई की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के दौरान मांझी ने यह बड़ा बयान दिया.
HAM के संरक्षक जीतन राम मांझी ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से आग्रह किया है कि राज्य में शराबबंदी के नियमों को गुजरात मॉडल की तरह लचीला और पारदर्शी बनाया जाए.

मांझी ने कहा, 'नशाबंदी का कानून सही है, लेकिन इसके पालन में पुलिस के स्तर पर कुछ दिक्कतें आ रही हैं. महात्मा गांधी की जन्मभूमि गुजरात में भी शराबबंदी लागू है, लेकिन वहां के लोगों में इस तरह की निराशा या परेशानी देखने को नहीं मिलती.'

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क्या है गुजरात का शराबबंदी मॉडल?

गुजरात में कहने को तो शराबबंदी है, लेकिन यहां परमिट आधारित प्रतिबंध' की व्यवस्था लागू है. राज्य में आम जनता के लिए शराब के निर्माण, बिक्री और खुले तौर पर पीने पर रोक है, लेकिन विशेष स्थितियों, स्वास्थ्य कारणों और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए वैध परमिट के जरिए शराब खरीदने और निजी जगहों पर पीने की कानूनी मंजूरी दी जाती है.
यह पूरी व्यवस्था 'गुजरात निषेध अधिनियम' के तहत चलाई जाती है. गुजरात में शराब पीने के लिए सरकार अलग-अलग तरह के परमिट जारी करती है

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  • विजिटर परमिट: गुजरात से बाहर या विदेशों से आने वाले पर्यटकों को ऑनलाइन या एयरपोर्ट/निर्धारित होटलों से अस्थायी परमिट मिल जाता है. वे अपने होटल के कमरे में शराब का सेवन कर सकते हैं.
  • हेल्थ परमिट: गुजरात के स्थानीय नागरिकों को मेडिकल आधार (जैसे हाई बीपी या डिप्रेशन) पर स्वास्थ्य विभाग की सिफारिश पर परमिट दिया जाता है. इसके लिए तय उम्र और मेडिकल जांच की कड़ी शर्तें होती हैं.
  • गिफ्ट सिटी में विशेष छूट: दिसंबर 2023 में गुजरात सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए गांधीनगर की गिफ्ट सिटी में परमिट की अनिवार्यता खत्म कर दी. वहां काम करने वाले कर्मचारी और वैश्विक मेहमान चिन्हित होटलों व रेस्तरां में सिर्फ अपना वैध फोटो आईडी दिखाकर शराब पी सकते हैं.

गरीबों पर कार्रवाई का आरोप

जीतन राम मांझी लंबे समय से बिहार की शराबबंदी नीति की समीक्षा की मांग करते रहे हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा कानून की आड़ में पुलिस गरीब और निर्दोष लोगों को पकड़कर जेल भेज देती है, जबकि शराब पीने वाले बड़े नेताओं और अधिकारियों पर कोई सख्त कार्रवाई नहीं होती. उन्होंने सरकार से मांग की कि प्रशासन में हो रही गड़बड़ियों को रोका जाए और व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त किया जाए.

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मांझी की इस मांग के बीच मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि बिहार में शराबबंदी खत्म करने का कोई सवाल ही नहीं उठता. राज्य में पूर्ण शराबबंदी कानून पूरी सख्ती के साथ लागू रहेगा.

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