Hal Shashthi 2026: हल षष्ठी का पर्व भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है. हल षष्ठी को हल छठ के नाम से भी जानते हैं. कृष्ण जन्माष्टमी से पहले यह पर्व मनाया जाता है. हल छठ का दिन श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम के जन्मोत्सव के तौर पर मनाते हैं. हल षष्ठी 2 सितंबर को है. यह दिन भगवान बलराम की जयंती और संतान के कल्याण के लिए व्रत करने से जुड़ा है. आइये इसके बारे में जानते हैं.
भगवान बलराम का जन्मोत्सव
हल षष्ठी का पर्व श्रीकृष्ण के बड़े भाई दाऊजी यानी बलराम के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है. श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम को शेषनाग का अवतार माना जाता है. बलराम का उनका मुख्य अस्त्र हल है. इसी कारण से इस दिन को हल षष्ठी के नाम से जानते हैं. उनका यह अस्त्र केवल दुष्टों के विनाश नहीं, साथ ही कृषि और अन्न पैदा करने से जुड़ा है. यह दिन संतान के जीवन में सुख के लिए व्रत करने के लिहाज से भी खास होता है.
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भगवान बलराम पूजा विधि
हल षष्ठी के दिन भगवान बलराम का जन्मोत्सव मनाया जाता है. आपको बलराम जी की पूजा करनी चाहिए. आप सुबह उठकर स्नान कर साफ वस्त्र पहन लें. इसके बाद पूजा स्थान की सफाई कर चौकी स्थापित करें. भगवान बलराम की प्रतिमा रखें और इसके समक्ष दीपक और धूप जलाएं. आप बलराम जी की पूजा के दौरान 'ॐ बलरामाय नमः' मंत्र का जाप करें. भगवान को माखन-मिश्री, फल और मिठाइयों का भोग लगाएं. बलराम जी की आरती कर पूजा संपन्न करें.
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हल की पूजा करें
हल षष्ठी के दिन बलराम भगवान के साथ ही हल और खेती से जुड़े उपकरणों आदि की पूजा की जाती है. अच्छी सेहत और उज्ज्वल भविष्य की कामना से व्रत करें. इसके साथ ही हल, बैल और खेती से जुड़े अन्य उपकरणों की पूजा करें. हल षष्ठी पर कई लोग दीवार पर गोबर से हल, पशु और किसान की आकृति बनाकर पूजा करते हैं. हल षष्ठी के दिन अनाज, फल और सब्जियों का सेवन न करें. इस दिन भैंस के दूध की बनी चीजों को खाने की परंपरा है.
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.
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