Snana Purnima 2026: आज स्नान पूर्णिमा के दिन भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा का 108 पवित्र कलशों के जल से अभिषेक किया जाएगा. आज सुबह देव स्नान पूर्णिमा के अवसर पर भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा को रत्न सिंहासन से स्नान मंडप में ले जाया गया. उनके स्नान से जुड़ी रस्में की जा रही है. भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा को स्नान कराने के बाद हाथी वेश में सजाया जाएगा.
स्नान पूर्णिमा पर अभिषेक के बाद भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा 15 दिनों के लिए बीमार हो जाते हैं. इस दौरान मंदिर के गर्भगृह के कपाट बंद कर दिए जाते हैं. इस दौरान 15 दिनों के लिए एकांत में रहते हैं. भगवान जगन्नाथ, बालभद्र और देवी सुभद्रा को विशेष औषधि वाला भोग लगाया जाता है. इस समय को भगवान के आराम का समय मानते हैं. इसके बाद ओडिशा के पूरी में रथ यात्रा का आयोजन किया जाता है.
स्नान पूर्णिमा के दिन हाथी वेश
देव स्नान पूर्णिमा के पर्व पर 108 कलशों से स्नान कराने के बाद भगवान जगन्नाथ को हाथी के वेश में सजाया जाता है. भगवान का विशेष श्रृंगार किया जाता है. इस दौरान भगवान जगन्नाथ और भगवान बलभद्र को हाथी के वेश में सजाया जाता है और देवी सुभद्रा को सुंदर कमल स्वरूप में सजाते हैं. भगवान के इस श्रृंगार को गज वेश या गजानन वेश के नाम से जानते हैं.
गज वेश के पीछे का इतिहास
भगवान जगन्नाथ के गज वेश धारण करने के पीछे एक भावुक कथा है. इसके पीछे भावुक कथा है. पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार गणेश जी के महान भक्त गणपति भट्ट जगन्नाथ के दर्शन के लिए गए थे. वह जब पूरी पहुंचे, तो जगन्नाथ भगवान के दर्शन नहीं करना चाहते थे क्योंकि वह सिर्फ गणेश जी की पूजा करते थे. उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान जगन्नाथ ने गणपति भट्ट को गणेश जी के हाथी रूप में दर्शन दिए थे. इसके बाद से भगवान जगन्नाथ को गज वेश में सजाने की परंपार शुरू हुई.
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