Pradosh Vrat 2026: आज मंगलवार के दिन अप्रैल महीने का आखिरी प्रदोष व्रत है. यह भौम प्रदोष व्रत है. प्रदोष व्रत हर महीने में कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है. प्रदोष व्रत के लिए प्रदोष काल यानी सूर्यास्त के समय पूजा का महत्व होता है. इस दिन शिव जी की पूजा-अर्चना करने और व्रत करने से भक्तों को महादेव का आशीर्वाद मिलता है. प्रदोष व्रत करने से जीवन में चल रही समस्याओं का अंत होता है. आज के प्रदोष काल मुहूर्त और पूजा विधि के बारे में जानते हैं.
भौम प्रदोष व्रत पर प्रदोष काल मुहूर्त
आज भौम प्रदोष व्रत पर भगवान शिव की पूजा प्रदोष काल में करना सबसे शुभ और फलदायी माना जाता है. 28 अप्रैल को प्रदोष काल का मुहूर्त शाम को 6 बजकर 54 मिनट से लेकर रात को 9 बजकर 4 मिनट तक रहने वाला है. आप इस प्रदोष काल के समय महादेव को प्रसन्न करने के लिए पूजा और उपाय कर सकते हैं. प्रदोष व्रत के दिन प्रदोष काल में की गई पूजा को अत्यंत फलदायी माना जाता है. इससे महादेव की विशेष कृपा मिलती है.
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प्रदोष व्रत पूजा विधि
प्रदोष व्रत करने वाले लोग सुबह स्नान कर मंदिर में जाकर शिवलिंग पर जल और दूध अर्पित करें. भगवान शिव की अराधना करें और व्रत का संकल्प लें. आप शिवलिंग पर भाग, धतूरा, बेलपत्र, फल और फूल आदि अर्पित करें. पूजा दिन शांत रहें और भगवान शिव का ध्यान करें. सात्विक भोजन का सेवन करें. शाम को प्रदोष काल के समय पूजा स्थान की सफाई कर शिव जी और माता पार्वती की प्रतिमा स्थापित करें. इसके बाद भगवान का पंचामृत से अभिषेक करें. प्रतिमा के समक्ष धूप और दीपक जलाएं. व्रत कथा का पाठ करें और भगवान शिव की आरती कर पूजा संपन्न करें.
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भौम प्रदोष व्रत उपाय
- भौम प्रदोष व्रत के दिन कई खास उपायों को कर सकते हैं. कर्ज मुक्ति के लिए 'हनुमान चालीसा' या 'ऋणमोचन मंगल स्तोत्र' का पाठ करें.
- इस दिन मंगल दोष के लिए खास उपाय कर सकते हैं. मंगल दोष से मुक्ति के लिए शिवलिंग पर मसूर की दाल, लाल चंदन और बेलपत्र आदि अर्पित करें.
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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.