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Sawan 2024: ऐसे हुई बेलपत्र की उत्पत्ति, इसलिए भगवान शिव को है प्रिय, जानें कथा और महत्व

Sawan 2024: हिन्दू परंपरा में प्राचीन काल से भगवान शिव को अर्पित की जाने वाली पूजा सामग्रियों में बेलपत्र का अहम स्थान है। आइए जानते हैं, बेलपत्र की उत्पति कैसे हुई, इसका महत्व क्या है और यह महादेव शिव इतना प्रिय क्यों है?

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Sawan 2024: सनातन धर्म में जिस प्रकार जगत के पालनकर्ता भगवान विष्णु को तुलसी के पत्ते प्रिय हैं, ठीक वैसे ही देवाधिदेव शंकर को बेल के पत्ते अति प्रिय हैं। इसलिए महादेव भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए उनकी पूजा में बेलपत्र जरूर चढ़ाया जाता है। कहते हैं, भक्त और कुछ भी न चढ़ाए और सच्चे मन से बेलपत्र की एक टहनी भी श्रद्धा और विश्वासपूर्वक अर्पित कर देते हैं, तब भी भगवान आशुतोष उनकी पूजा स्वीकार कर लेते हैं और मनचाहा वर दे देते हैं।

मान्यता है कि बाबा भोलेनाथ को बेल की पत्तियां, फल और फूल सहित इसकी लकड़ी और छाल भी प्रिय है। साल 2024 में भगवान शिव की पूजा और उपासना को समर्पित सावन का पवित्र महीना 22 जुलाई से शुरू हो रहा है। आइए इस पावन महीने के उपलक्ष्य में जानते हैं, बेलपत्र की उत्पत्ति की कथा और शिवजी के पूजा में इसका महत्व।

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ऐसे हुई बेलपत्र की उत्पत्ति

स्कंद पुराण में एक प्रसंग मिलता है कि एक एक बार देवी पार्वती को जब ललाट पर पसीना आया तो उन्होंने पसीने को अपनी अंगुलियों से पोंछकर फेंक दिया। उनकी पसीने की कुछ बूंदें मंदार पर्वत पर गिरीं। कहते हैं, उन बूंदों से बेल वृक्ष उत्पन्न हुआ। मान्यता है कि बेल वृक्ष के पत्तों में स्वयं देवी पार्वती और वृक्ष के अलग अलग हिस्सों में माता पार्वती के विभिन्न रूपों का वास होता है।

बेलपत्र से क्यों प्रसन्न हो जाते हैं भोलेनाथ?

बेल के पत्तों में मां पार्वती का वास होने के कारण बेलपत्र को भगवान शिव पर चढ़ाया जाता है। इससे भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और भक्त की मनोकामना पूर्ण करते हैं। मान्यता है कि जो भक्ति किसी तीर्थस्थान पर जा पाने में असमर्थ हैं, वे यदि सावन के महीने में बेल के पेड़ की पूजा कर उनमें जल अर्पित करते हैं, तो उसे मंदिर या शिवालय में शिवलिंग के दर्शन का पुण्य प्राप्त होता है।

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बेलपत्र से कालकूट विष का उपचार

यह भी कहा जाता है कि सागर मंथन के बाद निकले कालकूट विष का पान करने के बाद जब भगवान शिव के शरीर में अत्यधिक जलन और पीड़ा हो रही थी, तब देवताओं ने इसके उपचार के तौर पर शिवजी को बेलपत्र खिलाना शुरू किया। कहते हैं, बेलपत्र की शीतलता और विषरोधक प्रभाव से भगवान शिव को बहुत आराम मिला। तभी से उन्हें बेलपत्र अर्पित करने की परंपरा चली आ रही है। बता दें, कि बेलपत्र की तीन पत्तियों को शिवजी के त्रिशूल और उनके त्रिनेत्र का भी प्रतीक माना जाता है।

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है।News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी उपाय को करने से पहले संबंधित विषय के एक्सपर्ट से सलाह अवश्य लें।

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First published on: Jun 28, 2024 07:49 AM

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About the Author

Shyamnandan

साल 2006 में 'सिविल सर्विसेज क्रॉनिकल' मैगजीन से बतौर सब-एडीटर जर्नलिज्म की दुनिया में एंट्री करने वाले श्यामनंदन को लगभग 20 वर्षों का कार्यानुभव है। बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी (BHU) के स्टूडेंट रहे ये हमेशा से एक्सपेरिमेंटल रहे हैं। डिजिटल दुनिया में इनकी पैठ साल 2009 में मोबाइल वैस (Mobile VAS) कंटेंट से हुई। हिंदुस्तान टाइम्स (HT Media), इंडिकस एनालिटिक्स की लाइव मोबाइल (LiveMobile), इंस्टामेज जैसी कंपनियों में मोबाइल प्लेटफॉर्म के लिए काम करते-समझते और जल्द ही कई पायदान लांघते हुए प्रोडक्ट मैनेजर बने। मोबाइल प्लेटफॉर्म की समझ ने इनके एनडीटीवी (NDTV) में जाने का रास्ता आसान बनाया। इनके खाते में एनडीटीवी (NDTV) की 'आस्था' और 'जॉब अलर्ट्स' पेज लॉन्च करने का श्रेय दर्ज है। यहीं से इनकी वास्तविक ऑनलाइन जर्नलिज्म शुरू हुई। इंटरनेशनल रिलेशंस, जियो-पॉलिटिक्स, एनवायरनमेंट, साइंस टेक, एजुकेशन, हेल्थ, लाइफस्टाइल, फैशन और व्यंजन-रेसपी पर काफी लिखने के बाद ये 'धर्म और ज्योतिष' कंटेंट में रम गए। इस विषय को और गहराई से समझने और प्रस्तुत करने लिए इन्होंने भारतीय विद्या भवन (BVB), नई दिल्ली से एस्ट्रोलॉजी का कोर्स कंप्लीट किया। वर्तमान में News24 में धर्म और ज्योतिष सेक्शन के लिए अपनी सेवाएं दे रहे श्यामनंदन, बंसल न्यूज (भोपाल) के 'वेबसाईट हेड' भी रह चुके हैं। इनकी एक बड़ी खासियत है, रणनीति और योजना के साथ आगे बढ़ना। इनको YouTube और Facebook के लिए कंटेंट क्रिएशन और कंटेंट प्रमोशन के साथ-साथ SEO, SMO और SMM की अच्छी समझ है। जहां तक हॉबी की बात है, इनको पटकथा (Screenplay) और गजल लिखने, फिल्म देखने, खाना बनाने और पेंटिंग में विशेष रूचि है। संपर्क करें: 📧 Email: shyam.nandan@bagconvergence.in 🔗 LinkedIn: https://www.linkedin.com/in/shyamnandan-kumar/ 🐦 Twitter/X: @Shyamnandan_K

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