बिहार के नए सीएम सम्राट चौधरी ने अपने पूर्व उप मुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा के बड़े फैसले को पलट दिया है. सम्राट चौधरी की सरकार ने लंबे समय से हड़ताल पर डटे राजस्व कर्मचारियों को बड़ी राहत दी है. राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने निलंबित राजस्व कर्मचारियों को राहत देने का ऐलान किया है। बीते करीब ढाई महीने से निलंबन झेल रहे राजस्व कर्मचारियों का सस्पेंशन अब रद्द किया जाएगा।

गौरतलब है कि 14 अप्रैल तक राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग का कार्यभार देख रहे पूर्व डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा ने इन हड़ताली राजस्व कर्मचारियों के खिलाफ सख्त एक्शन लिया था।

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बिहार में राजस्व कर्मचारियों से जुड़े हालिया मामले मुख्य रूप से भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी और हड़ताल से संबंधित हैं। बिहार सरकार ने इसे लेकर सख्त रुख अपनाया था। अररिया और पूर्णिया जैसे जिलों में 15,000 रुपये या उससे अधिक की रिश्वत लेते हुए राजस्व कर्मचारियों को रंगे हाथ गिरफ्तार (Trap Cases) किया गया था।

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निगरानी विभाग द्वारा पकड़े जाने के बाद पटना और अररिया में कई राजस्व कर्मचारियों को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। जिलाधिकारी (DM) ने भ्रष्टाचार के मामले में "जीरो टॉलरेंस" नीति के तहत कार्रवाई की थी।

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अपनी 17 सूत्री मांगों (जैसे- 2800 ग्रेड पे, गृह जिले में पदस्थापन) को लेकर राजस्व कर्मचारियों के अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने के बाद, सरकार ने FIR के आदेश दिए थे। भोजपुर सहित कई जिलों में हड़ताली कर्मचारियों को सस्पेंड किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि काम में बाधा डालने वालों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की चेतावनी मिली थी।

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उधर, राजस्व कर्मचारी संघ, संयुक्त संघर्ष मोर्चा के बैनर तले अपनी विभिन्न 17 मांगों को लेकर मांगों के लिए प्रदर्शन कर रहे हैं। हड़ताल के कारण दाखिल-खारिज (Mutation) और परिमार्जन जैसे लाखों मामले लंबित हो गए हैं, जिससे आम जनता को परेशानी हो रही है। हाल ही में, सरकार ने कर्मचारियों के पदनाम में बदलाव (सहायक राजस्व अधिकारी - ARO) पर सहमति जताई थी, लेकिन अनिश्चितकालीन हड़ताल का मुद्दा अभी भी बना हुआ है।

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