Space Explosion: ब्रह्मांड के रहस्यों को तलाश रहे खगोलविदों के हाथ एक ऐसी बड़ी कामयाबी लगी है जिसने विज्ञान की पुरानी थ्योरी को पूरी तरह हिलाकर रख दिया है. पृथ्वी से लगभग 160,000 प्रकाश वर्ष दूर स्थित एक तारे में अंतरिक्ष का अब तक का सबसे असामान्य और भीषण विस्फोट देखा गया है. यह दुर्लभ घटना लार्ज मैगेलैनिक क्लाउड के पास स्थित एक छोटी उपग्रह आकाशगंगा में दर्ज की गई है. इस महाविस्फोट की सबसे हैरान करने वाली बात यह थी कि इसकी अधिकतम चमक एक सामान्य टाइप 1ए सुपरनोवा के मुकाबले तीन गुना अधिक चमकीली थी. वैज्ञानिकों ने हबल स्पेस टेलीस्कोप की मदद से करीब तीन साल तक इस सुदूर अंतरिक्ष क्षेत्र की लगातार निगरानी की थी जिसके बाद इस ऐतिहासिक धमाके के शुरुआती संकेत मिले.

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हबल और जेम्स वेब टेलीस्कोप ने मिलकर खोला बड़ा राज

इस अद्भुत खगोलीय घटना की बारीकियों और उसकी सटीक प्रक्रिया को समझने के लिए दुनिया के दो सबसे शक्तिशाली टेलीस्कोपों को काम पर लगाया गया था. हबल टेलीस्कोप के शुरुआती ऑप्टिकल प्रेक्षणों से यह अंदाजा तो मिल गया था कि विस्फोट से पहले वहां एक बेहद मंद चमक वाला श्वेत बौना तारा मौजूद था, लेकिन सिर्फ इतने डेटा से असली कहानी का पता लगाना नामुमकिन था. इसके बाद वैज्ञानिकों की शोध टीम ने जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप के निकट-अवरक्त यानी नियर-इन्फ्रारेड इमेजिंग उपकरण का इस्तेमाल किया. जेम्स वेब के इस आधुनिक कैमरे ने अंतरिक्ष की घनी धूल को चीरते हुए सुपरनोवा के मलबे और उसके अवशेषों की एक बेहद स्पष्ट और हाई-रिज़ॉल्यूशन वाली तस्वीर वैज्ञानिकों के सामने लाकर रख दी.

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सूर्य के पूरे जीवनकाल से 100 गुना अधिक निकली ऊर्जा

जब वैज्ञानिकों ने जेम्स वेब से मिले डेटा और स्पेक्ट्रल विश्लेषण के नतीजों की जांच की तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई. इस मृत तारे के मलबे में कार्बन और ऑक्सीजन की मात्रा सामान्य टाइप 1ए सुपरनोवा के तय सैद्धांतिक अनुमानों से कहीं ज्यादा पाई गई. इसके अलावा इस अनोखे धमाके में द्रव्यमान यानी मैटर के नष्ट होने की रफ्तार विज्ञान के मानक मॉडल से पांच गुना अधिक दर्ज की गई. सबसे चौंकाने वाला आंकड़ा इस महाविस्फोट से पैदा हुई ऊर्जा का था जो लगभग 1.5 × 10⁴⁴ जूल मापी गई है. विज्ञान की भाषा में समझाएं तो यह महाविस्फोट इतना भयानक था कि इसमें से हमारे सूर्य के पूरे जीवनकाल में निकलने वाली कुल ऊर्जा से भी 100 गुना अधिक ऊर्जा कुछ ही पलों में बाहर निकल गई.

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बदलेगा विज्ञान का नियम और सामने आया नया सुपरनोवा

अंतरिक्ष वैज्ञानिकों का स्पष्ट कहना है कि यह एक बेहद असाधारण और दुर्लभ परिणाम है जो इंसानों के पास मौजूद तारकीय विस्फोट के मौजूदा सिद्धांतों और मॉडलों की समझ से बिल्कुल परे है. इस अद्भुत खोज का सीधा मतलब यह है कि इस तारे के फटने का तरीका ब्रह्मांड के पुराने नियमों से पूरी तरह अलग है. वैज्ञानिकों का अनुमान है कि यह एक बिल्कुल नए प्रकार का सुपरनोवा विस्फोट हो सकता है जिसकी मुख्य वजह अतीत में आपस में जुड़े दो श्वेत बौने तारों का आपस में टकराना या असममित विलय हो सकता है. इस टकराव के कारण आखिरी समय में पदार्थ का इतना हिंसक निष्कासन हुआ जिसने चमक और गति की सभी सैद्धांतिक सीमाओं को तोड़ दिया और अब यह खोज वर्तमान ब्रह्मांडीय मॉडलों को दोबारा लिखने पर मजबूर कर रही है.

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