Ramkrishna Paramhans Jayanti: स्वामी रामकृष्ण परमहंस ने बताया सफलता कैसे मिलती है? विवेकानंद भी मानते थे उनकी ये बात

Ramkrishna Paramhans Jayanti 2025: स्वामी विवेकानंद के गुरु स्वामी रामकृष्ण परमहंस जन्म फाल्गुन मास में शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को हुआ था, जो इस साल शनिवार, 1 मार्च को पड़ रही है। आइए जानते हैं, स्वामी रामकृष्ण परमहंस ने सफलता पाने का क्या मंत्र बताया है, जिसे स्वामी विवेकानंद भी मानते थे?

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Ramkrishna Paramhans Jayanti 2025: रामकृष्ण परमहंस जी स्वामी विवेकानंद के गुरु थे। परमहंस जी का जन्म फाल्गुन मास में शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को बंगाल के कामारपुर में हुआ था। साल 2025 में यह शुभ तिथि शनिवार, 1 मार्च को पड़ रही है। उनकी मृत्यु 16 अगस्त 1886 को कोलकाता में हुई थी। रामकृष्ण परमहंस जी के जीवन से जुड़े कई ऐसे प्रसंग हैं, जिनमें सुखी और सफल जीवन के सूत्र छिपे हैं।

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यहां दो ऐसे प्रसंग के बारे में बताया गया है, जो हमें इस बात की सीख देता है हम अपने लक्ष्य तक कैसे पहुंच सकते हैं और सफलता कैसे हासिल होती है? आपको बता दें कि स्वामी रामकृष्ण परमहंस की इन बातों को स्वामी विवेकानंद भी मानते थे और उस अमल करते थे।

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प्रेरक प्रसंग – 1

एक बार एक जिज्ञासु व्यक्ति रामकृष्ण परमहंस जी के पास आया और उनसे पूछा, ‘मुझे अपने जीवन का लक्ष्य प्राप्त करने के लिए क्या करना चाहिए?’

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परमहंस जी उसे पास के एक तालाब के किनारे ले गए और बोले, ‘पहले पानी में उतर जाओ।’ वह व्यक्ति जैसे ही पानी में उतरा, रामकृष्ण जी ने अचानक उसका सिर पकड़कर पानी में डुबो दिया। वह व्यक्ति छटपटाने लगा, सांस लेने के लिए संघर्ष करने लगा। कुछ क्षण बाद, जब वह पूरी तरह घबराने लगा, तब रामकृष्ण जी ने उसे पानी से बाहर निकाला।

जब वह व्यक्ति हांफते हुए सामान्य हुआ, तो परमहंस जी ने पूछा, ‘जब तुम पानी में थे, तब तुम्हें सबसे अधिक क्या चाहिए था?’

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व्यक्ति बोला, ‘सांस लेने के लिए हवा!’

तब रामकृष्ण जी मुस्कराकर बोले, ‘ठीक वैसे ही, जब तुम्हारी लक्ष्य प्राप्ति की तड़प उतनी ही प्रबल होगी जितनी सांस की आवश्यकता थी, तब तुम्हें कोई भी सफलता से नहीं रोक सकता।’

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इस घटना से यह सीख मिलती है कि यदि हमें अपने लक्ष्य को पाना है, तो उसे पाने की इच्छा इतनी तीव्र होनी चाहिए कि हम उसके बिना एक पल भी न रह सकें। जब हमारी समर्पण भावना इतनी प्रबल होगी, तब हम निश्चित रूप से अपने लक्ष्य तक पहुंच जाएंगे।

प्रेरक प्रसंग – 2

एक दिन रामकृष्ण परमहंस अपने शिष्य के साथ नदी किनारे टहल रहे थे। उन्होंने देखा कि कुछ मछुआरे जाल डालकर मछलियां पकड़ रहे हैं। परमहंस जी ने शिष्य से कहा, ‘इन मछलियों को ध्यान से देखो, यह हमें जीवन का एक महत्वपूर्ण सबक सिखाती हैं।’

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शिष्य ने गौर से देखा—कुछ मछलियां जाल में फंसी छटपटा रही थीं, कुछ बिल्कुल शांत थीं, और कुछ जाल से बाहर निकलने के लिए पूरी ताकत लगा रही थीं। परमहंस जी मुस्कुराए और बोले, ‘इन्हें तीन समूहों में बांटो, और देखो इनमें क्या अंतर है।’

पहली तरह की मछलियां – ये मछलियां हार मान चुकी हैं। इन्हें लगता है कि अब कोई बचाव नहीं, इसलिए ये बिना संघर्ष किए जाल में पड़ी रहती हैं।
दूसरी तरह की मछलियां – ये बचने की कोशिश तो कर रही हैं, लेकिन पूरी ताकत नहीं लगा पा रही हैं, इसलिए जाल से बाहर नहीं निकल पा रहीं।
तीसरी तरह की मछलियां – ये लगातार संघर्ष कर रही हैं, पूरे जोर से उछल रही हैं और अंततः खुद को जाल से आज़ाद कर लेती हैं।

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रामकृष्ण परमहंस जी ने शिष्य से कहा, ‘इंसान भी इन्हीं तीन तरह के होते हैं।’

पहले वे, जो मुसीबतों को अपनी नियति मानकर हार मान लेते हैं।
दूसरे वे, जो कोशिश तो करते हैं लेकिन रास्ता न मिलने के कारण लक्ष्य तक नहीं पहुंच पाते।
तीसरे वे, जो कठिनाइयों से लड़ते हैं, हर संभव प्रयास करते हैं और अंततः सफलता प्राप्त कर लेते हैं।

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फिर उन्होंने शिष्य को समझाया, ‘अगर तुम जीवन में सफल होना चाहते हो, तो हमेशा तीसरी मछली बनो—जो तब तक संघर्ष करती है, जब तक खुद को आज़ाद न कर ले!’

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र की मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है।

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लेख समाप्त

लेखक के बारे में

Shyamnandan

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श्यामनंदन कुमार News24.com में चीफ सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में 20 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले श्यामनंदन ज्योतिष, अंक शास्त्र, सामुद्रिक शास्त्र, पर्व-त्योहार सहित भारतीय धर्म-संस्कृति के जानकार पत्रकार हैं. उन्होंने पत्रकारिता में एम.ए. की पढ़ाई काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) से की है और ज्योतिष का अध्ययन भारतीय विद्या भवन, नई दिल्ली से किया है. अपने पेशे में डिजिटल करियर की शुरुआत उन्होंने एनडीटीवी कन्वर्जेंन्स के साथ की. श्यामनंदन हिंदुस्तान टाइम्स, बंसल न्यूज (भोपाल) जैसे न्यूज प्लेटफॉर्म्स के साथ भी जुड़े रहे हैं. उन्होंने देश के प्रसिद्ध संतों के सत्संग और समागम की रिपोर्टिंग की है.
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