हमारे साथ जुड़ें X IG YT FB
Trending: CJP ProtestGyanesh KumarSIRBigg Boss 20

न कोई शोर, न फेयरवेल मैच! क्या सिस्टम की बलि चढ़ गए गाबा का घमंड तोड़ने वाले अजिंक्य रहाणे?

नाम का मतलब भले ही ‘अजेय’ हो लेकिन अजिंक्य रहाणे की असली ताकत, मैदान के नतीजों से बढ़कर उनका साफ-सुथरा खेल और कभी हार न मानने वाला जज्बा रहा. इंटरनेशनल क्रिकेट के सभी फॉर्मेट्स को अलविदा कहने वाले रहाणे ने कभी पब्लिसिटी के लिए शोर नहीं मचाया. एक खेल पत्रकार के रूप में उनके पूरे करियर को बहुत करीब से देखने के बाद मेरी राय यही है कि कठिन पिचों पर टीम की ढाल बनने से लेकर ऑस्ट्रेलिया में ऐतिहासिक जीत दिलाने तक, रहाणे की कहानी भारतीय क्रिकेट के सबसे शांत और खूबसूरत पन्नों में हमेशा जिंदा रहेगी.

विज्ञापन
Pic Credit- AI Generated

बचपन में स्कूल की किताबों में एक शब्द पढ़ा था… ‘अजिंक्य’! टीचर यानी वो जिसे कोई हरा न सके. भारतीय क्रिकेट में फैंस ने इस नाम को एक खिलाड़ी के रूप में मैदान पर उतरते देखा. लेकिन 30 जुलाई 2026 के दिन जब अजिंक्य रहाणे ने क्रिकेट के हर फॉर्मेट से संन्यास का ऐलान किया, तो उन्होंने इस नाम को एक अलग ही पहचान दे दी. जब उन्होंने अपना वीडियो मैसेज शेयर किया तो उनकी भर आई आवाज़ ने हर फैन को भावुक कर दिया.

रहाणे ने कहा कि जैसे क्रिकेट में सही टाइमिंग से शॉट खेला जाता है, वैसे ही खेल से आगे बढ़ने की भी एक सही टाइमिंग होती है. दिल छू लेने वाली बात कहते हुए रहाणे ने माना कि ‘अजिंक्य’ का मतलब अजेय होता है. लेकिन क्रिकेट ने उन्हें कई बार हारना और अपनी गलतियों से सीखना सिखाया. वे मैदान पर हारे, गलतियां भी हुईं लेकिन फैंस के दिलों में वे कभी नहीं हारे. बिना किसी शो-ऑफ के लिखी गई उनकी यह विदाई सीधी दिल में उतर गई.

चमक-धमक से दूर रहाणे का अलग था अंदाज

अहमदनगर के एक छोटे से शहर से निकलकर मुंबई के कड़े क्रिकेट कल्चर में ढले रहाणे कभी सुर्खियों में रहने की रेस में नहीं दौड़े. एमएस धोनी जैसा ठंडा दिमाग और राहुल द्रविड़ जैसी सब्र की दीवार उनकी पहचान बन गई. मुझे याद है 2008 से 2011 का वो दौर जब आईपीएल की शुरूआत के बाद भारतीय क्रिकेट तेज़ी से बदल रहा था. बल्लेबाज़ों के बीच लगभग हर बॉल पर चौका-छक्का मारने और विरोधी क्रिकेटर्स के खिलाफ अग्रेशन दिखाने का क्रेज बढ़ रहा था.

विज्ञापन

उसी दौर में भी रहाणे ने अपने पुराने क्लासिक स्टाइल और अनुशासन का साथ कभी नहीं छोड़ा. ऑफ स्टंप के बाहर जाती मुश्किल गेंदों के साथ-साथ असमान उछाल लेती गेंदों को शांत दिमाग से डिफेंस करना उनकी सबसे बड़ी खूबी थी. टीम जीते या हारे उनका रवैया हमेशा एक जैसा रहा. यही वजह है कि क्रिकेट के फैंस से लेकर विरोधी टीम के क्रिकेटर्स भी उन्हें हमेशा ‘जेंटलमैन’ मानकर ही याद रखेंगे.

टीम इंडिया के बड़े संकटमोचक थे रहाणे

सच कहूं तो रहाणे कभी आसान मौकों के खिलाड़ी रहे ही नहीं. जब-जब भारतीय टीम विदेशी पिचों पर फंसी, अजिंक्य ने अपने नाम के अनुरूप चट्टान बनकर खड़े होने का काम किया. इंग्लैंड की स्विंग होती पिचें हों, साउथ अफ्रीका का बाउंस हो या ऑस्ट्रेलिया की तेज गेंदबाजी, रहाणे की क्लास ऐसे ही मौकों पर सबसे ज्यादा निखरकर आती थी. खासतौर से विराट कोहली और चेतेश्वर पुजारा के साथ खेलते हुए वो गेंदबाजों को थकाते थे. उनकी अच्छी गेंदों को सम्मान देते थे और फिर क्रीज पर सेट होकर अपनी स्टाइल में रन बनाते थे. 2014 में इंग्लैंड के खिलाफ लॉर्ड्स में टेस्ट शतक से लेकर 2020 की मेलबर्न टेस्ट की यादगार शतकीय पारियों तक, रहाणे ने बार-बार साबित किया कि जब टीम पर संकट आता था तो वो संकटमोचक बनने के लिए तैयार रहते थे.

विज्ञापन

फैंस ने दिया था मेलबर्न के महाराज का नाम!

एक क्रिकेटर के तौर पर अगर किसी खिलाड़ी का करियर रहाणे जितना लंबा और उपलब्धियों से भरा हो, तो यकीनन इस बात का चुनाव करना मुश्किल होगा. शायद रहाणे के करियर की भी सबसे बड़ी उपलब्धि चुनना आसान नहीं है. लेकिन मेरी नज़र में कोविड-19 की महामारी के दौर में साल 2020-21 का टीम इंडिया का ऑस्ट्रेलिया दौरा हमेशा याद रखा जाएगा. एडिलेड टेस्ट में पूरी टीम महज 36 रन पर ऑलआउट हो गई थी.

ये भी पढ़ें: मोहम्मद शमी के बाद Team India के इस स्टार के करियर पर मंडरा रहा है खतरा, श्रीलंका में मचाना होगा धमाल

विज्ञापन

सीरीज़ के लिए चुने गए रेगुलर कप्तान विराट कोहली पैटरनिटी लीव लेकर बीच दौरे पर घर लौट गए थे, टीम का मनोबल पूरी तरह टूट चुका था. ऐसे मुश्किल दौर में रहाणे ने टीम की कप्तानी संभाली. उन्होंने बिना किसी शोर-शराबे के बिखरी हुई टीम को एक साथ जोड़ा और मेलबर्न में कप्तानी शतक जड़कर टीम की वापसी कराई. जिसके बाद गाबा के मैदान पर ऑस्ट्रेलिया का 32 साल पुराना घमंड तोड़कर 2-1 से सीरीज जीत ली. एक कप्तान के तौर पर रहाणे का रिकॉर्ड ऐसा रहा कि वे कभी कोई टेस्ट सीरीज नहीं हारे, और यही बात उन्हें इतिहास के सबसे खास कप्तानों की लिस्ट में खड़ा करती है.

करियर में जुड़ सकते थे कुछ और यादगार लम्हे?

85 टेस्ट, 90 वनडे और 20 टी-20 में 8,000 से ज्यादा इंटरनेशनल रन बनाना किसी भी खिलाड़ी के लिए सपने जैसा है. लेकिन रहाणे की काबिलियत देखकर यह मलाल जरूर रहता है कि क्या वे 100 से ज्यादा टेस्ट नहीं खेल सकते थे ? बीते 10 सालों में भारतीय क्रिकेट ने कई सिलेक्शन कमेटियां देखीं, जिन्होंने कई चौंकाने वाले फैसले भी लिए. यहां मुझे लगता है कि मॉडर्न क्रिकेट के तेजी से बदलते ट्रेंड्स और हर बॉल पर रन बनाने के प्रेशर ने उनकी क्लासिक स्टाइल पर असर डाला.

विज्ञापन

ये भी पढ़ें: वैभव सूर्यवंशी के उप-कप्तान बनने पर भड़का ये दिग्गज, 15 साल के खिलाड़ी को दिखाया आईना

यही वजह रही कि पहले वो व्हाइट बॉल क्रिकेट से बाहर हुए. फिर धीरे-धीरे टेस्ट में भी बड़ी पारियां न खेल पाने की वजह से टीम मैनेजमेंट की पहली पसंद नहीं रहे. पीछे मुढ़कर देखा जाए तो ऐसा लगता है कि अगर सिस्टम का थोड़ा और भरोसा उन्हें मिलता तो वो टीम इंडिया के मिडिल ऑर्डर को कुछ और सालों तक मजबूती दे सकते थे.

विज्ञापन

ये भी पढ़ें: RCB के स्टार खिलाड़ी को कोर्ट से बड़ी राहत, दुष्कर्म केस की कार्यवाही पर लगा ब्रेक

मैदान से दूर होकर भी फैंस के पास रहेंगे रहाणे

इंटरनेशनल क्रिकेट से अब बतौर बल्लेबाज़ अजिंक्य रहाणे का सफर पूरा हो गया है. लेकिन अच्छी बात ये है कि क्रिकेट से उनका रिश्ता कभी खत्म नहीं हो सकता. हाल ही में उन्होंने इंग्लैंड में ‘द हंड्रेड’ टूर्नामेंट से कमेंट्री और मेंटरशिप की अपनी नई इनिंग्स शुरू की है. अपने विदाई मैसेज में भी उन्होंने कहा कि वे इस खेल से सीखी बातों को नई जनरेशन के साथ शेयर करते रहेंगे. यानी क्रिकेट लवर्स उन्हें आगे भी अलग अंदाज में देखते रहेंगे. कभी कमेंट्री बॉक्स से मैच का हाल सुनाते हुए तो कभी डगआउट से यंग प्लेयर्स को गाइड करते हुए.

विज्ञापन

ये भी पढ़ें: CSK का पूर्व चैंपियन बना इंग्लैंड का हेड कोच, नए कप्तान का भी हुआ ऐलान

कौन जाने कि अगले आईपीएल सीज़न-20 में अजिंक्या रहाणे किसी टीम के साथ बतौर कोच भी जुड़े हुए दिखाई दें. कुल मिलाकर एक बात डंके की चोट पर दावे के साथ कह सकता हूं कि अजिंक्य रहाणे का नाम जब भी लिया जाएगा तो बात सिर्फ उनके रनों, शतकों या स्लिप में पकड़े गए शानदार कैचों की नहीं होगी. वे याद किए जाएंगे अपनी उस सोच के लिए, जिसमें उन्होंने हमेशा अपने से ऊपर टीम और देश को रखा. जहां दूसरे खिलाड़ी अपने तेवरों और सेलिब्रिटी वाले अंदाज से छाए रहते थे तब रहाणे उस शांत सितारे की तरह चमकते रहे जो बिना किसी ड्रामे के अपना काम ईमानदारी से करता है.

विज्ञापन

ये भी पढ़ें: अजिंक्य रहाणे के अचानक संन्यास पर BCCI ने तोड़ी चुप्पी, जानें क्या कहा

संबंधित खबरें

न्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।

First published on:

Know More: Editorial Guidelines

लेख समाप्त

लेखक के बारे में

ताज़ा खबरें

Sponsored Links by Taboola