बिहार विधान परिषद (MLC) चुनाव के नतीजे सामने आने के महज 72 घंटे के भीतर सूबे का सियासी पारा अचानक चढ़ गया है. चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर जीत दर्ज करने वाले दो नए विधान पार्षदों ने BJP का दामन थाम लिया है. इस सियासी उलटफेर के बाद विपक्षी दल RJD और प्रशांत किशोर की पार्टी जन सुराज बुरी तरह भड़क गए हैं. दोनों ही दलों ने इसे जनादेश का अपमान बताते हुए नवनिर्वाचित एमएलसी के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाने की चेतावनी दी है.
भाजपा विधायकों की बैठक में हुए शामिल
शनिवार को तिरहुत स्नातक सीट से लगातार दूसरी बार जीत दर्ज करने वाले बंशीधर ब्रजवासी और सारण शिक्षक सीट से बागी होकर निर्दलीय जीते राहुल राज ने भाजपा में शामिल होने की घोषणा की. दोनों नेता शाम को पटना स्थित भाजपा कार्यालय में पार्टी विधायकों की बैठक में पहुंचे. यहां बिहार भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी की मौजूदगी में उन्होंने सदस्यता की पर्चियां थामकर तस्वीरें खिंचवाईं. सोशल मीडिया पर तस्वीरें साझा होते ही सियासी गलियारों में घमासान शुरू हो गया.
तेजस्वी बोले- तुरंत रद्द हो सदस्यता
राजद नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने रविवार को भाजपा पर ‘संविधान का मजाक उड़ाने’ का आरोप लगाते हुए दोनों नव-निर्वाचित एमएलसी को अयोग्य घोषित करने की मांग की. तेजस्वी ने कहा कि संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत यह स्पष्ट नियम है कि यदि कोई निर्दलीय निर्वाचित सदस्य चुनाव के बाद किसी राजनीतिक दल में शामिल होता है, तो वह सदन की सदस्यता के अयोग्य हो जाता है. राजद सांसद मनोज झा ने बताया कि पार्टी का प्रतिनिधिमंडल सोमवार को विधानपरिषद के सभापति से मिलेगा और इस पूरे मामले को लेकर चुनाव आयोग का भी रुख किया जाएगा.
कांग्रेस का आरोप: जेडीयू की पीठ में छुरा घोंपा
कांग्रेस ने इस घटनाक्रम को लेकर सीधे तौर पर एनडीए के भीतर दरार की बात कही. कांग्रेस प्रवक्ता असित नाथ तिवारी ने कहा कि तिरहुत स्नातक और सारण शिक्षक सीटों पर जेडीयू की हार हुई और भाजपा ने अपने ही सहयोगी की पीठ में छुरा घोंपा है. उन्होंने कहा कि जो भाजपा विपक्ष को बिखरा हुआ बताती थी, उसकी अपनी साजिश अब जनता के सामने आ चुकी है.
जन सुराज की चेतावनी- जाएंगे सुप्रीम कोर्ट
प्रशांत किशोर की पार्टी जन सुराज ने भी सत्तारूढ़ दल को आड़े हाथों लिया. पार्टी प्रवक्ता कुमार सौरभ ने भाजपा के उस दावे को खारिज कर दिया, जिसमें कहा जा रहा था कि दोनों एमएलसी ने केवल समर्थन दिया है, सदस्यता नहीं ली. सौरभ ने कहा कि उनके पास नेताओं की सदस्यता पर्ची वाली तस्वीरें हैं, जिन्हें सभापति और चुनाव आयोग को सौंपा जाएगा. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि तीन महीने में कार्रवाई नहीं हुई, तो वे सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे.