पाकिस्तान में चचेरे भाई-बहन के बीच होने वाली शादियों को लेकर एक नई जीन रिसर्च ने वैज्ञानिकों को हैरान कर दिया है. 17 जून को 'नेचर' में छपी एक स्टडी के मुताबिक, पाकिस्तान में लगभग 34,000 लोग 'ह्यूमन नॉकआउट' हैं, यानी ऐसे लोग जिनमें कम से कम एक जीन ने काम करना बंद कर दिया है. डॉक्टरों का मानना है कि एक ही परिवार के बच्चों या रिश्तेदारों में शादी करने से बच्चों में जेनेटिक डिसऑर्डर, जन्मजात बीमारियां और कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं होने की संभावना ज्यादा रहती है. ये नतीजे दक्षिण एशिया की सबसे बड़ी जीनोमिक स्टडीज़ में से एक का हिस्सा हैं. इस स्टडी में देश के 1,73,303 जीनोम का विश्लेषण किया गया, जिससे वैज्ञानिकों का इंसानी जेनेटिक्स और दवा बनाने के तरीके को देखने का नज़रिया बदल गया है.

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स्टडी में हुए चौंकाने वाले खुलासे

कोलंबिया यूनिवर्सिटी वैगेलोस कॉलेज ऑफ़ फिजिशियन एंड सर्जन्स में मेडिकल साइंसेज़ के प्रोफ़ेसर और ग्लोबल जीनोमिक्स के डायरेक्टर दानिश सालेहीन ने एक प्रेस रिलीज़ में कहा कि जीनोम स्टडीज़ में दक्षिण एशियाई लोगों की भागीदारी बहुत कम रही है. दुनिया की आबादी का 25 प्रतिशत हिस्सा होने के बावजूद, ग्लोबल जीनोमिक डेटाबेस में उनकी हिस्सेदारी सिर्फ़ 2 प्रतिशत है. लेकिन दक्षिण एशियाई जीनोम की खास विशेषताएं, जो आबादी के इतिहास और सांस्कृतिक रीति-रिवाजों से बनी हैं, दुनिया भर में मेडिकल क्षेत्र में ऐसी बड़ी कामयाबियों का आधार बन सकती हैं जिनसे हर जगह मरीज़ों को फ़ायदा हो. भारत में इसी तरह की एक रिसर्च, ‘जीनोम इंडिया प्रोजेक्ट’ में पूरे भारत के 83 समूहों के 9,768 स्वस्थ लोगों के पूरे DNA का विश्लेषण किया गया और लगभग 44 मिलियन ऐसे जेनेटिक वैरिएंट्स पाए गए जो ग्लोबल डेटाबेस में मौजूद नहीं थे.

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जेनेटिक रिसर्च में कुछ अनदेखे पहलू

कराची में 'सेंटर फॉर नॉन-कम्युनिकेबल डिसीज़ेज़' में सालेहीन ने जब 'पाकिस्तान जीनोम रिसोर्स' बनाना शुरू किया था, तब से दो दशक बीत चुके हैं. उन्होंने तब जो बात समझी थी, उसकी ओर 1960 के दशक से ही अमेरिका की 'अमिश' आबादी पर हुई स्टडीज़ इशारा कर रही थीं यानी जिन समुदायों में चचेरे भाई-बहनों या रिश्तेदारों के बीच शादी की दर ज़्यादा होती है, वहां जेनेटिक स्टडीज़ करने वाले रिसर्चर्स को एक खास फ़ायदा मिलता है. पाकिस्तान में, चचेरे भाई-बहनों के बीच शादी सदियों से आम बात रही है. आपस में करीबी रिश्ते वाले माता-पिता के बच्चों में एक जैसे जेनेटिक म्यूटेश आते हैं, जिनमें कुछ जीन निष्क्रिय (deactivated) हो जाते हैं. ऐसे 'नॉक-आउट' मामलों से वैज्ञानिकों को ये समझने का मौका मिलता है कि कोई इंसान किसी खास जीन के बिना कैसे काम करता है और क्या बीमारियों के इलाज के लिए कुछ जीनों को 'स्विच ऑफ' किया जा सकता है. शोधकर्ताओं के मुताबिक, ये दुनिया के सबसे बड़े जीनोमिक अध्ययनों में से एक है. अध्ययन से पता चला कि पाकिस्तान में बड़ी संख्या में लोगों में कुछ जीन काम नहीं कर रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद वो नॉर्मल और हेल्दी लाइफ जी रहे हैं. इससे वैज्ञानिकों की उस धारणा को चुनौती मिली है कि कुछ जीन लाइफ के लिए जरूरी होते हैं.

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