Lord Budha Story: बहुत समय पहले की बात है। महात्मा बुद्ध अपने शिष्यों के साथ गांव-गांव घूमकर लोगों को शांति, करुणा और सच्चे जीवन का मार्ग सिखाते थे। जहां भी वे जाते, हजारों लोग उन्हें सुनने के लिए इकट्ठा हो जाते।
एक दिन बुद्ध अपने शिष्यों के साथ एक गांव पहुंचे। वहां एक बड़ा पेड़ था, जिसके नीचे वे बैठ गए। धीरे-धीरे गांव के लोग वहां आकर बैठने लगे। सभी लोग बुद्ध की वाणी सुनने के लिए उत्सुक थे।
लेकिन उसी गांव में एक व्यक्ति ऐसा भी था, जिसे बुद्ध से बहुत क्रोध था। उसने कई लोगों से सुना था कि बुद्ध बहुत महान संत हैं और लोग उनका बहुत सम्मान करते हैं। यह बात उसे बिल्कुल पसंद नहीं थी।
वह मन ही मन सोचने लगा, “देखता हूं यह कैसा संत है। आज मैं इसे सबके सामने अपमानित करूंगा।”
कुछ देर बाद वह व्यक्ति वहां पहुंचा, जहां बुद्ध बैठे थे। जैसे ही उसने बुद्ध को देखा, वह जोर-जोर से उन्हें बुरा-भला कहने लगा।
वह लगातार कठोर शब्द बोल रहा था। उसने बुद्ध का मजाक उड़ाया, उनका अपमान किया और तरह-तरह की गलत बातें कहने लगा।
वह काफी देर तक बोलता रहा, लेकिन बुद्ध शांत बैठे रहे। उनके चेहरे पर कोई गुस्सा या दुख दिखाई नहीं दे रहा था। वे बिल्कुल शांत थे, जैसे कुछ हुआ ही न हो।
यह देखकर वहां बैठे शिष्य बहुत परेशान हो गए। उन्हें उस व्यक्ति की बातें सुनकर बहुत क्रोध आ रहा था।
एक शिष्य ने धीरे से बुद्ध से कहा,
“भगवन, यह व्यक्ति आपका इतना अपमान कर रहा है। आप इसे कुछ जवाब क्यों नहीं देते?”
लेकिन बुद्ध फिर भी शांत बैठे रहे।
कुछ समय बाद वह व्यक्ति थक गया। उसने देखा कि बुद्ध ने उसकी किसी बात का जवाब नहीं दिया। वह हैरान होकर बोला,
“क्या आपको मेरी बातें सुनाई नहीं दे रही हैं? मैं इतने समय से आपको अपमानित कर रहा हूं, और आप चुप बैठे हैं!”
तब बुद्ध ने बहुत शांत स्वर में कहा,
“मैं तुम्हारी बातें सुन रहा हूं।”
वह व्यक्ति और हैरान हो गया। उसने पूछा,
“अगर आप सुन रहे हैं, तो आपने जवाब क्यों नहीं दिया?”
बुद्ध मुस्कुराए और बोले,
“मैं तुमसे एक सवाल पूछता हूं। अगर कोई व्यक्ति किसी को कोई उपहार दे और वह व्यक्ति उस उपहार को स्वीकार न करे, तो वह उपहार किसके पास रहेगा?”
वह व्यक्ति तुरंत बोला,
“स्वाभाविक है, वह उपहार उसी के पास रहेगा जिसने दिया है।”
बुद्ध ने शांत स्वर में कहा,
“ठीक वैसे ही, तुमने मुझे अपमान और क्रोध के शब्द दिए। लेकिन मैंने उन्हें स्वीकार नहीं किया। इसलिए वे सब तुम्हारे पास ही रह गए।”
यह सुनकर वहां सन्नाटा छा गया।
उस व्यक्ति के चेहरे का रंग बदल गया। उसे अपनी गलती का एहसास होने लगा। उसे समझ आ गया कि उसने एक शांत और महान व्यक्ति के साथ बहुत गलत व्यवहार किया है।
कुछ क्षण बाद वह धीरे-धीरे बुद्ध के पास आया और उनके चरणों में गिर पड़ा।
वह बोला,
“मुझे क्षमा कर दीजिए। मैंने आपको बिना समझे अपमानित किया।”
बुद्ध ने उसे उठाया और बहुत प्रेम से कहा,
“जब इंसान अपनी गलती समझ लेता है, तभी वह सही रास्ते पर चलना शुरू करता है।”
उस दिन वह व्यक्ति बुद्ध का अनुयायी बन गया।
यह कथा हमें सिखाती है कि क्रोध का जवाब क्रोध से देने पर केवल झगड़ा बढ़ता है। लेकिन यदि हम शांत और धैर्यवान रहें, तो सबसे कठिन स्थिति भी बदल सकती है।
महात्मा बुद्ध का जीवन इसी संदेश से भरा हुआ था कि शांति, धैर्य और करुणा ही सच्ची ताकत है।
संबंधित खबरें
कब है रमा एकादशी व्रत? जानिए सही तारीख और श्रीहरि विष्णु की पूजा विधि
12 hrs agoकहीं दीपोत्सव तो कहीं काली पूजा, जानिए इन 4 शहरों से जुड़ा दिवाली का इतिहास
13 hrs ago24 नवंबर से पहले करें गंगाजल वाला उपाय, सुख-सौभाग्य की होगी प्राप्ति
15 hrs agoदिवाली से पहले क्यों की जाती है घर की डीप क्लीनिंग? जानिए इसके पीछे का कारण
16 hrs agoधनतेरस पर करें तिजोरी से जुड़े ये 5 उपाय, पैसों की तंगी होगी दूर
18 hrs agoआज अहोई अष्टमी पर करें तारों की पूजा, आपके शहर में कितने बजे दिखेंगे तारे?
1 day agoदिवाली की सफाई में घर से निकाल फेकें ये अशुभ चीजें, मिलेंगे शुभ परिणाम
1 day agoधनतेरस पर इन 5 चीजों को खरीदना है शुभ, जानिए क्या है महत्व?
1 day agoआज अहोई अष्टमी की पूजा के दौरान जरूर करें अहोई माता की आरती, पढ़ें लिरिक्स
1 day agoअहोई अष्टमी व्रत आज, जानें मुहूर्त, पूजा विधि और तारे निकलने का समय
1 day agoन्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।
First published on:
Know More: Editorial Guidelines