साल के तीसरे टेनिस ग्रैंड स्लैम विम्बलडन 2026 के सेंटर कोर्ट पर जब वर्ल्ड नंबर-1 यानिक सिनर ने लगातार दूसरी बार ट्रॉफी उठाई, तो यह सिर्फ एक जीत नहीं थी. इसे शायद टेनिस के नए दौर का एक बड़ा ऐलान कहा जा सकता है. 24 साल की उम्र में 5वां ग्रैंड स्लैम, 100वीं मेजर जीत और वर्ल्ड रैंकिंग में नंबर-1 की कुर्सी पर पक्का कब्जा. हैरानी नहीं कि जीत के तुरंत बाद दुनिया भर में उन्हें चाहने वाले फैंस ने सोशल मीडिया पर यानिक सिनर को नंबर-1 ट्रेंड बना दिया.
कुछ ने तो उन्हें टेनिस के मॉर्डन ‘G.O.A.T’ की भी पहचान देने में देर नहीं लगाई. लेकिन इस शानदार जीत के बीच कुछ ऐसे सवाल भी हैं, जिन पर बात होनी चाहिए. मसलन क्या सिनर सच में टेनिस के अगले सबसे बड़े हीरो हैं? या फिर वो अल्काराज़ और ज्वेरेव के साथ मिलकर एक ऐसी नई तिकड़ी बना रहे हैं, जो आने वाले समय में फेडरर, नडाल और जोकोविच जैसे पिछले महान खिलाड़ियों की बराबरी करेगी?
बेसलाइन का दमदार खेल और जोकोविच जैसी दिमागी मजबूती
दरअसल फाइनल में एक वक्त पर ऐसा लगा था कि मुकाबला ज़ोरदार होगा या शायद ज्वेरेव इसे जीत भी सकते हैं. ज्वेरेव ने पहला सेट जीतकर शानदार शुरुआत की थी और तो और सिनर पर दबाव भी बना दिया था. लेकिन दूसरे सेट में घुटने की चोट के कारण ज्वेरेव की लय ऐसी बिगड़ी कि वापसी करना मुश्किल हो गया. लेकिन इस दौरान सेंटर कोर्ट पर सिनर के खेल की वो खूबी भी नज़र आई जिसने सभी का दिल जीत लिया.
टेनिस के जानकारों की मानें तो सिनर के खेल की सबसे बड़ी खूबी उनका शांत स्वभाव और बेसलाइन से लगाए गए उनके ज़ोरदार शॉट्स हैं. विम्बलडन फाइनल में जब वह ज्वेरेव के खिलाफ पहला सेट हार गए, तो उनके चेहरे पर कोई टेंशन नहीं थी. नोवाक जोकोविच की तरह ही, उन्होंने अपने दिमाग को शांत रखा और बेहतरीन तरीके से कोर्ट को कवर करते हुए मैच पलट दिया. दबाव के पलों में उनका यह ठंडा दिमाग और अचानक से डिफेंस को अटैक में बदल देने का हुनर उन्हें आज के दौर का सबसे खतरनाक खिलाड़ी बनाता है. सेमीफाइनल में खुद जोकोविच को सीधे सेटों में हराना इस बात का सबसे बड़ा सबूत है.
ज्वेरेव की चुनौती और मॉर्डन टेनिस का इम्तिहान!
यह फाइनल सिर्फ सिनर की तारीफों के लिए नहीं था. जर्मनी के अलेक्जेंडर ज्वेरेव ने फाइनल हारकर भी यह साबित कर दिया कि वह इस नई पीढ़ी के सबसे बड़े और खतरनाक खिलाड़ियों में से एक हैं. 2026 फ्रेंच ओपन का खिताब जीतने के बाद से गज़ब की फॉर्म में चल रहे ज्वेरेव का आत्मविश्वास पूरे विम्बलडन के दौरान शानदार दिखा. करीब साढ़े छह फीट की लंबाई के कारण उनकी सर्विस बेहद ताकतवर और खतरनाक मानी जाती है.
उसपर उनका अटैकिंग खेलने का स्वभाव और मज़बूत हुई बेसलाइन गेम के साथ बेहतरीन टू-हेन्डेड बैकहैंड आज के टेनिस फैंस को राफेल नडाल की याद दिलाता है. कोर्ट पर उनका डिफेंस और मूवमेंट गजब का है, अगर 2022 में ज्वेरेव को पैर की गंभीर चोट ना हुई होती तो इस खिलाड़ी के आंकड़े यकीनन कुछ और होते. खेल के जानकारों की मानें तो 2026 में दिखा ज्वेरेव का नया अंदाज़ उनके जुझारू व्यक्तित्व को दिखाता है. पूरी संभावना है कि 29 साल के हो चुके ज्वेरेव अपने फैंस के लिए अगले कुछ साल में कई ग्रैंड स्लैब की खिताबी लड़ाई लड़ते और इतिहास रचते नज़र आ सकते हैं.
अल्काराज़ के न होने से बदला ‘समीकरण’?
वैसे मॉर्डन टेनिस में बिग-3 का युग खत्म होने के बाद जिस एक खिलाड़ी का सबसे मज़बूत दबदबा दिखता है, वो हैं 23 साल के स्पैनिश सेनसेशन कार्लोस अल्काराज़. इसी साल जनवरी 2026 में अल्काराज ने ऑस्ट्रेलियन ओपन का खिताब जीतकर इतिहास का सबसे युवा ‘करियर ग्रैंड स्लैम’ विजेता बनने का रिकॉर्ड बनाया था. अब तक करियर में 7 ग्रैंड स्लैम जीत चुके अल्काराज़ अपनी दाएं हाथ की कलाई की चोट के चलते 4 महीनों से टेनिस कोर्ट से दूर हैं. इसी वजह से उन्होंने फ्रेंच ओपन और विंबलडन जैसे बड़े टूर्नामेंट्स से अपना नाम वापस ले लिया था.
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चोट की वजह से इस साल उनका विम्बलडन न खेलना एक बड़ा सवाल छोड़ गया कि ‘अगर वो होते तो क्या होता?’. शायद अल्काराज़ अगर पूरी तरह फिट होकर सेंटर कोर्ट पर उतरते, तो कहानी कुछ और होती! अल्काराज़ की ज़बरदस्त फुर्ती, उनके ड्रॉप शॉट्स और आक्रामक खेल को सिनर के शांत खेल का सबसे बड़ा तोड़ माना जाता है. अल्काराज़ के बिना सिनर की जीत शानदार है, लेकिन असली परीक्षा अल्काराज़ के वापस आने पर ही शुरू होगी. बीते कुछ सालों में खेल के हर कोर्ट फिर चाहे वो क्ले हो, ग्रास हो या हार्ड कोर्ट अल्काराज ने सभी जगह अपने खेल से राज किया है.
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नए चैंपियन बिग-3 का इतिहास दोहरा पाएंगे?
फेडरर का क्लास, नडाल का कभी हार न मानने वाला जज़्बा और जोकोविच की ज़बरदस्त फुर्ती. इन तीनों ने मिलकर टेनिस पर 20 सालों तक राज किया. अब यही उम्मीद सिनर, अल्काराज़ और ज्वेरेव की इस तिकड़ी से की जा रही है. 5 ग्रैंड स्लैम के साथ सिनर ने शुरुआत तो बुलेट ट्रेन की रफ्तार से की है, लेकिन बिग-3 के 20 से ज्यादा स्लैम्स के पहाड़ तक पहुंचने के लिए उन्हें सालों तक खुद को फिट रखना होगा. ग्रास कोर्ट पर सिनर का आसान खेल फेडरर की याद दिलाता है और खुद को बेहतर बनाने की भूख नडाल जैसी है. लेकिन असली चुनौती इस फॉर्म को अगले 10-12 सालों तक बनाए रखने की है.
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भविष्य को ‘बिग-3’ की पहचान देना जल्दबाज़ी!
इसमें कोई शक नहीं कि कार्लोस अल्काराज़, यानिक सिनर और अलेक्जेंडर ज्वेरेव ये तीनों नाम ही मॉर्डन मेन्स टेनिस की पहचान और नए रोल मॉडल बनकर उभरे हैं. लेकिन उन्हें अभी से ‘महान’ या ऑल टाइम बेस्ट की फेहरिस्त में शामिल कर लेना जल्दबाजी होगी. सच तो यह है कि आज के टेनिस में सिर्फ किसी एक खिलाड़ी का राज नहीं चलने वाला. अल्काराज और सिनर भले ही कितनी भी तेज़ी से आगे बढ़ रहे हों, लेकिन उनकी आपस में तुलना और टक्कर सालों तक चलती रहेगी. और इस रेस में ज्वेरेव वह तीसरा नाम हैं, जो कभी भी बाजी पलट सकते हैं. बिल्कुल वैसे ही जैसे एक समय फेडरर और नडाल की टक्कर ने पूरी दुनिया को दीवाना बना दिया था. टेनिस का शानदार भविष्य अब इन्हीं तीन चैंपियंस के हाथों में है.
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