Anurag Thakur Supreme Court Relief: 5 फरवरी को बीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष और भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर के लिए बड़ी खुशखबरी मिली. सुप्रीम कोर्ट ने ठाकुर को बीसीसीआई मामले में बड़ी राहत दी है. साल 2017 में कोर्ट ने अनुराग को बीसीसीआई के कामकाज से जुड़े मामले में दूर रहने का निर्देश दिया था. हालांकि अब वह बीसीसीआई के मामलों में भाग लेने के लिए आजाद हैं.
9 साल बाद मिली सुप्रीम राहत
अनुराग ठाकुर को लगभग 9 साल बाद सुप्रीम राहत मिली है. जनवरी 2017 में अदालत ने अनुराग ठाकुर को बीसीसीआई के कामकाज से 'सीज एंड डिसिस्ट' यानी पूरी तरह दूर रहने का निर्देश जारी किया था. उस समय ठाकुर ने बिना शर्त माफी भी मांगी थी. हालांकि अब शीर्ष अदालत ने उन्हें बीसीसीआई में भाग लेने के लिए स्वतंत्र कर दिया है.
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अनुराग ठाकुर ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर उस पुराने आदेश में संशोधन की मांग की थी, जिसमें उन्हें क्रिकेट बोर्ड के मामलों से जुड़े रहने से "अलग रहने और परहेज करने" (Cease and Desist) का निर्देश दिया गया था.
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ठाकुर ने दी दलील
कोर्ट में ठाकुर ने दलील दी, "वह आदेश मुझे सुने बिना पारित किया गया था. हालांकि, इस अदालत ने बाद में अवमानना और झूठी गवाही की कार्यवाही समाप्त कर दी थी. अब, मैं प्रार्थना करता हूं कि इस 'सीज एंड डेसिस्ट' (कामकाज से अलग रहने) के निर्देश में संशोधन किया जाए."
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पीठ ने क्या कहा?
अनुराग ठाकुर मामले पर पीठ ने कहा "हमारा मानना है कि यह मामला 'सजा और गलती में तालमेल' (आनुपातिकता का सिद्धांत) दिखाने के लिए सही है. कोर्ट का मकसद उन पर उम्रभर का बैन लगाना नहीं था और न ही इसकी जरूरत है. अनुराग ठाकुर पहले ही बिना किसी शर्त के माफी मांग चुके हैं, जिसे कोर्ट ने मंजूर कर लिया था. इसलिए, हम 2 जनवरी 2017 के पुराने आदेश में बदलाव कर रहे हैं. अब अनुराग सिंह ठाकुर बीसीसीआई (BCCI) के कामकाज में नियमों के हिसाब से दोबारा शामिल हो सकते हैं."
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