सनातन धर्म के लोगों के लिए पंचगव्य का खास महत्व है, जिसका इस्तेमाल प्रत्येक देवी-देवताओं की पूजा में किया जाता है। गाय से दूध, दही, घी, गौमूत्र और गोबर प्राप्त होता है, जिसे पंचगव्य कहा जाता है। पंचगव्य को बेहद पवित्र माना जाता है, जिसके बिना कोई भी शुभ या मांगलिक कार्य पूरा नहीं होता है।
किसी भी कर्मकांड में पापों का नाश करने के लिए या घर की शुद्धि के लिए पंचगव्य का प्रयोग किया जाता है। आज के कालचक्र में पंडित सुरेश पांडेय आपको पंचगव्य से जुड़े ऐसे अचूक उपायों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्हें करने से हर एक व्यक्ति की कोई भी इच्छा पूरी हो सकती है।
गाय में होता है देवी-देवताओं का वास!
गाय के गोबर और गौमूत्र को दरिद्रता का नाशक माना जाता है। गौमूत्र का अथर्ववेद, चरक संहिता, राजतिपटु, बाण भट्ट, अमृत सागर, भाव सागर और सुश्रुत संहिता में भी वर्णन है।
पद्म पुराण के अनुसार, गाय के मुख में चारों वेदों का निवास है।
गाय के सींग के मूल में सदा ब्रह्मा और विष्णु प्रतिष्ठित हैं।
गाय के सींग के अग्रभाग में तीर्थ प्रतिष्ठित हैं और शिव जी सींग के मध्य में हैं।
गौ की ललाट पर गौरी, नासिका के अग्रभाग में भगवान कार्तिकेय, नासिका के दोनों पुटों में कंबल और अश्वतर में दोनों नाग प्रतिष्ठित हैं।
गाय के दांतों में आठों वसुगण, जीभ में वरुण और कंठ में सरस्वती बसती हैं।
गाय की ग्रीवा में इंद्र, मौर में राक्षस, पार्षिण भाग में सौरमंडल और जंघाओं के चारों चरणों में धर्म विराजमान है।
खुरों के मध्य में गंधर्व, अग्रभाग में सर्प और पश्च भाग में राक्षस गण हैं।
गौ के पृष्ठदेश में एदादश रुद्र, कमर में पितर, कपोलों में मानव, केश समूहों में आदित्य रश्मियां, गौमूत्र में गंगा और गोमय में यमुना प्रतिष्ठित हैं।
गौ के रोमसमूह में 33 कोटि देवी-देवता प्रतिष्ठित हैं।