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Sawan 2025: उत्तराखंड, हिमाचल और नेपाल में सावन की तिथियों में अंतर क्यों? 15 अगस्त को होगा समापन

Sawan 2025: हर साल बहुत ही धूमधाम से सावन का पर्व मनाया जाता है, जिसकी तिथि द्रिक पंचांग के अनुसार तय की जाती है। हालांकि उत्तराखंड, हिमाचल और नेपाल के कुछ हिस्सों में द्रिक पंचांग की जगह सौर पंचांग का पालन किया जाता है। चलिए जानते हैं सौर पंचांग से जुड़ी जरूरी बातों के बारे में।

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सांकेतिक फोटो, Credit- News24 Graphics

Sawan 2025: सनातन धर्म के लोगों के लिए सावन का खास महत्व है, जो कि करीब एक माह तक चलता है। द्रिक पंचांग के अनुसार, हर साल श्रावण मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि से सावन का आरंभ होता है। जबकि श्रावण माह की पूर्णिमा तिथि पर सावन माह का समापन होता है। साल 2025 में 11 जुलाई से सावन का आरंभ हो गया है, जिसका समापन 09 अगस्त को रक्षा बंधन के दिन होगा।

हालांकि उत्तराखंड, हिमाचल और नेपाल के कुछ हिस्सों में 09 अगस्त की जगह 15 अगस्त 2025 को सावन माह का समापन होगा। दरअसल, यहां पर सावन की तिथि द्रिक पंचांग की जगह सौर पंचांग के जरिए तय की जाती है। इस वजह से हर साल यहां पर एक महीने से ज्यादा तक सावन का महीना चलता है।

15 अगस्त को होगा सावन का समापन

सौर पंचांग सूर्य की स्थिति पर आधारित होता है, जो ऋतुओं और सूर्य की स्थिति के अनुसार तिथियों को दर्शाता है। उत्तराखंड, हिमाचल और नेपाल में अधिकतर जगह पर सौर पंचांग का पालन किया जाता है। यहां महीने की शुरुआत संक्रांति यानी सूर्य के राशि परिवर्तन के दिन से होती है। इसी आधार पर यहां 16 जुलाई से लेकर 15 अगस्त 2025 तक सावन का महीना चलेगा।

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उत्तराखंड में सावन के शुरू होते ही हरेला पर्व का आरंभ हो जाता है, जिस दौरान भगवान शिव और देवी पार्वती के विवाह का उत्सव मनाया जाता है। खासतौर पर उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में बड़ी ही धूमधाम से ये पर्व मनाया जाता है। बता दें कि इस पर्व को हरियाली, समृद्धि और पर्यावरण संरक्षण का प्रतीक माना जाता है, जिस दौरान भगवान शिव की विशेष रूप से पूजा की जाती है।

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सौर पंचांग का महत्व

सौर पंचांग में साल को 12 सौर महीनों में विभाजित किया गया है। हालांकि सौर महीने का आरंभ 01 जुलाई से नहीं होता है बल्कि जब-जब सूर्य देव राशि परिवर्तन करते हैं, तब-तब सौर माह का आरंभ होता है। प्रत्येक सौर का महीना 30 से 31 दिन का होता है। बता दें कि जिस दिन सूर्य का राशि परिवर्तन होता है, उस दिन संक्रांति का पर्व मनाया जाता है। उस संक्रांति को उस राशि के नाम से जाना जाता है, जिसमें सूर्य देव गोचर यानी प्रवेश करते हैं। जैसे कि 17 अगस्त 2025 को सूर्य देव सिंह राशि में गोचर करेंगे, जिस दिन सिंह संक्रांति का पर्व मनाया जाएगा।

संक्रांति का महत्व

प्रत्येक संक्रांति पर सूर्य देव की पूजा करना शुभ माना जाता है। सूर्य देव की पूजा करने के साथ-साथ गुड़, गेहूं, तांबे से बनी वस्तुएं और लाल रंग के कपड़ों का दान किया जाता है। इससे कुंडली में सूर्य ग्रह की स्थिति मजबूत होती है, जिससे व्यक्ति का समाज में मान-सम्मान बढ़ता है। साथ ही त्वचा में निखार आता है और व्यक्ति हर परिस्थिति का डटकर सामना करता है।

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है।

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