Kaalchakra Today: गणेश चतुर्थी का पर्व गणपति बप्पा के स्वागत और उपासना का सबसे उत्तम समय माना जाता है. गणेश जी प्रथम पूज्य देव हैं यानी सभी देवताओं में सबसे पहले पूजे जाने वाले. उनकी आराधना जीवन की सभी विघ्न-बाधाएं दूर करती हैं. इस समय अपने घरों और सामाजिक स्थलों पर गणपति की प्रतिमा की स्थापना और पूजा बेहद फलदायी होती है.

गणपति पूजा के लाभ

भगवान गणपति के कई रूप हैं- वक्रतुंड, एकदंत, महोदर, गजानन, लंबोदर, विघ्नराज, धर्मवर्ण आदि. उनके हर स्वरूप की पूजा के अलग-अलग लाभ है. वक्रतुंड ध्यान से ईर्ष्या दूर होती है. एकदंत से अहंकार कम होता है. लंबोदर से लालच पर नियंत्रण आता है. गजानन से क्रोध शांत होता है. विघ्नराज से निर्णय क्षमता बढ़ती है.

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घर में कहां रखें गणेश जी की प्रतिमा

कालचक्र प्रोग्राम में पंडित सुरेश पांडेय जी बताते हैं कि घर में गणेश जी की प्रतिमा उत्तर दिशा में रखनी चाहिए. इससे धन और करियर में वृद्धि होती है. पूर्व दिशा में रखने से सेहत अच्छी रहती है. पश्चिम दिशा में रखने से संतान सुख मिलता है. दक्षिण दिशा में गणेश की प्रतिमा नहीं रखनी चाहिए.

सफलता-समृद्धि के मंत्र

पंडित जी बताते हैं कि भगवान गणेश के कुछ मंत्र बेहद प्रभावशाली हैं, जिनके जाप और पाठ से जीवन में सफलता और समृद्धि प्राप्त होती है:

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  • ॐ गं गणपतये नमः - इसके रोज 108 बार जाप से एंक्जायटी, डिप्रेशन और मानसिक तनाव दूर होता है.
  • ॐ एकदंताय विद्महे वक्रतुंडाय धीमहि तन्नो दंती प्रचोदयात - इस मंत्र का जाप बुद्धि और विवेक का विकास करता है.
  • ॐ सिद्धि विनाकाय नमः - इसके जाप से कार्यसिद्धि होती है.
  • ॐ ऋणमोचक गणपतये नमः - इस मंत्र का जाप कर्ज से मुक्ति दिलवाता है.
  • ॐ लंबोदराय नमः - इस मंत्र के जाप से संतान सुख प्राप्त होता है.
  • ॐ क्लीं गं गणपतये नमः - इस मंत्र का जाप विवाह की रुकावट दूर करता है.

इन सब मंत्रों के अलावा भगवान गणपति को प्रसन्न करने के लिए 'गणेश अथर्व शीर्ष' का पाठ किया जाता है. यह स्मरण शक्ति और आत्मविश्वास बढ़ाता है.

करें ये अचूक उपाय

पंडित जी के अनुसार, गणेश जो दूर्वा अर्पित करना सबसे शुभ है. हर बुधवार को और चतुर्थी तिथि को दूर्वा को कुमकुम लगाकर चढ़ाने से आरोग्य और धन प्राप्त होता है. उनकी पूजा मोदक और लड्डू के साथ करें. लाल-पीले फूल, नारियल और इत्र भी चढ़ाएं. घर में 'श्री गणेश यंत्र' की स्थापना करें. इससे सुख-समृद्धि आती है. राहु-केतु की शांति के लिए काले तिल और नारियल अर्पित करें. शनि की शांति के लिए 21 दूर्वा चढ़ाएं.

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देखें वीडियो

कालचक्र के इस कार्यक्रम को आप नीचे दिए वीडियो में देख सकते हैं:

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष और धार्मिक शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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