Hindu Dharma ke Niyam: हिंदू धर्म में कुछ विशेष तिथियां ऐसी हैं जब घर में ताजी रोटी बनाना वर्जित माना गया है. ऐसा करने से घर में दरिद्रता, माता लक्ष्मी और अन्नपूर्णा की नाराजगी, नकारात्मक ऊर्जा या पितरों के अपमान जैसी परेशानियां हो सकती हैं. शास्त्रों के अनुसार, ये नियम केवल परंपरा नहीं बल्कि घर और परिवार की भलाई से जुड़े विश्वास हैं. आइए जानते हैं, वे 5 तिथियां कौन-सी हैं, जब रोटी बनाना वर्जित माना जाता है?
नागपंचमी
नागपंचमी के दिन तवा चूल्हे पर रखना वर्जित है. तवा को नाग का प्रतीक माना जाता है. इस दिन तवा पर रोटी बनाने से नाग देवता रुष्ट हो सकते हैं और परिवार पर अशुभ प्रभाव पड़ सकता है. इसलिए इस दिन खाने के लिए केवल कढ़ाई या पतीले का उपयोग किया जाता है.
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शरद पूर्णिमा
शरद पूर्णिमा का दिन धन और सौभाग्य की देवी लक्ष्मी के प्रकट होने का प्रतीक है. इस दिन खीर-पूरी बनाना शुभ माना गया है. साधारण रोटी बनाना अशुभ है. शास्त्रों में कहा गया है कि चांद की रोशनी में रखी गई खीर का सेवन सौभाग्य बढ़ाता है.
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शीतला अष्टमी
शीतला अष्टमी पर माता शीतला को बासी भोजन का भोग लगाया जाता है. इस दिन ताजी रोटी बनाना वर्जित है. घर में केवल एक दिन पहले तैयार ठंडा खाना ग्रहण किया जाता है. यह परंपरा स्वास्थ्य और परिवार की समृद्धि के लिए मानी जाती है.
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दीपावली
दीपावली के दिन घर में रोटी बनाना अशुभ माना जाता है. इस दिन विशेष पकवान जैसे हलवा, पूरी, खीर तैयार की जाती हैं. माता लक्ष्मी के स्वागत के लिए केवल विशेष व्यंजन बनाना शुभ है. साधारण रोटी बनाना टाला जाता है ताकि घर में धन और सुख की वृद्धि बनी रहे.
घर में मृत्यु होने पर
यदि परिवार में किसी की मृत्यु हो जाए, तो तेरहवीं संस्कार पूरी होने तक घर में रोटी नहीं बनती. यह शोकपूर्ण समय होता है और घर की ऊर्जा विशेष रूप से संवेदनशील होती है. इस दौरान केवल साधारण या पूर्व में बनी चीजें ग्रहण की जाती हैं.
ये मान्यताएं भी जानें
वास्तु शास्त्र के अनुसार रोटियां गिनकर नहीं बनानी चाहिए. पहली रोटी हमेशा गाय को निकालना शुभ माना गया है. थाली में कभी भी तीन रोटियां एक साथ नहीं परोसनी चाहिए, क्योंकि इसे मृतक के भोज से जोड़ा जाता है.
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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र की मान्यताओं पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.