हमारे साथ जुड़ें X IG YT FB
Trending: Gyanesh KumarsirBigg Boss 20

Jagannath Rath Yatra Mystery: पुरी रथयात्रा का अनोखा रहस्य, हर साल एक मजार पर क्यों रुकता है रथ, जानें असली वजह

Jagannath Rath Yatra Mystery: कहते हैं, पुरी रथयात्रा में भगवान जगन्नाथ का नंदीघोष रथ हर साल एक मजार के सामने जरूर रुकता है. इसके पीछे सदियों पुरानी भक्ति, आस्था और भक्त सालबेग से जुड़ी अनोखी परंपरा मानी जाती है. आइए जानते हैं, इस परंपरा के पीछे की असली वजह क्या है?

विज्ञापन

Jagannath Rath Yatra Mystery: पुरी की विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ रथयात्रा से जुड़ी एक ऐसी परंपरा है, जिसे जानकर बहुत लोग भावुक हो जाते हैं. हर साल जब भगवान जगन्नाथ का नंदीघोष रथ बड़े दांडा यानी ग्रैंड रोड से गुजरता है, तो वह एक मजार के सामने कुछ देर के लिए रुकता है. पहली नजर में यह बात चौंकाने वाली लग सकती है, लेकिन इसके पीछे सदियों पुरानी भक्ति, प्रेम और आस्था की बेहद खास कहानी छिपी है. यह परंपरा बताती है कि भगवान के लिए सबसे बड़ी चीज जाति, धर्म या पहचान नहीं, बल्कि सच्ची श्रद्धा होती है. आइए जानते हैं, पुरी रथयात्रा का यह अनोखा रहस्य कि हर साल एक मजार पर क्यों रुकता है भगवान का रथ, भक्त सालबेग कौन थे और उनका महाप्रभु जगन्नाथ से इतना गहरा रिश्ता कैसे बना?

यह भी पढ़ें: Numerology Personality Traits: बिना कुछ किए भी दूसरों का ‘क्रश’ बन जाते हैं इन तारीखों में जन्मे लोग, जानें अंक ज्योतिष का छिपा सच

कौन थे भक्त सालबेग?

कहते हैं, सालबेग 17वीं सदी के प्रसिद्ध कवि और भगवान जगन्नाथ के अनन्य भक्त थे. उनके पिता मुगल सूबेदार लाल बेग थे, जबकि उनकी मां एक ब्राह्मण महिला थीं. बचपन से ही मां उन्हें भगवान जगन्नाथ की कथाएं सुनाया करती थीं. कहा जाता है कि एक युद्ध के दौरान सालबेग गंभीर रूप से घायल हो गए थे. जब दवाइयों से कोई फायदा नहीं हुआ, तो उनकी मां ने उन्हें भगवान जगन्नाथ का नाम लेने की सलाह दी. मान्यता है कि सच्चे मन से प्रार्थना करने के बाद वे स्वस्थ हो गए. इसी घटना के बाद उन्होंने अपना पूरा जीवन भगवान की भक्ति को समर्पित कर दिया.

विज्ञापन

जब नहीं मिला मंदिर में प्रवेश

जब सालबेग भगवान जगन्नाथ के दर्शन के लिए पुरी पहुंचे, तो उस समय उन्हें मुस्लिम होने के कारण मंदिर में प्रवेश की अनुमति नहीं मिली. इससे उन्हें गहरा दुख जरूर हुआ, लेकिन उनकी भक्ति जरा भी कम नहीं हुई. उन्होंने तय किया कि जब भगवान रथयात्रा के दौरान मंदिर से बाहर आएंगे, तब वे रास्ते में ही उनके दर्शन करेंगे.

यह भी पढ़ें: Chanakya Niti: पति-पत्नी के ‘गुप्त कर्तव्य’ क्या हैं, जानें सक्सेसफुल मैरिड लाइफ के 5 जरूरी नियम

विज्ञापन

भगवान ने किया भक्त का इंतजार

एक बार सालबेग जी वृंदावन से पुरी लौट रहे थे, लेकिन रास्ते में बीमार पड़ गए. उन्हें लगा कि इस बार रथयात्रा में भगवान के दर्शन नहीं हो पाएंगे. तब उन्होंने भगवान से प्रार्थना की कि वे उनके आने तक रथ रोक दें. मान्यता है कि जब भगवान जगन्नाथ का नंदीघोष रथ सालबेग की कुटिया के पास पहुंचा, तो वह अचानक रुक गया. हजारों लोगों, हाथियों और सैनिकों की कोशिश के बाद भी रथ आगे नहीं बढ़ा. बाद में पुजारियों को संकेत मिला कि भगवान अपने प्रिय भक्त सालबेग का इंतजार कर रहे हैं. जब सालबेग वहां पहुंचे और उन्होंने भगवान के दर्शन किए, तभी रथ आगे बढ़ सका.

आज भी निभाई जाती है यह परंपरा

सालबेग के निधन हो जाने के बाद उसी स्थान पर उनकी मजार बनाई गई. लोग बताते हैं कि तभी से हर साल रथयात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ का रथ वहां कुछ देर के लिए रुकता है. इस मौके पर सालबेग के रचे भजन भी गाए जाते हैं. यह परंपरा आज भी लोगों को यह संदेश देती है कि भगवान के लिए सबसे बड़ा धर्म सच्ची भक्ति, प्रेम और समर्पण है.

विज्ञापन

यह भी पढ़ें: Hindu Marriage Rules: क्या सच में एक स्त्री के 4 पति होते हैं? विवाह से पहले कन्या पर किसका अधिकार? जानें शास्त्रों का रहस्य

डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

विज्ञापन

संबंधित खबरें

Tags:

न्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।

First published on:

Know More: Editorial Guidelines

लेख समाप्त

लेखक के बारे में

Shyamnandan

श्यामनंदन कुमार News24.com में चीफ सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में 20 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले श्यामनंदन ज्योतिष, अंक शास्त्र, सामुद्रिक शास्त्र, पर्व-त्योहार सहित भारतीय धर्म-संस्कृति के जानकार पत्रकार हैं. उन्होंने पत्रकारिता में एम.ए. की पढ़ाई काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) से की है और ज्योतिष का अध्ययन भारतीय विद्या भवन, नई दिल्ली से किया है. अपने पेशे में डिजिटल करियर की शुरुआत उन्होंने एनडीटीवी कन्वर्जेंन्स के साथ की. श्यामनंदन हिंदुस्तान टाइम्स, बंसल न्यूज (भोपाल) जैसे न्यूज प्लेटफॉर्म्स के साथ भी जुड़े रहे हैं. उन्होंने देश के प्रसिद्ध संतों के सत्संग और समागम की रिपोर्टिंग की है.
... और पढ़ें

ताज़ा खबरें

Sponsored Links by Taboola