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Somvati Amavasya 2024: साल की आखिरी अमावस्या पर करें ये 6 काम, पितृ ऋण के भार से मिलेगी मुक्ति!

Somvati Amavasya Upay: भगवान शिव को समर्पित सोमवती अमावस्या का दिन बेहद खास है, जिस तिथि पर कुछ विशेष उपाय करने से साधक को कुंडली के हर दोष से मुक्ति मिल सकती है। खासतौर पर पितृ ऋण के भार से छुटकारा मिल जाता है।

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कुंडली के हर दोष से मिलेगा छुटकारा!

Somvati Amavasya 2024 Upay: हिंदू कैलेंडर के अनुसार, इस समय साल का दसवां महीना यानी पौष माह चल रहा है। सनातन धर्म के लोगों के लिए पौष माह में आने वाली प्रत्येक तिथि और व्रत का खास महत्व है। वैदिक पंचांग के अनुसार, पौष मास की कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि के दिन पौष अमावस्या मनाई जाती है। साल 2024 में पौष अमावस्या सोमवार के दिन पड़ रही है। इसलिए इसे सोमवती अमावस्या भी कह सकते हैं, जो साल की आखिरी अमावस्या है।

इस दिन भगवान शिव, विष्णु जी और मां लक्ष्मी की पूजा का विधान है। साथ ही किसी पवित्र नदी में स्नान और जरूरतमंद लोगों को दान करना शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, सोमवती अमावस्या के दिन यदि कोई व्यक्ति सच्चे मन से कुछ अचूक उपाय करता है, तो उसे पितृ ऋण, ग्रह दोष और कुंडली में मौजूद अन्य दोषों के भार से मुक्ति मिल जाती है। चलिए जानते हैं कुंडली के हर दोष से छुटकारा पाने के अचूक उपायों के बारे में।

2024 में सोमवती अमावस्या कब है?

वैदिक पंचांग के अनुसार, इस साल पौष माह में आने वाली कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि का आरंभ 30 दिसंबर 2024 को प्रात: काल 04 बजकर 01 मिनट से हो रहा है, जिसका समापन 31 दिसंबर 2024 को सुबह 03 बजकर 56 मिनट पर होगा। उदयातिथि के आधार पर साल 2024 की आखिरी अमावस्या यानी सोमवती अमावस्या 30 दिसंबर को मनाई जाएगी।

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पितृ ऋण से मुक्ति पाने के उपाय

यदि आप पितृ ऋण, ग्रह दोष और कुंडली के अन्य किसी दोष से छुटकारा पाना चाहते हैं, तो सोमवती अमावस्या के दिन सुबह-सुबह सबसे पहले गाय को खाना खिलाएं। गाय के बाद कुत्ते, पक्षियों, बैल, चींटियों और अंत में मछलियों को भोजन कराएं। सोमवती अमावस्या के दिन सुबह 8 बजकर 30 मिनट से लेकर सुबह 9 बजकर 48 मिनट तक राहुकाल है। राहुकाल से पहले या बाद में यदि आप ये 6 काम करते हैं, तो जल्द आपको पितृ ऋण के भार से मुक्ति मिल सकती है।

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पितृ ऋण क्या होता है?

धार्मिक मान्यता के अनुसार, पितृ ऋण, पूर्वजों और माता-पिता का ऋण होता है। इस ऋण का सामना व्यक्ति को तब करना पड़ता है, जब वो बड़ों का अनादर करता है या उनकी देखभाल नहीं करता है। पितृ ऋण के कारण घर-परिवार में सदा अशांति बनी रहती है। वंश वृद्धि में रुकावटें आती हैं और गंभीर बीमारियों के होना का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा घरवालों को सदा पैसों की कमी सामना करना पड़ता है।

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है।

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