Inspiring Story: धर्म शास्त्रों में दान करने से सबसे अच्छा पुण्य कर्म बताया गया है. दान करने से व्यक्ति को पुण्य फलों की प्राप्ति होती है. दान को त्याग, करुणा और मानवता का प्रतीक माना जाता है. ऐसा माना जाता है कि, दान करना पुण्य प्राप्ति का श्रेष्ठ मार्ग है. दान करने से न सिर्फ पुण्य फलों की प्राप्ति होती है बल्कि, इससे अनजाने में किये गए पापों का नाश होता है. अगर कोई व्यक्ति सच्ची श्रद्धा और भाव से दान करता है तो इससे जीवन में सुख-समृद्धि आती है. चलिए ऐसे ही दो रुपये के दान की एक प्रेरक कहानी के बारे में जानते हैं.
भावनाएं तय करती हैं दान की कीमत
अक्सर लोग मानते हैं कि, जितना अधिक दान किया जाए उतना अच्छा होता है. लेकिन अमीर व्यक्ति के बड़े दान के सामने गरीब व्यक्ति का छोटा दान अधिक मूल्य रखता है. दान की कीमत से अधिक दान देने वाले की भावनाएं देखी जाती हैं. दान के महत्व को समझने के लिए एक बूढ़ी गरीब महिला की कहानी पढ़ें.
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दो रुपये का दान भी है अनमोल
एक समय की बात है किसी आश्रम में भंडारे का आयोजन किया गया था. लोग दूर-दूर से भंडारे में भोजन करने आ रहे थे और भंडारे में अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार दान कर रहे थे. उस समय एक बूढ़ी गरीब महिला में भंडारे में दान देना चाहा. वह जब दान देने के लिए गई तो उस आश्रम में मौजूद कुछ शिष्यों ने उस गरीब बूढ़ी महिला को धक्के मारकर बाहर निकाल दिया.
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यह सब संत देख रहे थे. इसके बाद उन्होंने उस बूढ़ी महिला को अपने पास बुलाया. बूढ़ी गरीब महिला संत के पास गई और अपने पास से दो रुपये निकालकर संत के हाथ में रख दिये. उस महिला ने कहा कि, मैं भंडारे में दान देना चाहती थी लेकिन यह लोग मुझे भगा रहे थे. इसके बाद संत ने उस दान को स्वीकार किया. संत ने दो रुपये का नमक खरीदा और उसे भंडारे के खाने में मिला दिया.
शिष्यों को दिया ज्ञान
आश्रम में हुई इस घटना के बाद संत ने अपने शिष्यों को समझाया कि, दान देने वाले का धन नहीं, बल्कि उसकी भावनाएं देखी जाती हैं. जो लोग अपनी मेहनत और ईमानदारी से कमाए गए पैसों को दान में जेते हैं तो उसका मूल्य बहुत अधिक होता है. जब उस महिला ने अपनी मेहनत की कमाई के दो रुपये भंडारे में दान दिये तो यह खाना भगवान का प्रसाद बन जाएगा. इसलिए हमेशा दान की कीमत पैसों से नहीं दान देने वाले की भावनाओं से होती है.
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