नई दिल्ली: पहलवान विनेश फोगाट और बजरंग पूनिया को ट्रायल्स से छूट देकर सीधे एशियन गेम्स में एंट्री दी गई है। इस पर कई पहलवानों ने आपत्ति जताई है। ओलंपिक पदक विजेता साक्षी मलिक ने गुरुवार को कहा कि आईओए के एडहॉक पैनल द्वारा फोगाट और पूनिया की तरह उनके मामले पर विचार करने की पेशकश के बावजूद उन्होंने एशियाई खेलों के ट्रायल से कभी छूट की मांग नहीं की।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विनेश और बजरंग को ट्रायल से छूट देने का कदम सरकार द्वारा पहलवानों की एकता को तोड़ने की कोशिश है। 62 किग्रा वर्ग में प्रतिस्पर्धा करने वाली साक्षी, विनेश और बजरंग के साथ भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) के निवर्तमान प्रमुख बृज भूषण शरण सिंह के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में सबसे आगे थीं।
भूपिंदर बाजवा के नेतृत्व वाले आईओए एडहॉक पैनल ने प्रोटोकॉल का पालन किए बिना बजरंग और विनेश को छूट देने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। अंडर -20 विश्व चैंपियन अंतिम पंघाल और 65 किलोग्राम के पहलवान सुजीत कलकल ने दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है।
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ये भी पढ़ेंः बृज भूषण सिंह ने बजरंग और विनेश की डायरेक्ट एंट्री पर उठाए सवाल बोले सब साफ होता जा रहा है
साक्षी ने कहा- “जैसा कि आप सभी जानते हैं, हमने एशियाई खेलों की तैयारी के लिए सरकार से अतिरिक्त समय मांगा था। हमने उनसे 10 अगस्त के बाद हमारे ट्रायल आयोजित करने का अनुरोध किया था। सरकार ने हमें समय भी दिया, जिसके बाद हम यहां प्रशिक्षण के लिए आए, लेकिन पिछले 3-4 दिनों में यह सामने आया है कि दो कैटेगरी के लिए सीधी प्रविष्टियां भेजी जा रही हैं।” साक्षी वर्तमान में अमेरिका में प्रशिक्षण ले रही हैं।
उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि वह छूट के खिलाफ हैं और इसलिए उन्होंने उस प्रस्ताव को ठुकरा दिया जिसमें ओलंपिक पदक विजेता होने के कारण उनके नाम पर भी विचार किया जाना था। साक्षी ने कहा, “मुझे ई-मेल करके भी कहा गया था कि मेरे नाम पर भी विचार किया जाएगा, लेकिन मैंने मना कर दिया। मैं ट्रायल के बिना नहीं जाना चाहती।”
उन्होंने आगे कहा- न तो मैं बिना किसी ट्रायल के किसी टूर्नामेंट में गई हूं और न ही अब ऐसा करना चाहती हूं। हमने केवल समय के बारे में चर्चा की थी कि हमारे परीक्षण 10 अगस्त के बाद होने चाहिए। इसे नहीं किया जा रहा है। साक्षी ने आगे कहा, “मैं सिर्फ इतना कहना चाहती हूं कि सभी को न्याय और निष्पक्ष चयन का मौका मिलना चाहिए।”
इससे पहले, एक ट्वीट में उन्होंने आरोप लगाया कि यह शीर्ष पहलवानों के बीच कलह पैदा करने का एक प्रयास किया जा रहा है। मलिक ने एक ट्वीट में लिखा- “सरकार ने सीधे नाम भेजकर पहलवानों के बीच एकता को तोड़ने का प्रयास किया है। मैं सरकार के इस कृत्य के पीछे के इरादों को लेकर चिंतित हूं। हमने उनसे मुकदमे की तारीखों को स्थगित करने का अनुरोध किया था, लेकिन सरकार ने ऐसा करके हमें बदनाम किया है।”
बृज भूषण को गुरुवार को यौन उत्पीड़न के आरोप में पुलिस द्वारा आरोप पत्र दायर करने के बाद दिल्ली की एक अदालत से जमानत मिल गई।
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