Magh Gupt Navratri 2026: गुप्त नवरात्रि का आज छठा दिन, कार्तिकेय के साथ होगी मां त्रिपुर भैरवी की पूजा, मिलेगा धन-ऐश्वर्य का आशीर्वाद

Magh Gupt Navratri 2026: माघ गुप्त नवरात्रि 2026 के छठे दिन आजदशमहाविद्या की छठी शक्ति मां त्रिपुर भैरवी, देवी कात्यायनी और स्कंद षष्ठी पर भगवान कार्तिकेय की पूजा की जाएगी है. आज की साधना से धन-ऐश्वर्य और सिद्धि का विशेष योग बन रहा है. आइए जानते हैं विस्तार से…

Magh Gupt Navratri 2026.jpg

Magh Gupt Navratri 2026: आज शनिवार 24 जनवरी, 2026 को गुप्त नवरात्रि का छठा दिन है. द्रिक पंचांग के अनुसार, शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि 24 जनवरी की देर रात 12 बजकर 39 मिनट पर आरंभ हुई थी, जो अगले दिन 25 जनवरी तक रहेगी, उसके बाद सप्तमी तिथि आरंभ हो जाएगी. इस दिन दस महाविद्या के छठे रूप त्रिपुर भैरवी और देवी माता के छठे रूप कात्यायनी माता की पूजा-अर्चना की जाती है. इसके साथ ही आज स्कंद षष्ठी भी है. इसलिए आज देवताओं के सेनापति शिव-पार्वती पुत्र भगवान कार्तिकेय की पूजा भी की जाएगी. इन देवियों और देव की आराधना से धन-सिद्धि योग बनेगा.

विज्ञापन

मां त्रिपुर भैरवी

मां त्रिपुर भैरवी की उपासना गुप्त नवरात्रि के दौरान तांत्रिक साधना में विशेष रूप से की जाती है. वे दश महाविद्याओं में छठी महाविद्या मानी जाती हैं और गुप्त नवरात्रि के छठे दिन उनकी साधना का अत्यंत महत्व है. मां त्रिपुर भैरवी को उग्र एवं सौम्य, दोनों स्वरूपों में पूजा जाता है. ‘त्रिपुर’ शब्द का अर्थ तीन लोकों, जाग्रत, स्वप्न और सुषुप्ति अवस्थाओं से है, जिनकी प्रेरक और नियंत्रक शक्ति मां त्रिपुर भैरवी हैं. मां त्रिपुर भैरवी की जयंती प्रतिवर्ष मार्गशीर्ष मास की पूर्णिमा तिथि को श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ मनाई जाती है.

विज्ञापन

मां त्रिपुर भैरवी की साधना के लाभ

मां की कृपा से साधक को योग्य जीवनसाथी की प्राप्ति होती है तथा वैवाहिक जीवन में सुख, संतुलन और प्रेम बना रहता है. वे अपने भक्तों को मानसिक एवं बाह्य सभी प्रकार के भय से मुक्त कर अभय प्रदान करती हैं. मां भैरवी को “भव-बन्ध-मोचन” कहा जाता है, क्योंकि उनकी साधना से साधक संसार के बंधनों से मुक्त होकर आध्यात्मिक उन्नति की ओर अग्रसर होता है.

विज्ञापन

त्रिपुर भैरवी साधना मंत्र

गुप्त नवरात्रि के छठे दिन साधक इन मंत्रों का जाप करते हैं, जिससे जीवन के दोष और बाधाएं समाप्त होती हैं और देवी की कृपा से कृपा से आकर्षण, आत्मविश्वास, ऋण से मुक्ति, और शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है

बीज मंत्र: ॐ ह्रीं भैरवी कलौं ह्रीं स्वाहा.
षडाक्षरी मंत्र: हसैं हसकरीं हसैं.

विज्ञापन

यहां है त्रिपुर भैरवी का सिद्ध पीठ

मां त्रिपुर भैरवी का प्रसिद्ध सिद्ध पीठ वाराणसी यानी काशी में मीर घाट के समीप स्थित है, जिसे त्रिपुरा भैरवी मंदिर के नाम से जाना जाता है. यह स्थान अत्यंत जागृत और शक्तिपीठ स्वरूप माना जाता है, जहाँ साधना शीघ्र फलदायी होती है. ज्योतिषीय दृष्टि से कुंडली में लग्न दोष की शांति तथा मंगल और राहु ग्रहों के अशुभ प्रभाव को कम करने के लिए मां त्रिपुर भैरवी की साधना विशेष रूप से फलदायी मानी गई है.

विज्ञापन

डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र की मान्यताओं पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

न्यूज 24 पर पढ़ें देश,राष्ट्रीय समाचार (National News),खेल,मनोरंजन,धर्म,लाइफ़स्टाइल,हेल्थ,शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।

First published on:

और पढ़ें: हमारे संपादकीय दिशानिर्देश और मानक यहाँ देखें।

लेख समाप्त

लेखक के बारे में

Shyamnandan

Shyamnandan

श्यामनंदन कुमार News24.com में चीफ सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में 20 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले श्यामनंदन ज्योतिष, अंक शास्त्र, सामुद्रिक शास्त्र, पर्व-त्योहार सहित भारतीय धर्म-संस्कृति के जानकार पत्रकार हैं. उन्होंने पत्रकारिता में एम.ए. की पढ़ाई काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) से की है और ज्योतिष का अध्ययन भारतीय विद्या भवन, नई दिल्ली से किया है. अपने पेशे में डिजिटल करियर की शुरुआत उन्होंने एनडीटीवी कन्वर्जेंन्स के साथ की. श्यामनंदन हिंदुस्तान टाइम्स, बंसल न्यूज (भोपाल) जैसे न्यूज प्लेटफॉर्म्स के साथ भी जुड़े रहे हैं. उन्होंने देश के प्रसिद्ध संतों के सत्संग और समागम की रिपोर्टिंग की है.
... और पढ़ें
विज्ञापन
होम पेज पर वापस जाएँ