दिल्ली से जुड़ी एक हैरान कर देने वाली कहानी इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है. ये कहानी एक बस कंडक्टर की है, जिसे महज 5 पैसे के आरोप में करीब 40 साल तक कोर्ट के चक्कर लगाने पड़े. इस घटना ने ना सिर्फ लोगों को भावुक कर दिया है, बल्कि न्याय व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं. ये मामला साल 1973 का है, जब रणवीर सिंह यादव दिल्ली ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (DTC) में बस कंडक्टर के तौर पर काम करते थे. उन पर आरोप लगाया गया कि उन्होंने एक महिला यात्री से 10 पैसे के टिकट के बदले 15 पैसे ले लिए और 5 पैसे अपने पास रख लिए. इस आरोप के बाद उनके खिलाफ जांच बैठाई गई और कुछ साल बाद उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया.
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केस में लग गए 4 लाख रुपये
नौकरी जाने के बाद रणवीर ने न्याय के लिए कानूनी लड़ाई शुरू की. ये लड़ाई इतनी लंबी चली कि उनकी जिंदगी के कई साल कोर्ट के चक्कर काटने में निकल गए. 1990 में उन्हें लेबर कोर्ट से राहत मिली और कोर्ट ने उनकी बर्खास्तगी को गलत बताया. लेकिन मामला यहीं खत्म नहीं हुआ. DTC ने इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दे दी, जिससे केस और लंबा खिंच गया. इस दौरान एक बेहद चौंकाने वाली बात सामने आई. जिस 5 पैसे के लिए ये पूरा मामला शुरू हुआ था, उस रकम को वसूलने के लिए DTC ने लगभग 47 हजार रुपये कानूनी खर्च में खर्च कर दिए. वहीं रणवीर ने भी इस लड़ाई में करीब 4 लाख रुपये खर्च कर दिए.
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रणवीर के लिए इज्जत का सवाल
रणवीर के लिए यह सिर्फ पैसों का मामला नहीं था, बल्कि उनकी इज्जत और सच की लड़ाई थी. उन्होंने कई बार बताया कि उनके अपने बच्चे भी उनसे पूछते थे कि क्या उन्होंने सच में किसी के पैसे लिए थे. ये सवाल उनके लिए बेहद पीड़ादायक था. आखिरकार लंबी कानूनी लड़ाई के बाद उन्हें न्याय मिला. कोर्ट ने DTC को आदेश दिया कि रणवीर को 30,000 रुपये मुआवजा दिया जाए. साथ ही उन्हें ग्रेच्युटी और बाकी बकाया रकम भी देने को कहा गया. आज ये मामला सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है. लोग इसे न्याय व्यवस्था की धीमी स्पीड और संसाधनों की बर्बादी का उदाहरण बता रहे हैं. कई यूजर्स ने कहा कि एक छोटे से मामले को सुलझाने में दशकों लगना सिस्टम की बड़ी खामी को दिखाता है.
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