Vastu Tips: द्रिक पंचांग के अनुसार 19 मार्च, 2026 से विक्रम संवत 2083 की शुरुआत होने जा रही है. नए संवत्सर को शुभ शुरुआत का प्रतीक माना जाता है. इसी कारण कई परिवार इस समय नए घर में प्रवेश या शिफ्ट होने को अच्छा मानते हैं. मान्यता है कि नए साल की शुरुआत सकारात्मक ऊर्जा के साथ होनी चाहिए. ऐसे में यदि आप भी नए घर में शिफ्ट होने की योजना बना रहे हैं, तो वास्तु शास्त्र से जुड़े कुछ जरूरी नियमों पर ध्यान देना उपयोगी माना जाता है. आपको बता दें, इन वास्तु नियमों को ध्यान में रखने से जीवन में तरक्की होती है, अपार आर्थिक लाभ होता है और सफलता मिलती है. आइए जानते हैं, क्या हैं ये जरूरी वास्तु नियम?

नए संवत्सर में नए घर में शिफ्ट

नए संवत्सर को भारतीय परंपरा में नई शुरुआत का समय माना गया है. यही कारण है कई लोग इस अवसर पर गृह प्रवेश या नए घर में शिफ्ट होने का निर्णय लेते हैं और वास्तु नियमों का ध्यान रखते हैं. वास्तु शास्त्र के अनुसार घर की दिशा, कमरों की स्थिति और प्रवेश द्वार का स्थान घर के माहौल को प्रभावित करता है. इसलिए नए संवत की शुरुआत से पहले घर की कुछ व्यवस्थाओं पर ध्यान देना जरूरी माना गया है.

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मुख्य द्वार का रखें विशेष ध्यान

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घर का मुख्य प्रवेश द्वार सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है. वास्तु के अनुसार घर का गेट उत्तर, पूर्व या उत्तर-पूर्व दिशा में होना अच्छा बताया जाता है. इन दिशाओं को शुभ और ऊर्जा देने वाला माना जाता है. ध्यान रखें कि मुख्य गेट के सामने किसी दूसरे घर की सीढ़ी या गेट सीधे न हों. इससे रास्ता बाधित दिख सकता है. साथ ही प्रवेश द्वार पर पर्याप्त रोशनी होनी चाहिए. उजाला घर को स्वागत योग्य बनाता है.

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मास्टर बेडरूम की सही दिशा

नए घर में प्रवेश से पहले मास्टर बेडरूम की दिशा भी देखना जरूरी माना जाता है. वास्तु के अनुसार दक्षिण-पश्चिम दिशा में स्थित बेडरूम सबसे उपयुक्त माना जाता है. कहा जाता है कि इस दिशा में कमरा होने से घर में स्थिरता और शांति का माहौल रहता है. इसके अलावा बिस्तर के सामने सीधे शीशा लगाने से बचने की सलाह भी दी जाती है.

किचन का स्थान क्यों है महत्वपूर्ण

घर की रसोई को परिवार की ऊर्जा का केंद्र माना जाता है. वास्तु शास्त्र के अनुसार किचन को आग्नेय कोण यानी दक्षिण-पूर्व दिशा में होना बेहतर बताया जाता है. इस दिशा को अग्नि तत्व से जोड़ा जाता है. खाना बनाते समय साफ-सफाई और उचित वेंटिलेशन भी जरूरी है. खिड़की या एग्जॉस्ट का होना उपयोगी माना जाता है.

बाथरूम और टॉयलेट की व्यवस्था

नए घर में शिफ्ट होने से पहले बाथरूम और टॉयलेट की दिशा पर भी ध्यान देना चाहिए. वास्तु के अनुसार इन्हें उत्तर-पश्चिम दिशा में बनवाना बेहतर माना जाता है. उत्तर-पूर्व दिशा में इनका निर्माण सही नहीं माना जाता. साथ ही बाथरूम और टॉयलेट हवादार होने चाहिए. इनके दरवाजे बंद रखने की सलाह भी दी जाती है.

पूजा घर की सही जगह

घर का पूजा घर पवित्र स्थान माना जाता है. वास्तु के अनुसार मंदिर को उत्तर-पूर्व या पूर्व दिशा में स्थापित करना शुभ माना जाता है. पूजा घर के आसपास हल्के और शांत रंग का उपयोग करना अच्छा माना जाता है. यह स्थान साफ और शांत होना चाहिए. ध्यान रखें कि मंदिर को किचन या बाथरूम के पास न रखें.

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र की मान्यताओं पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.