Shani Jayanti 2025 LIVE: न्याय के देवता शनि की जन्म कथा
शास्त्रों में शनिदेव के जन्म को लेकर विभिन्न मत हैं। कुछ ग्रंथों के अनुसार, शनिदेव का जन्म ज्येष्ठ माह की अमावस्या को हुआ था, जबकि अन्य मत भाद्रपद अमावस्या के दिन उनके जन्म का उत्सव मानते हैं।
शनिदेव भगवान सूर्य और उनकी पत्नी छाया के पुत्र हैं। जब शनि का जन्म हुआ तो उनका रंग अत्यंत गहरा था। इसे देखकर सूर्यदेव ने माता छाया पर संदेह किया और शनि को अपना पुत्र मानने से इनकार कर दिया। इस तिरस्कार से आहत होकर शनिदेव ने सूर्य को शत्रु मान लिया।
मां छाया चाहती थीं कि उनका पुत्र सूर्य से भी अधिक शक्तिशाली और पूज्य बने। अपनी मां की इच्छा पूरी करने के लिए शनिदेव ने वर्षों तक घोर तपस्या की और भगवान शिव को प्रसन्न किया।
शिव जी ने शनि की तपस्या से प्रसन्न होकर वरदान दिया कि वे नवग्रहों में सर्वोच्च स्थान प्राप्त करेंगे और पृथ्वी लोक के न्यायाधीश होंगे। देवता, असुर, मानव सभी उनके नाम से भयभीत रहेंगे, लेकिन वे अपने कर्म के अनुसार ही न्याय करेंगे।
शनि देव को अक्सर क्रूर ग्रह माना जाता है लेकिन वे न्यायप्रिय और दयालु भी हैं। यदि किसी व्यक्ति के कर्म शुभ हों तो शनि की कृपा से उसे यश, वैभव और धन मिलता है। वहीं, गलत कर्म करने वालों को वे दंडित करने में भी देर नहीं लगाते।