Science News: दुनिया का एक सबसे दुर्लभ पेड़, जिसका अब पूरे जंगल में सिर्फ एक ही पौधा बचा है, उसे विलुप्त होने से बचाने के लिए वैज्ञानिकों ने एक अनोखी रेस शुरू की है. चिली के रॉबिन्सन क्रूसो द्वीप पर एक ऊँची और खतरनाक चट्टान पर मौजूद इस आखिरी पेड़ से वैज्ञानिकों ने सैकड़ों बीज इकट्ठे किए हैं. 'डेंड्रोसेरिस नेरीफोलिया' नाम का यह पेड़ सालों से इंसानी दखल, जंगलों की कटाई, मिट्टी के कटाव और आग जैसी दिक्कतों की वजह से खत्म होने की कगार पर पहुँच गया है. वैज्ञानिकों का मानना है कि इन बीजों की मदद से इस खास वनस्पति को एक नया जीवन मिल सकता है, जिससे धरती से इसका नामोनिशान नहीं मिटेगा.
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ब्रिटेन की लैब में भेजे गए आखिरी उम्मीद के बीज
चट्टान पर अकेले बचे इस पेड़ से जुटाए गए बीजों को हाल ही में इंग्लैंड के वेस्ट ससेक्स में स्थित 'मिलेनीयम सीड बैंक' भेजा गया है. यहाँ वैज्ञानिक इन बीजों को सुरक्षित रखने और उनसे नए पौधे उगाने के लिए लगातार रिसर्च कर रहे हैं. एक्स-रे जांच में पता चला है कि भेजे गए बीजों में से 25 बीज पूरी तरह सेहतमंद हैं और उनमें से सात पौधों ने तो गार्डन के अंदर अपनी जड़ें भी जमा ली हैं. वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि जब ये नए पौधे बड़े होकर फूलों से भर जाएंगे, तो इनसे और ज्यादा बीज तैयार किए जा सकेंगे. इस तरह की कोशिश से अगर जंगल में मौजूद आखिरी पेड़ को कुछ हो भी जाता है, तो भी इसकी प्रजाति हमेशा के लिए सुरक्षित रहेगी.
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जान जोखिम में डालकर चट्टान से जुटाए गए बीज
इस अनोखे पेड़ के बीजों को इकट्ठा करना कोई आसान काम नहीं था, क्योंकि यह इलाका बेहद पथरीला है और वहाँ गाड़ियों के जाने का कोई रास्ता नहीं है. वैज्ञानिकों की टीम को पहले चार घंटे का सफर तय करना पड़ा और फिर दो घंटे की कठिन चढ़ाई के बाद वे पेड़ तक पहुँच पाए. यह आखिरी पेड़ एक ढलान वाली खतरनाक चट्टान पर टिका हुआ है, जिसे गिरने से बचाने के लिए रस्सियों का सहारा दिया गया है. हर साल मार्च के महीने में जब इसके बीज पकते हैं, तो चिली के पार्क रेंजर्स अपनी जान जोखिम में डालकर पेड़ के तने के सहारे चढ़ते हैं और फूलों वाली टहनियों पर जाल बांधकर बीजों को इकट्ठा करते हैं.
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इनब्रीडिंग और कम फर्टिलिटी का सता रहा है डर
भले ही वैज्ञानिकों को बीज मिल गए हैं, लेकिन इस पौधे को पूरी तरह बचाने की राह में कई जैविक चुनौतियाँ भी खड़ी हैं. सिर्फ एक ही पेड़ बचने के कारण वैज्ञानिकों को जेनेटिक खराबी और कम फर्टिलिटी जैसी दिक्कतों का डर सता रहा है, जो इसकी आबादी को बढ़ाने में रुकावट बन सकती हैं. हालांकि यह पेड़ खुद को फर्टिलाइज करने की ताकत रखता है, लेकिन टहनियाँ कम होने की वजह से बीजों की संख्या बहुत सीमित रहती है. अब वैज्ञानिक कंट्रोल्ड माहौल में इसके अंकुरण की पूरी प्रक्रिया को समझ रहे हैं, ताकि भविष्य में इस तकनीक की मदद से चिली के जंगलों में फिर से इस दुर्लभ पेड़ की पूरी आबादी को बसाया जा सके.
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