Mahashivratri 2026: शिवलिंग पर जल चढ़ाने के बाद घर आकर न करें ये 5 गलतियां, नहीं तो शुरू हो सकता है अशुभ समय

Mahashivratri 2026: क्या आप भी महाशिवरात्रि के दिन शिवलिंग पर जल चढ़ाने के लिए मंदिर जाते हैं? यदि हां, तो मंदिर से लौटते समय कुछ कामों को करने से बचें. यहां पर आपको क्रमानुसार उन 5 गलतियों के बारे में जानने को मिलेगा, जिन्हें शिव मंदिर से लौटते समय व घर आकर करने से बचना चाहिए.

Mahashivratri 2026

Credit- Social Media

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Mistakes to avoid while returning from Shiva temple: शिव भक्तों के लिए महाशिवरात्रि का पर्व होली और दिवाली के त्योहार से कम नहीं है. इस दिन शिव भक्त न सिर्फ महादेव और देवी पार्वती के मिलन का जश्न मनाते हैं, बल्कि निर्जला व्रत और कठिन धार्मिक अनुष्ठान भी करते हैं. खासकर, शिवलिंग पर जल चढ़ाते हैं. हालांकि, शिव मंदिर से शिवलिंग पर जल चढ़ाने के बाद घर आकर कुछ कामों को करने से बचना चाहिए, अन्यथा व्यक्ति को पाप लग सकता है. साथ ही पूजा निष्फल हो सकती है. चलिए जानते हैं शिव मंदिर से लौटते समय व घर आकर कौन-सी 5 गलतियों व कामों को करने से पाप लगता है.

मंदिर से घर लौटकर न करें ये काम

खाली हाथ घर न आएं

शिव मंदिर से कभी भी खाली हाथ घर नहीं आना चाहिए. यदि आप अपने घर से शिवलिंग पर जल चढ़ाने के लिए लोटा या टोकरी में कोई सामान लेकर गए हैं तो उसमें जल, चरणामृत, फल, फूल या अन्य प्रसाद रखकर ही घर में प्रवेश करें. यदि आप इस नियम का पालन नहीं करते हैं तो आपको पाप भी लग सकता है.

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हाथ-पैर न धोएं

शिव मंदिर से घर आकर तुरंत या रास्ते में कहीं पर भी हाथ या पैर नहीं धोने चाहिए. यदि आप ऐसा करते हैं तो मंदिर की पॉजिटिव एनर्जी बरकरार नहीं रहेगी.

प्रसाद तुरंत न खाएं

मंदिर से लाए प्रसाद को घर आते ही तुरंत नहीं खाना चाहिए और न ही रास्ते में उसका सेवन करें. इसे शास्त्रों में अशुभ माना गया है. इसके अलावा प्रसाद को अशुद्ध जगह पर न रखें और न ही उसका अपमान करें.

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लड़ाई-झगड़ा न करें

घर में सकारात्मकता और शांति को बनाए रखने के लिए मंदिर से बाहर निकलते ही लड़ाई-झगड़ा न करें. साथ ही नकारात्मक चीजों से दूर रहें.

सोने से बचें

मंदिर से आने के बाद तुरंत सोना नहीं चाहिए. ये मंदिर की सकारात्मक ऊर्जा को बचाए रखने और घर की परेशानियों से छुटकारा पाने में मदद करता है.

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महाशिवरात्रि का महत्व

पौराणिक कथाओं के अनुसार, प्राचीन काल में फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि यानी महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था. साथ ही भगवान शिव शिवलिंग के रूप में सबसे पहले प्रकट हुए थे. इसके अलावा इसी तिथि पर शिव जी को नीलकंठ का नाम मिला था क्योंकि उन्होंने समुद्र मंथन के दौरान विष पिया था. इसी वजह से इस दिन शिव जी और माता पार्वती के साथ-साथ शिवलिंग पर जल व दूध अर्पित किया जाता है. द्रिक पंचांग के अनुसार, इस बार 15 फरवरी 2026 को महाशिवरात्रि का पावन पर्व मनाया जा रहा है.

डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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