मुख्य जानकारी:
- जेम्स वेब टेलीस्कोप ने प्लूटो और टाइटन पर एक बिल्कुल नए और अनदेखे मॉलिक्यूल की खोज की है.
- दोनों ही खगोलीय पिंडों के प्रकाश स्पेक्ट्रम से 5.11 माइक्रोमीटर की एक खास वेवलेंथ गायब पाई गई है.
- यह अनजान पदार्थ इन ग्रहों के वायुमंडल में न होकर सीधे उनकी बर्फीली सतह पर मौजूद है.
- प्लूटो पर इस रहस्यमयी पदार्थ की मौजूदगी टाइटन के मुकाबले तीन गुना अधिक मात्रा में देखी गई है.
- नासा का ड्रैगनफ्लाई रोटरक्राफ्ट साल 2034 में टाइटन पर पहुंचकर इस केमिकल का असली सच सामने लाएगा.
NASA Space Discovery: नासा के जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप (जेडब्ल्यूएसटी) ने अंतरिक्ष विज्ञान की दुनिया में एक बेहद चौंकाने वाली खोज की है. टेलीस्कोप के नए आंकड़ों से पता चला है कि बौने ग्रह प्लूटो और शनि के सबसे बड़े चंद्रमा टाइटन पर एक रहस्यमयी और अनदेखा पदार्थ मौजूद हो सकता है. वैज्ञानिकों को इन दोनों सुदूर ग्रहों के प्रकाश स्पेक्ट्रम में एक खास वेवलेंथ यानी रोशनी की तरंग गायब मिली है. यह अजीबोगरीब संकेत इशारा करता है कि इन दोनों दुनियाओं में एक ऐसा अनजान मॉलिक्यूल छुपा हुआ है, जिसे आज तक हमारे सौर मंडल या इसके बाहर किसी भी अन्य ग्रह पर कभी नहीं देखा गया है.
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वैज्ञानिकों को इस रहस्यमयी पदार्थ का पता कैसे चला?
ब्रह्मांड में मौजूद हर एक तत्व या मॉलिक्यूल इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन की अपनी एक अनोखी वेवलेंथ को सोखता है. खगोलविद दूर स्थित ग्रहों से टकराकर लौटने वाली रोशनी का बारीकी से अध्ययन करते हैं और उसमें काली अवशोषण रेखाओं यानी एब्जॉर्प्शन लाइंस को तलाशते हैं. जून में आर्काइव प्रीप्रिंट सर्वर पर आए एक नए अध्ययन के अनुसार वैज्ञानिकों ने प्लूटो और टाइटन के डेटा में 5.11 माइक्रोमीटर पर एक विशेष एब्जॉर्प्शन लाइन देखी है, जिससे इस नए पदार्थ का पता चला है.
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प्लूटो और टाइटन के बीच यह खोज इतनी अजीब क्यों है?
यह खोज वैज्ञानिकों को इसलिए ज्यादा हैरान कर रही है क्योंकि प्लूटो और टाइटन के बीच आपस में कोई बड़ी समानता नहीं है. टाइटन शनि का सबसे बड़ा चंद्रमा है जो बुध ग्रह से भी आकार में बड़ा है और वहां नदियां तथा महासागर मौजूद हैं. इसके विपरीत प्लूटो पूरी तरह से बर्फ से जमा हुआ एक बेहद छोटा और ठंडा बौने ग्रह है, जो टाइटन के मुकाबले सूरज से चार गुना ज्यादा दूरी पर स्थित है.
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क्या यह अनजान पदार्थ इन ग्रहों के वायुमंडल में मौजूद है?
शुरुआती जांच में वैज्ञानिकों को पता चला है कि प्लूटो और टाइटन दोनों के वायुमंडल में मीथेन और नाइट्रोजन गैस की भारी भरकम मात्रा मौजूद है. इसके बावजूद रिसर्च करने वाली टीम का पूरा दावा है कि 5.11 माइक्रोमीटर की लाइन के लिए जिम्मेदार यह रहस्यमयी मॉलिक्यूल इन दोनों ग्रहों के हवाई वायुमंडल में नहीं, बल्कि सीधे उनकी जमीनी सतह पर मौजूद है.
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इस अनजान मॉलिक्यूल को लेकर वैज्ञानिकों का क्या अनुमान है?
रिसर्च के मुताबिक प्लूटो पर इस अनजान मॉलिक्यूल की मात्रा टाइटन के मुकाबले करीब तीन गुना ज्यादा मोटी और सघन है. वैज्ञानिकों का अनुमान है कि यह अनोखा पदार्थ बेंजीन नाम के रिंग शेप हाइड्रोकार्बन के साथ किसी अनजान केमिकल का मिश्रण हो सकता है. इसके अलावा यह एसिटिलीन या कीटीन बर्फ का कोई नया रूप भी हो सकता है, जिस पर अभी और ज्यादा रिसर्च की जरूरत है.
नासा का ड्रैगनफ्लाई मिशन इस रहस्य को कैसे सुलझाएगा?
इस उलझे हुए ब्रह्मांडीय रहस्य को पूरी तरह सुलझाने के लिए नासा अपने आगामी ड्रैगनफ्लाई अंतरिक्ष यान की मदद ले सकता है. इस मिशन को साल 2028 में लॉन्च करने की योजना है जो साल 2034 तक टाइटन के वायुमंडल में पहुंचकर उड़ान भरेगा. इस हेलीकॉप्टर जैसे क्राफ्ट में लगे आधुनिक उपकरण टाइटन की सतह पर मौजूद इस रहस्यमयी केमिकल की पहचान करके प्लूटो के रहस्य से भी पर्दा उठाएंगे.
निष्कर्ष:
जेम्स वेब टेलीस्कोप की यह नई खोज साबित करती है कि ब्रह्मांड में आज भी ऐसे कई रहस्य हैं जिनसे पर्दा उठना बाकी है. प्लूटो और टाइटन जैसी अलग दुनियाओं पर एक समान अज्ञात पदार्थ का मिलना हमारी वैज्ञानिक समझ को चुनौती देता है. भविष्य के मिशन ही इस रहस्यमयी केमिकल का असली सच सामने ला पाएंगे.