Dussehra 2026: रामचरित मानस-रामायण के अनुसार, त्रेतायुग में भगवान श्रीराम ने आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को लंका पर विजय हासिल कर रावण का वध किया था. तब से इस दिन को दशहरा या विजयादशमी के रूप में मनाया जाने लगा. इस साल रावण दहन 20 अक्टूबर 2026 दिन सोमवार को दशहरे पर किया जाएगा. इस दिन को बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक मानते हैं. रावण दहन का इतिहास काफी पुराना रहा है. आज के समय दशहरे के दिन रावण का पुतला जलाने की परंपरा है.
कब हुई रावण दहन की शुरुआत?
वर्तमान समय में देशभर में कई जगहों पर रामलीला का आयोजन किया जाता है. इसके साथ ही रावण दहन किया जाता है. भारत देश के आजाद होने के बाद रावण दहन की शुरुआत झारखंड के रांची से हुई थी. रावण दहन की शुरुआत साल 1948 में किया की गई थी. साल 1947 में भारत-पाकिस्तान के बंटवारे के बाद पाकिस्तान से विस्थापित होकर आए शरणार्थियों ने झारखंड के रांची शहर में दशहरे का आयोजन कर रावण दहन किया गया था.
रामलीला आयोजन की शुरुआत
रामलीला के मंचन की शुरुआत 16वीं-17वीं शताब्दी से मानी जाती है. गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित रामचरित मानस-रामायण के बाद से उत्तर भारत में रामलीला मंचन की शुरुआत हुई. हालांकि, दशहरे के दिन रावण का पुलता जलाने की परंपरा काफी बाद में शुरू हुई. प्राचीन समय में मिट्टी या लकड़ी से बने रावण के पुतले जलाने की परंपरा थी. घास-फूस, कागज और पटाखों से विशाल पुतले जलाने की शुरुआत काफी बाद में हुई. अब देशभर में कई जगहों पर 100 फीट से भी अधिक ऊंचे रावण के पुतले बनाकर जलाए जाते हैं.
रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतले का दहन
दशहरे के दिन रावण के पुतले के साथ ही रावण के बड़े बेटे मेघनाद और रावण के छोटे भाई कुंभकर्ण के पुलते जलाए जाते हैं. विजयादशमी का पर्व बुराई पर अच्छाई और असत्य पर सत्य की जीत का प्रतीक है. आप रावण दहन देखने के लिए अपने आसपास के रामलीला पंडांल में जा सकते हैं.
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.