Narsimha Dwadashi 2026: नृसिंह द्वादशी का पर्व फाल्गुन माह की शुक्ल पक्ष द्वादशी को नृसिंह भगवान के दिव्य अवतार की स्मृति में मनाया जाता है. यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत और धर्म की रक्षा का संदेश देता है. नृसिंह भगवान ने अपने भक्त की रक्षा के लिए यह अवतार लिया था. नृसिंह भगवान ने अपने परम भक्त प्रहलाद की रक्षा करने के लिए असुर राजा हिरण्यकश्यप का संहार किया था. आज 28 मार्च को नृसिंह द्वादशी के दिन आप भगवान नृसिंह की पूजा अर्चना करने के साथ ही खास स्रोत का पाठ करें. ऐसा करने से आपको उनका आशीर्वाद मिलेगा.

श्री नृसिंह स्तोत्र (Shri Narsingh Stotra)

श्री नृसिंह, जय नृसिंह, जय जय नृसिंह।
प्रह्लादेश जय पद्मा मुख पद्म नृसिंह॥

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वेद्यं तपः कृतधियां च शरण्यमेकं।
त्वां नारसिंह परिपालय मां नृसिंह॥

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वेद्यं तपः कृतधियां च शरण्यमेकं।
त्वां नारसिंह परिपालय मां नृसिंह॥

संसारचक्रमय भङ्गकरं कृपालो।
त्वां नारसिंह शरणं प्रपद्ये॥

सिंहो नृसिंहो यदिवा महासिंह।
भक्तानुरक्तः परिपालय मां नृसिंह॥

हिरण्यकशिपोर्येन हतोऽसि विप्रैः।
त्वं नारसिंह मम दिष्टमवाप्य नृसिंह॥

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नृसिंह भगवान पूजा विधि (Narsingh Bhagwan Puja Vidhi)

नृसिंह द्वादशी के दिन स्नान कर पीले रंग के वस्त्र पहनें. घर के मंदिर की सफाई करें और नृसिंह भगवान की प्रतिमा स्थापित करें. पंचामृत से अभिषेक करें. भगवान के समक्ष दीपक जलाएं. भगवान को पीले फूल, अक्षत, फल और मिठाई अर्पित करें. इसके बाद नृसिंह स्तोत्र का पाठ करें. आरती करें और आरती कर प्रसाद ग्रहण करें.

डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.