Durgashtami Puja: चैत्र नवरात्रि के आठवें दिन दुर्गाष्टमी का पर्व बड़ी श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है. द्रिक पंचांग के अनुसार, चैत्र शुक्ल अष्टमी तिथि 25 मार्च को दोपहर 1:50 बजे शुरू होकर 26 मार्च सुबह 11:48 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के आधार पर दुर्गाष्टमी 26 मार्च 2026, गुरुवार को मनाई जाएगी।
दुर्गाष्टमी का दिन मां दुर्गा के आठवें रूप, मां महागौरी, को समर्पित है. मां महागौरी शांति, सौंदर्य और पवित्रता की देवी हैं. उनके आशीर्वाद से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, मन की शुद्धि और संतान सुख की प्राप्ति होती है. इस दिन की पूजा से भक्तों को आध्यात्मिक बल और नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति मिलती है.
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मां महागौरी का स्वरूप और महत्व
मां महागौरी सफेद वस्त्र धारण करती हैं और वृषभ पर विराजमान रहती हैं. उनके चार हाथ हैं जिनमें त्रिशूल और डमरू होते हैं. इनके शांत और सौम्य रूप से जीवन में सौभाग्य और सकारात्मक बदलाव आते हैं. इस दिन उनकी पूजा करने से भय और चिंता दूर होती हैं. भक्तों का मानना है कि उनका सत्कार मनोकामनाओं की पूर्ति करता है और जीवन में स्थिरता लाता है.
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दुर्गाष्टमी पूजा विधि
सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें. सफेद या चांदी के वस्त्र पहनें. पूजा स्थल पर साफ कपड़ा बिछाएं और मां महागौरी की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें. लाल और पीले फूल, अक्षत, चंदन और कमल के फूल से सजावट करें. घी का दीपक जलाएं और मंत्र 'ॐ देवी महागौर्यै नमः' का कम से कम 108 बार जाप करें. पाठ के दौरान मन को शुद्ध रखें और सात्विक आचरण अपनाएं. शाम को गोधूलि बेला में पुनः आरती और पूजा करें.
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विशेष मंत्र और उनके लाभ
मां महागौरी के मंत्र शक्ति और मानसिक शांति देने वाले हैं. ध्यान मंत्र, स्तुति मंत्र और बीज मंत्र का नियमित जाप जीवन में आध्यात्मिक उन्नति और नकारात्मकता से मुक्ति दिलाता है. इन मंत्रों के जाप से मन की शांति, सकारात्मकता और अंदरूनी संतुलन मिलता है.
भोग और प्रसाद
मां महागौरी को सफेद मिठाइयां, खीर, हलवा, पंचामृत, नारियल, केला और मौसमी फल अर्पित करें. भोग को सात्विक रखें और लहसुन-प्याज से परहेज करें. प्रसाद सभी भक्तों में बांटने से मां की कृपा अधिक तीव्र होती है.
कन्या पूजन और खास उपाय
दुर्गाष्टमी पर कन्या पूजन का विशेष महत्व है. छोटी कन्याओं को देवी का रूप मानकर पैर धोएं, तिलक करें और लाल चुनरी, फूल, मिठाई व दक्षिणा अर्पित करें. यह उपाय मनोकामना पूर्ण करने और मां की प्रसन्नता पाने के लिए अत्यंत लाभकारी है. पितृ दोष या कालसर्प दोष निवारण के लिए चांदी के नाग-नागिन नदी में प्रवाहित करें, पीपल में जल अर्पित करें और सरसों का तेल दीपक जलाएं.
जीवन में फायदे
विधिपूर्वक पूजा करने से मां महागौरी की कृपा से जीवन में सफलता, सुख-समृद्धि और मानसिक शांति प्राप्त होती है. नवरात्रि के आठवें दिन की यह पूजा भक्तों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने वाली मानी जाती है.
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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.