Navratri Vrat Ke Niyam: 19 मार्च, 2026 से चैत्र नवरात्रि की शुरूआत हो रही है. यह पर्व आस्था, अनुशासन और साधना का विशेष समय माना जाता है. इन 9 दिनों में मां दुर्गा की पूजा के साथ व्रत रखने की परंपरा भी प्रचलित है. माना जाता है कि सही विधि और नियमों के साथ रखा गया व्रत मन को शुद्ध करता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा लाता है. इसलिए नवरात्रि में क्या खाना चाहिए, क्या नहीं करना चाहिए और किन बातों का विशेष ध्यान रखना जरूरी है, इन नियमों को जानना हर भक्त के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है. आइए जानते हैं, नवरात्रि व्रत का हर जरूरी नियम.

नवरात्रि व्रत के नियम

व्रत की शुरुआत और संकल्प

  • ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें.
  • साफ और शुद्ध कपड़े पहनकर पूजा की तैयारी करें.
  • माता दुर्गा के सामने जल और अक्षत लेकर व्रत का संकल्प लें.
  • संकल्प में नौ दिन या अपनी क्षमता के अनुसार व्रत रखने का निश्चय करें.
  • नवरात्रि के पहले दिन शुभ मुहूर्त में घट स्थापना (कलश स्थापना) करें.
  • पूजा स्थान पर अखंड ज्योति जलाना शुभ माना जाता है.

भोजन से जुड़े नियम

  • नवरात्रि में सात्विक भोजन ही ग्रहण करें.
  • गेहूं, चावल और अन्य अनाज का सेवन न करें.
  • सभी प्रकार की दालों का सेवन वर्जित माना जाता है.प्याज और लहसुन का उपयोग बिल्कुल न करें.
  • मांसाहार और शराब का सेवन पूरी तरह वर्जित है.साधारण नमक की जगह केवल सेंधा नमक का उपयोग करें.
  • कुट्टू का आटा, सिंघाड़े का आटा और समा के चावल खा सकते हैं.
  • साबूदाना, मूंगफली और मेवे फलाहार में शामिल कर सकते हैं.
    दूध, दही और पनीर जैसे डेयरी उत्पाद खा सकते हैं.
  • फलाहार दिन में एक या दो बार ही करें.
  • बार-बार भोजन करने से बचें.

मसालों और रसोई से जुड़े नियम

  • व्रत के भोजन में हल्के मसालों का ही प्रयोग करें.
  • जीरा, काली मिर्च और हरी मिर्च का सीमित उपयोग किया जा सकता है.
  • हल्दी का प्रयोग सामान्यतः नहीं किया जाता.
  • हींग, राई और मेथी दाना से परहेज करें.
  • गरम मसालों का उपयोग न करें.
  • बाहर का पैक किया हुआ फलाहार खाने से बचें.
  • घर पर बना शुद्ध भोजन ही ग्रहण करें.
  • चीनी की जगह गुड़ या शहद का उपयोग करना अधिक सात्विक माना जाता है.
  • व्रत के भोजन के लिए साफ और शुद्ध बर्तनों का उपयोग करें.
  • प्राचीन परंपरा में मिट्टी, तांबे या पीतल के बर्तनों को श्रेष्ठ माना गया है.

यह भी पढ़ें: Chaitra Navratri 2026: घटस्थापना की पूजा सामग्री में कहीं कुछ छूट तो नहीं गया? चेक कर लें लिस्ट

---विज्ञापन---

पहनावा और शारीरिक नियम

  • पूजा के समय काले रंग के कपड़े पहनने से बचें.
  • लाल या पीले रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है.
  • कई साधक सिले कपड़ों की जगह धोती या साड़ी पहनते हैं.
  • नौ दिनों तक बाल कटवाना वर्जित माना जाता है.
  • दाढ़ी बनवाने से भी परहेज किया जाता है.
  • नाखून काटना भी इन दिनों नहीं किया जाता.
  • पूजा के समय चमड़े की वस्तुओं का उपयोग न करें.
  • बेल्ट, पर्स या जूते जैसे चमड़े के सामान से बचें.
  • खुशबूदार तेल, इत्र और ज्यादा कॉस्मेटिक के प्रयोग से बचना चाहिए.

आचरण और व्यवहार के नियम

  • नवरात्रि में ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए.
  • मन और विचारों को शुद्ध रखना जरूरी माना जाता है.
  • क्रोध, झूठ और चुगली से दूर रहें.
  • किसी का अपमान या निंदा न करें.
  • दूसरों की बुराई सुनने से भी बचें.
  • दिन के समय सोना वर्जित माना जाता है.
  • संभव हो तो कुछ समय मौन व्रत रखें.
  • माता दुर्गा की आरती और मंत्रों का नियमित पाठ करें.

घर और पूजा से जुड़े नियम

  • घर और पूजा स्थान को हमेशा साफ रखें.
  • बिना स्नान किए रसोई या मंदिर में प्रवेश न करें.
  • यदि घर में अखंड ज्योति जलाई है तो घर को खाली न छोड़ें.
  • घर में किसी न किसी सदस्य का रहना जरूरी माना जाता है.
  • नवरात्रि में घर के अंदर नींबू काटना वर्जित माना जाता है.
  • देवी पूजा में सामान्यतः तुलसी के पत्ते नहीं चढ़ाए जाते.
  • माता दुर्गा को लाल फूल अर्पित करना शुभ माना जाता है.
  • खासकर गुड़हल का फूल माता को प्रिय माना जाता है.

यह भी पढ़ें: Chaitra Navratri 2026: वर्ष में 4 बार आती है नवरात्रि, कब से है चैत्र नवदुर्गा पर्व, क्या है सभी में अंतर? जानें

---विज्ञापन---

साधना और तप से जुड़े नियम

  • 9 दिनों तक व्रत रखने वाले साधक 9 दिनों तक जमीन पर चटाई या कंबल बिछाकर सोते हैं.
  • पलंग या गद्दे का त्याग तपस्या का हिस्सा माना जाता है.
  • कई साधक इन दिनों जूते-चप्पल का उपयोग भी सीमित कर देते हैं.

दान और सामाजिक नियम

  • नवरात्रि में दान का विशेष महत्व माना जाता है.
  • रोज भोजन का थोड़ा हिस्सा गरीब या जरूरतमंद को देना चाहिए.
  • गाय, कुत्ते या पक्षियों को भी भोजन देना पुण्यकारी माना जाता है.
  • चींटियों को आटा डालना भी शुभ माना जाता है.

साफ-सफाई से जुड़े पारंपरिक नियम

  • सूर्योदय के तुरंत बाद घर में झाड़ू लगाने से बचना चाहिए.
  • सूर्यास्त के समय भी झाड़ू-पोछा नहीं करना चाहिए.
  • इस समय को मां लक्ष्मी के आगमन का समय माना जाता है.

व्रत का समापन

  • नवरात्रि के अंतिम दिन अष्टमी या नवमी पर कन्या पूजन किया जाता है.
  • 2 से 10 वर्ष की कन्याओं को भोजन कराया जाता है.
  • कन्याओं को सम्मान देकर उनका आशीर्वाद लिया जाता है.
  • सामर्थ्य के अनुसार उन्हें दक्षिणा और उपहार दिए जाते हैं.
  • इसके बाद व्रत की पूर्णता मानी जाती है.

यह भी पढ़ें: Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्र पर बनेगा दुर्लभ ‘स्टेलियम’, इन 5 राशियों पर होगी देवी की विशेष कृपा

डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.