Chaitra Purnima 2026: हिंदू नववर्ष की शुरुआत के साथ चैत्र मास नई ऊर्जा और उम्मीदों का संदेश लेकर आता है. इसी माह की पूर्णिमा को बेहद पवित्र माना गया है. साल 2026 में यह तिथि बेहद खास बन रही है, क्योंकि गुरु और चंद्र का प्रभाव एक साथ शुभ फल देने वाला माना जा रहा है. यह संयोग जीवन में सुख, शांति और समृद्धि के नए अवसर खोल सकता है. आइए जानते हैं, चैत्र पूर्णिमा कब है और नए साल की पहली पूर्णिमा महत्व और लाभ क्या हैं?
कब है चैत्र पूर्णिमा 2026?
पंचांग के अनुसार, चैत्र पूर्णिमा तिथि 1 अप्रैल सुबह 7 बजकर 6 मिनट से शुरू होगी. इसका समापन 2 अप्रैल सुबह 7 बजकर 41 मिनट पर होगा. उदय तिथि के आधार पर यह पर्व 2 अप्रैल 2026, गुरुवार को मनाया जाएगा. गुरुवार और पूर्णिमा का यह मेल इसे और अधिक फलदायी बना रहा है.
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क्यों खास है यह पूर्णिमा?
विक्रम संवत 2083 की यह पहली पूर्णिमा है. इस वर्ष के राजा गुरु और सेनाधिपति चंद्र माने गए हैं. ऐसे में इस दिन गुरु और चंद्र का प्रभाव विशेष रूप से सक्रिय रहता है. इसी दिन हनुमान जयंती का पर्व भी मनाया जाएगा, जिससे इसका धार्मिक महत्व और बढ़ जाता है.
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चैत्र मास का महत्व
चैत्र को नवजीवन का महीना कहा जाता है. इस समय प्रकृति में बदलाव दिखता है. पेड़-पौधों में नई कोंपलें आती हैं. मान्यता है कि इस माह में किए गए शुभ कार्य पूरे वर्ष फल देते हैं. गुरु के प्रभाव से ज्ञान और निर्णय क्षमता में वृद्धि होती है, जबकि चंद्र मन को स्थिर और शांत करता है.
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पूजा विधि और आसान उपाय
सुबह स्नान के बाद भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करें. घी का दीपक जलाएं और सत्यनारायण कथा का पाठ करें. शाम को चंद्रमा को दूध और जल से अर्घ्य दें. सफेद फूल और अक्षत अर्पित करना शुभ माना जाता है.
एक सरल उपाय भी किया जा सकता है. चांदी के पात्र में जल भरकर चंद्रमा की रोशनी में रखें और बाद में ग्रहण करें. इससे मानसिक तनाव कम होता है.
दान और चंद्र पूजा का महत्व
इस दिन सफेद वस्तुओं जैसे चावल, दूध, चीनी या वस्त्र का दान करना शुभ माना जाता है. यह चंद्र से जुड़े दोषों को शांत करने में सहायक होता है. खीर का भोग लगाकर प्रसाद बांटना भी लाभकारी माना गया है.
गुरु-चंद्र कृपा से मिलने वाले लाभ
इस दिन लक्ष्मी नारायण की पूजा से धन-धान्य में वृद्धि के संकेत मिलते हैं. आर्थिक परेशानी झेल रहे लोग पीपल के नीचे दीपक जला सकते हैं. गुरु का प्रभाव ज्ञान और समृद्धि देता है, जबकि चंद्र मानसिक शांति और भावनात्मक संतुलन प्रदान करता है. यह पूर्णिमा आध्यात्मिक उन्नति, आत्मचिंतन और सकारात्मक शुरुआत के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है.
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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.