बिहार विधान परिषद में पहले हुई भर्तियों को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है. अब 100 से ज्यादा नए कर्मचारियों को विधान परिषद परिसर में जाने से रोक दिया गया है. इन कर्मचारियों की नियुक्ति पूर्व सभापति अवधेश नारायण सिंह के कार्यकाल में हुई थी. भर्ती में गड़बड़ी की आशंका के चलते यह कदम उठाए जाने की बात सामने आ रही है.
जिन कर्मचारियों को रोका गया है, उनमें निजी सहायक, स्टेनोग्राफर और डाटा एंट्री ऑपरेटर शामिल हैं. अचानक प्रवेश रोके जाने से कर्मचारी परेशान हैं. उनका कहना है कि उन्हें पहले से कोई जानकारी नहीं दी गई थी. एक कर्मचारी ने बताया कि नियुक्ति से जुड़ा मामला हाईकोर्ट में चल रहा है. इस मामले में 3 नवंबर को सुनवाई भी हुई थी. कर्मचारी के मुताबिक, कोर्ट के आदेश की जानकारी विधान परिषद के सचिव को भी दे दी गई थी. इसके बावजूद करीब दो महीने बाद अचानक उन्हें परिसर में आने से रोक दिया गया.
परिसर के पार्क में बैठे कर्मचारी
विधान परिषद में प्रवेश नहीं मिलने के बाद सभी कर्मचारी परिसर के अंदर बने पार्क में बैठ गए. वे जल्द से जल्द जॉइनिंग कराने की मांग कर रहे हैं. कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें काम करने का मौका दिया जाना चाहिए. कर्मचारियों के विरोध को देखते हुए परिसर की सुरक्षा बढ़ा दी गई है. गेट पर तैनात सुरक्षाकर्मी अधिकारियों के निर्देश का हवाला देकर उन्हें अंदर जाने से रोक रहे हैं.
शॉर्टहैंड परीक्षा में शामिल नहीं हुए थे 7 कर्मचारी
इस विवाद की शुरुआत शॉर्टहैंड परीक्षा से जुड़े एक मामले के बाद हुई. जानकारी के मुताबिक, पूर्व सभापति अवधेश नारायण सिंह के कार्यकाल में नियुक्त सात कर्मचारियों की शॉर्टहैंड जानकारी पर सवाल उठे थे. इन पदों के लिए शॉर्टहैंड आना जरूरी था. आरोप है कि इसके बावजूद इन कर्मचारियों को परीक्षा में सफल घोषित कर दिया गया था.
मामला सामने आने के बाद सातों कर्मचारियों को दोबारा शॉर्टहैंड परीक्षा के लिए बुलाया गया. परीक्षा की पूरी तैयारी की गई थी. इसकी निगरानी के लिए मजिस्ट्रेट भी तैनात किए गए थे और कैमरे भी लगाए गए थे. लेकिन परीक्षा के दिन एक भी कर्मचारी शामिल नहीं हुआ. इसके बाद भर्ती प्रक्रिया पर सवाल और गहरे हो गए. अब 100 से ज्यादा कर्मचारियों को परिसर में प्रवेश से रोकने का मामला सामने आया है. हालांकि, इन सभी कर्मचारियों की नियुक्ति को लेकर जांच और आगे की कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट होना बाकी है.
अवधेश नारायण सिंह ने दिया था इस्तीफा
बिहार विधान परिषद के सभापति रहे अवधेश नारायण सिंह ने सितंबर के अंत में अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया था. उनके इस्तीफे के बाद सभापति का पद खाली है. फिलहाल जेडीयू नेता डॉ. रामबचन राय उपसभापति की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. फिलहाल इस पूरे मामले में कर्मचारियों की नौकरी और उनकी जॉइनिंग को लेकर स्थिति साफ नहीं है. भर्ती में गड़बड़ी की आशंका की जांच और संबंधित आदेशों के बाद ही आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी.