मां कात्यायनी देवी की आरती | Maa Katyayani Devi Ki Aarti Lyrics in Hindi- 6th Navratri पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, प्रिय भोग, मंत्र व शुभ रंग

Shardiya Navratri 2025: 28 सितंबर 2025 को शारदीय नवरात्रि का छठा दिन है. यह दिन मां कात्यायनी की पूजा के लिए विशेष होता है. चलिए आपको नवरात्रि के छठे दिन के शुभ मुहूर्त, आरती, भोग और पूजा विधि के बारे में बताते हैंं.

Maa Katyayani

Credit- News24 Graphics

Shardiya Navratri 2025 6th Day Maa Katyayani Puja: शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 22 सितंबर को हो गई थी जिसका समापन दशहरे के दिन 2 अक्टूबर को होगा. शारदीय नवरात्रि का छठा दिन 28 सितंबर को है. यह दिन मां कात्ययानी की पूजा के लिए समर्पित होता है. आप इस दिन मां कात्यायनी को प्रसन्न करने के लिए विधि-विधान के साथ पूजा करें. आइये आपको नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा के शुभ मुहूर्त और विधि के बारे में बताते हैं.

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कौन हैं देवी कात्यायनी और कैसा है स्वरूप?

मां कात्यायनी को देवी दुर्गा का छठा रूप माना जाता है. स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को दूर करने और शादी की बाधाओं को दूर करने के लिए मां कात्यायनी की पूजा करना शुभ होता है. इनका रूप चार भुजाओं वाला है. इनका रंग सोने के समान चमकीला होता है. मां के ऊपरी बाएं हाथ में तलवार, नीचे वाले बाएं हाथ में कमल का फूल, ऊपरी दायां हाथ अभय मुद्रा और नीचे वाला हाथ वरमुद्रा में है.

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देवी कात्यायनी पूजा शुभ मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त – सुबह 04:36 से 05:24 तक
प्रातः सन्ध्या – सुबह 05:00 से 06:12 तक
अभिजित मुहूर्त – सुबह 11:48 से 12:35 तक
विजय मुहूर्त – दोपहर 02:11 से 02:59 तक
गोधूलि मुहूर्त – शाम 06:10 से 06:35 तक
सायाह्न सन्ध्या – शाम 06:10 से 07:23 तक
अमृत काल – शाम 06:05 से 07:53 तक

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देवी कात्यायनी की प्रिय चीजें

मां कात्यायनी को पीला रंग प्रिय होता है. मां को पीली चीजों का भोग लगाना चाहिए. आप पीले फल और पीली मिठाई का भोग लगाएं. आप पूजा में पीले वस्त्र पहन सकते हैं.

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देवी कात्यायनी मंत्र

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ॐ देवी कात्यायन्यै नमः॥

देवी कात्यायनी प्रार्थना

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चन्द्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना।
कात्यायनी शुभं दद्याद् देवी दानवघातिनी।।

देवी कात्यायनी स्तुति

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या देवी सर्वभूतेषु मां कात्यायनी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

देवी कात्यायनी की आरती (Maa Katyayani Ki Aarti)

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जय जय अम्बे जय कात्यायनी।
जय जग माता जग की महारानी॥

बैजनाथ स्थान तुम्हारा।
वहावर दाती नाम पुकारा॥

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कई नाम है कई धाम है।
यह स्थान भी तो सुखधाम है॥

हर मंदिर में ज्योत तुम्हारी।
कही योगेश्वरी महिमा न्यारी॥

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हर जगह उत्सव होते रहते।
हर मंदिर में भगत है कहते॥

कत्यानी रक्षक काया की।
ग्रंथि काटे मोह माया की॥

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झूठे मोह से छुड़ाने वाली।
अपना नाम जपाने वाली॥

बृहस्पतिवार को पूजा करिए।
ध्यान कात्यानी का धरिये॥

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हर संकट को दूर करेगी।
भंडारे भरपूर करेगी॥

जो भी मां को भक्त पुकारे।
कात्यायनी सब कष्ट निवारे॥

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देवी कात्यायनी की पूजा विधि (Maa Katyayani Puja Vidhi)

  • मां कात्यायनी की पूजा के लिए सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि कर लें.
  • पीले रंग के स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें.
  • पूजा स्थल की सफाई करें और चौकी पर साफ कपड़ा बिछाकर मां कात्यायनी की तस्वीर स्थापित करें.
  • पूजा के दौरान मां कात्यायनी को फूल, धूप, दीप अर्पित करें और मंत्र का जाप करें. अंत में आरती करें और भोग लगाएं.

डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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