Puja Tilak Benefits: पूजा में केसर, चंदन, गोरोचन समेत कितने प्रकार के तिलक लगाए जाते हैं, कौन-सा है सबसे शुभ; जानें

Puja Tilak Benefits: सनातन हिन्दू परंपरा में तिलक पूजा-पाठ और मांगलिक कार्यों का अहम हिस्सा है. केसर, चंदन, गोरोचन, कुमकुम समेत अलग-अलग तिलकों का अपना महत्व माना जाता है. आइए जानते हैं, कौन-सा तिलक कब और क्यों लगाया जाता है.

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हिन्दू धर्म की पूजा में कई तरह के तिलक लगाए जाते हैं. (फोटो क्रेडिट: AI | News24)

Puja Tilak Benefits: सनातन परंपरा में माथे पर लगा तिलक हजारों साल से पूजा-पाठ का अहम हिस्सा है. हिन्दू धर्म में इसे सिर्फ एक धार्मिक निशान नहीं माना गया है. मान्यता है कि तिलक मन को एकाग्र करने और पूजा के प्रति सकारात्मक भाव बनाए रखने में मदद करता है. अलग-अलग देवी-देवताओं और परंपराओं में अलग सामग्री का तिलक लगाया जाता है. आइए जानते हैं, हिन्दू धर्म के पूजा पाठ और मांगलिक कार्य में कौन-सा तिलक क्यों लगाया जाता है और किस काम आता है?

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केसर का तिलक

केसर का तिलक शुभता, ज्ञान और समृद्धि से जोड़ा जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसे लगाने से आत्मविश्वास और मान-सम्मान बढ़ता है.

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चंदन का तिलक

चंदन का तिलक भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण की पूजा में खास महत्व रखता है. इसकी ठंडी प्रकृति मन को शांत रखने और पूजा के दौरान एकाग्रता बनाए रखने में मदद कर सकती है.

रोली-कुमकुम का तिलक

रोली या कुमकुम का तिलक देवी पूजा और शुभ अवसरों पर खूब लगाया जाता है. इसे शक्ति, मंगल और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है.

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अष्टगंध का तिलक

अष्टगंध कई सुगंधित और पवित्र द्रव्यों के मिश्रण से तैयार किया जाता है. धार्मिक परंपरा में इसे ज्ञान, बुद्धि और सकारात्मकता से जोड़कर देखा जाता है.

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गोरोचन तिलक

गोरोचन परंपरागत रूप से पूजा-पाठ में इस्तेमाल होने वाला पीला तिलक है, गोवंश यानी गाय-बैल से प्राप्त होता है. इसे शुभता, बुद्धि और आध्यात्मिक ऊर्जा से जोड़ा जाता है. खास धार्मिक परंपराओं में इसे देवी-देवताओं को अर्पित करने और फिर माथे पर लगाने की मान्यता मिलती है.

भस्म का तिलक

भस्म या विभूति भगवान शिव की उपासना में खास है. शिव भक्त इसे अक्सर त्रिपुंड के रूप में लगाते हैं. यह वैराग्य और जीवन की नश्वरता का प्रतीक माना जाता है.

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गोपी चंदन का तिलक

गोपी चंदन वैष्णव परंपरा में विशेष महत्व रखता है. इसे आमतौर पर माथे पर खड़ी रेखाओं के रूप में लगाया जाता है और भगवान विष्णु के प्रति भक्ति का प्रतीक माना जाता है.

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सिंदूर का तिलक

सिंदूर का इस्तेमाल खासतौर पर हनुमान जी और गणेश जी की पूजा में देखने को मिलता है. इसे शक्ति, साहस और विजय की भावना से जोड़ा जाता है.

हल्दी का तिलक

हल्दी को शुभ और मंगलकारी माना जाता है. पूजा, विवाह और दूसरे मांगलिक कामों में इसका तिलक लगाया जाता है. यह समृद्धि और शुभ शुरुआत का प्रतीक माना जाता है.

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तिलक लगाने की सही विधि और नियम

  • तिलक का पूरा लाभ तभी मिलता है जब इसे सही उंगली से और सही विधि से लगाया जाए:
  • अनामिका उंगली से तिलक लगाने से मानसिक शांति, धन और आरोग्य मिलता है.
  • तर्जनी उंगली से केसर का तिलक लगाने से गुरु ग्रह मजबूत होता है और ज्ञान की प्राप्ति होती है.
  • अंगूठे का उपयोग अतिथि या दूसरे व्यक्ति को तिलक लगाने के लिए किया जाता है, जिसे ‘विजय तिलक’ कहते हैं.
  • बिना स्नान किए तिलक लगाना सही नहीं होता है और पहले अपने इष्ट देव को तिलक अर्पित करना चाहिए, फिर स्वयं को.
  • रात को सोने से पहले तिलक को धोकर हटा देना चाहिए.

तिलक लगाने के लाभ

आपको बता दें कि तिलक सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि वैज्ञानिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है. यह सिद्ध हो चुका है कि माथे पर तिलक लगाने से आज्ञा चक्र पर दबाव पड़ता है, जिससे एकाग्रता और मानसिक शक्ति बढ़ती है. केसर, चंदन और अन्य पवित्र सामग्रियों में एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं, जो त्वचा को स्वस्थ रखते हैं. यही कारण है कि हमारे ऋषि-मुनियों ने इस परंपरा को शुरू किया और आज भी यह उतनी ही प्रासंगिक है.

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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लेखक के बारे में

Shyamnandan

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श्यामनंदन कुमार News24.com में चीफ सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में 20 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले श्यामनंदन ज्योतिष, अंक शास्त्र, सामुद्रिक शास्त्र, पर्व-त्योहार सहित भारतीय धर्म-संस्कृति के जानकार पत्रकार हैं. उन्होंने पत्रकारिता में एम.ए. की पढ़ाई काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) से की है और ज्योतिष का अध्ययन भारतीय विद्या भवन, नई दिल्ली से किया है. अपने पेशे में डिजिटल करियर की शुरुआत उन्होंने एनडीटीवी कन्वर्जेंन्स के साथ की. श्यामनंदन हिंदुस्तान टाइम्स, बंसल न्यूज (भोपाल) जैसे न्यूज प्लेटफॉर्म्स के साथ भी जुड़े रहे हैं. उन्होंने देश के प्रसिद्ध संतों के सत्संग और समागम की रिपोर्टिंग की है.
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