Shani Puja: महाकाल की नगरी उज्जैन केवल शिव भक्ति के लिए ही नहीं, बल्कि शनि दोषों से मुक्ति दिलाने वाले एक अत्यंत प्राचीन और दुर्लभ मंदिर के लिए भी प्रसिद्ध है. इस शिवनगरी में क्षिप्रा नदी के तट पर स्थित शनि मंदिर अपनी अनूठी परंपराओं और चमत्कारों के लिए जाना जाता है, जहां देश भर से श्रद्धालु साढ़ेसाती और ढैय्या के कष्टों को दूर करने की अर्जी लेकर आते हैं. आइए जानते हैं, इस अनोखे शनि मंदिर के बारे में जहां काले नहीं ‘भगवा’ रंग में दिखते हैं शनिदेव, पिंडी रूप में होती है पूजा और दर्शन मात्र से साढ़ेसाती-ढैय्या समेत सभी शनि दोष से मिलती है मुक्ति.
राजा विक्रमादित्य ने बनवाया था मंदिर
शिप्रा नदी के त्रिवेणी घाट के किनारे बसा यह नवग्रह शनि मंदिर लगभग 2000 साल पुराना माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस मंदिर का निर्माण न्यायप्रिय राजा विक्रमादित्य ने करवाया था. यह स्थान इसलिए भी खास है क्योंकि यहां शनिदेव के साथ-साथ सभी नवग्रहों की मौजूदगी मानी जाती है. शनिवार को पड़ने वाली अमावस्या के दिन यहां का नजारा देखने लायक होता है, जब हजारों भक्त अपनी कुंडली के ग्रहों को शांत करने के लिए यहां अनुष्ठान करते हैं.
यहां पिंडी और भगवा रूप में हैं शनि
आमतौर पर शनिदेव के मंदिरों में उनकी प्रतिमा काले रंग की होती है, लेकिन उज्जैन के इस मंदिर में उनकी मूर्ति का रंग भगवा है. पहली नजर में यह प्रतिमा भगवान हनुमान की तरह प्रतीत होती है. मंदिर के मुख्य गर्भगृह में शनिदेव पिंडी के रूप में स्थापित हैं, जिन पर चौबीसों घंटे तेल टपकता रहता है. शनिदेव के इस शांत और सौम्य रूप को भगवान शिव का ही एक स्वरूप माना जाता है. कहा जाता है कि यह दुनिया का इकलौता ऐसा मंदिर है जहां शनिदेव ‘बाबा’ के रूप में पूजे जाते हैं.
यह भी पढ़ें: Guru Margi: 11 मार्च से गुरु चलेंगे सीधी चाल, इन 5 राशियों पर हो सकती है धन वर्षा, बैंक-बैलेंस होगा डबल
चप्पल और वस्त्र छोड़ने की अनोखी परंपरा
इस मंदिर से जुड़ी एक बहुत ही रोचक और प्राचीन मान्यता है. स्थानीय लोगों के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति शारीरिक या मानसिक कष्ट से बहुत अधिक परेशान है, तो वह मंदिर परिसर में ही अपने पहने हुए वस्त्र और चप्पल छोड़कर चला जाता है. माना जाता है कि ऐसा करने से व्यक्ति अपनी बीमारियां और ग्रहों की नकारात्मकता वहीं छोड़ देता है और उसे परेशानियों से तुरंत निजात मिलती है. मंदिर प्रांगण में मौजूद एक विशाल और पुराना पीपल का पेड़ भी श्रद्धा का केंद्र है, जहां धागा बांधने से भक्तों की हर मनोकामना पूरी होती है.
शनि दोषों से मुक्ति के लिए ‘दशा पूजन’
यदि किसी जातक पर शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या का अशुभ प्रभाव चल रहा है, तो यहां का ‘दशा पूजन’ उसके लिए रामबाण माना जाता है. भक्त दूर-दूर से इस विशेष पूजा के लिए उज्जैन पहुंचते हैं. ज्योतिषियों का मानना है कि यहां पूजा करने से शनिदेव की वक्र दृष्टि का प्रभाव खत्म होता है और जीवन में सुख-समृद्धि का संचार होता है. मंदिर की सादगी और आध्यात्मिक शांति यहां आने वाले हर श्रद्धालु को एक नई सकारात्मक ऊर्जा से भर देती है.
यह भी पढ़ें: Sleeping Vastu Tips: इस दिशा में सिर करके सोना है सबसे खतरनाक, सेहत और किस्मत दोनों पर पड़ता है बुरा असर
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र की मान्यताओं पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.
संबंधित खबरें
शारदीय नवरात्रि में रोजाना करें मां दुर्गा की आरती, यहां पढ़ें लिरिक्स
15 mins agoशारदीय नवरात्रि प्रतिपदा तिथि आज, जानिए कलश स्थापना मुहूर्त और पूजा विधि
1 hr agoकौन हैं अजिंक्य शिंदे? जिन्हें अभिजीत दीपके ने सौंपी CJP आंदोलन की कमान
17 hrs agoशारदीय नवरात्रि पर किस समय करें कलश स्थापना? जानिए मुहूर्त और विधि
18 hrs agoकल से शारदीय नवरात्रि का शुभारंभ, जानिए सभी तिथियां और घटस्थापना मुहूर्त
20 hrs agoआज अमावस्या पर करें पितृ स्त्रोत का पाठ, तीन पीढ़ियों के पूर्वज होंगे तृप्त
21 hrs agoशारदीय नवरात्रि में अखंड ज्योति कैसे जलाएं? इन नियमों का रखें ध्यान
22 hrs agoआज है पितृ पक्ष का खास दिन, जानिए अमावस्या का महत्व और श्राद्ध मुहूर्त
1 day agoकैसे करें अपने-पराए की पहचान? चाणक्य नीति से जानिए लोगों की परख करना
1 day agoपितृपक्ष में करें पक्षियों वाला उपाय, पैसों की तंगी होगी दूर
1 day agoन्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।
First published on:
Know More: Editorial Guidelines