Kaalchakra Today 8 June 2026: पंचामृत को काफी शुभ माना जाता है, जो कि दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से मिलकर बनता है. इसी वजह से इसे पांच अमृत कहते हैं, जिससे भगवान का अभिषेक भी किया जाता है. भगवान के पूजन में देवी-देवताओं को जल से स्नान कराने के बाद पंचामृत से स्नान कराया जाए तो उसे पंचामृत अभिषेक कहते हैं. आज 8 जून 2026 के कालचक्र में प्रश्न कुंडली विशेषज्ञ पंडित सुरेश पांडेय आपको पंचामृत के महत्व, लाभ, उपायों और नियमों आदि के बारे में बताने जा रहे हैं.
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पंचामृत से होने वाले लाभ
- पंचामृत से जिस तरह हम भगवान को स्नान कराते हैं, ऐसे ही खुद स्नान करें तो शरीर की कांति बढ़ती है.
- पंचामृत के 5 तत्व सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं. इसमें कैल्शियम, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, विटामिन और वास जैसे तत्व होते हैं, जो कई रोगों से रक्षा करते हैं. साथ ही मन को शांति प्रदान करते हैं.
- पंचामृत में तुलसी का एक पत्ता डालकर नियमित सेवन करने से आजीवन किसी भी प्रकार का रोग और शोक नहीं होता है.
पंचामृत का महत्व और उपाय
- पंचामृत में जो दूध होता है, वो शरीर के अंदर के विष को दूर करता है. साथ ही मन को तनाव से हमेशा दूर रखता है. पंचामृत में दूध होने के कारण जब देवी-देवताओं का अभिषेक किया जाता है या इसका भोग लगाया जाता है तो व्यक्ति को सुयोग्य संतान, गुणवान जीवनसाथी, राजसुख, मान-सम्मान और आरोग्य की प्राप्ति होती है.
- पंचामृत में मिला हुआ शहद शरीर से अतिरिक्त चर्बी को हटाता है. साथ ही आध्यात्म भाव और धर्म के प्रति झुकाव को मजबूत करता है. पंचामृत जहां बनता है और जहां इसका सेवन किया जाता है, वहां लोग प्यार से रहते हैं. बता दें कि पंचामृत में शहद होने के कारण इससे जब देवी-देवताओं का अभिषेक किया जाता है या भोग लगाया जाता है तो व्यक्ति को कर्ज व दरिद्रता से छुटकारा मिलता है. साथ ही कानूनी मामलों, विरोधियों और अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति मिलती है.
यदि आप पंचामृत से जुड़े अन्य उपायों, नियमों व लाभों के बारे में जानना चाहते हैं तो उसके लिए ये वीडियो जरूर देखें.
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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.
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