हमारे साथ जुड़ें X IG YT FB
Trending: Gyanesh KumarsirBigg Boss 20

Chaiti Chhath: 22 मार्च से नहाय-खाय के साथ शुरू होगी चैती छठ, जानें व्रत की पूरी डेट्स और खास नियम

Chaiti Chhath: इस वर्ष 22 मार्च, 2026 से नहाय-खाय के साथ चैती छठ का शुभारंभ हो रहा है, जो 4 दिवसीय कठिन सूर्य उपासना का पर्व है. आइए जानते हैं, हिंदू नववर्ष और चैत्र नवरात्रि के बीच इसका विशेष महत्व क्यों माना जाता है? यह पर्व श्रद्धा, अनुशासन और प्रकृति से जुड़ाव का प्रतीक कैसे बनता है?

विज्ञापन

Chaiti Chhath: हिंदू नववर्ष और चैत्र नवरात्रि की आध्यात्मिक लहर के बीच अब लोक आस्था के महापर्व ‘चैती छठ’ की दस्तक सुनाई दे रही है. वैसे तो छठ का पर्व साल में दो बार मनाया जाता है, लेकिन चैत्र मास के शुक्ल पक्ष में होने वाली चैती छठ का अपना एक अलग और दिव्य महत्व है. 22 मार्च से शुरू होने जा रहे इस चार दिवसीय कठिन अनुष्ठान के लिए देश भर के घाटों और घरों में तैयारियां तेज हो गई हैं. सूर्य उपासना का यह पर्व न केवल श्रद्धा का केंद्र है, बल्कि यह हमें प्रकृति और अनुशासन से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम भी है.

चैती छठ का महत्व

चैती छठ मुख्य रूप से चैत्र मास की चतुर्थी तिथि से शुरू होकर सप्तमी तिथि तक चलता है. यह पर्व भगवान सूर्य और उनकी शक्ति ‘छठी मैया’ को समर्पित है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, चैती छठ मनाने से आरोग्य की प्राप्ति होती है और संतान के जीवन के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं. सूर्य देव को प्रत्यक्ष देवता माना गया है, जिनकी ऊर्जा से पूरी सृष्टि संचालित होती है. इस व्रत को करने से घर में सुख-समृद्धि और शांति का वास होता है. कठिन नियमों के कारण इसे ‘महापर्व’ की संज्ञा दी गई है.

चैती छठ 2026 का 4 दिवसीय कार्यक्रम

इस वर्ष चैती छठ 22 मार्च से लेकर 25 मार्च तक मनाया जाएगा. आइए जानते हैं हर दिन के मुख्य अनुष्ठान:

विज्ञापन

नहाय-खाय – 22 मार्च, रविवार

यह महापर्व का पहला दिन है. इस दिन व्रती नदी या तालाब में स्नान करने के बाद पूरी तरह सात्विक भोजन ग्रहण करती हैं. भोजन में विशेष रूप से कद्दू की सब्जी (कद्दू-भात) और चने की दाल बनाई जाती है. इसमें केवल सेंधा नमक का उपयोग होता है. व्रती के भोजन करने के बाद ही परिवार के अन्य सदस्य भोजन करते हैं. यह दिन तन और मन की शुद्धि के लिए होता है.

खरना – 23 मार्च, सोमवार

दूसरे दिन व्रती दिन भर निर्जला उपवास रखती हैं. शाम के समय मिट्टी के नए चूल्हे पर गुड़ और चावल की खीर तथा घी वाली रोटी का प्रसाद बनाया जाता है. रात में चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद व्रती इस प्रसाद को ग्रहण करती हैं. इसके बाद से ही 36 घंटे का कठिन निर्जला व्रत शुरू हो जाता है. खरना के प्रसाद को ग्रहण करने के बाद घर में पूरी शांति बनाए रखी जाती है.

विज्ञापन

यह भी पढ़ें: Door Vastu Tips: घर का ऐसा दरवाजा बढ़ाता है ‘नेगेटिव एनर्जी’, लाता है आर्थिक संकट

संध्या अर्घ्य – 24 मार्च, मंगलवार

तीसरे दिन डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है. शाम को व्रती सूप और दौरा (बांस की टोकरी) में पूजा की सामग्री लेकर घाट पर पहुंचती हैं. पानी में खड़े होकर अस्त होते सूर्य को दूध और जल का अर्घ्य दिया जाता है. यह दृश्य बेहद मनोरम होता है, जहां हजारों लोग एक साथ प्रकृति की आराधना करते हैं.

विज्ञापन

उषा अर्घ्य – 25 मार्च, बुधवार

अंतिम दिन उगते हुए सूर्य की पूजा होती है. सुबह तड़के ही श्रद्धालु फिर से घाट पर जमा होते हैं. सूर्य की पहली किरण को अर्घ्य देने के बाद छठी मैया से सुख-शांति की प्रार्थना की जाती है. इसके बाद व्रती कच्चे दूध और गुड़ का शरबत पीकर अपना व्रत खोलती हैं, जिसे ‘पारण’ कहा जाता है.

छठ पूजन सामग्री की पूरी लिस्ट

छठ पूजा में चढ़ाई जाने वाली हर सामग्री का अपना महत्व है. पूजा के लिए इन चीजों को पहले से जुटा लेना चाहिए:

विज्ञापन

बांस के सामान: बांस की एक बड़ी टोकरी, जिसे दौरा कहते हैं और बांस के बने सूप.
फल और सब्जियां: पानी वाला नारियल, गन्ना, डाभ नींबू (बड़ा नींबू), अनानास, केला (पूरी घौंद या पूरा हत्था) शरीफा, संतरा और मौसमी फल.
पारंपरिक पकवान: शुद्ध घी और गेहूं के आटे से बना ‘ठेकुआ’ (छठ का मुख्य प्रसाद), चावल के लड्डू (केसौर).
अन्य सामग्री: मखाना, भीगे हुए मटर (केराव), सुथनी, शकरकंद, मूली, अदरक और हल्दी का कच्चा पौधा.
पूजन विधि के लिए: मिट्टी का दीया, धूप, अगरबत्ती, कपूर, चंदन, पान का पत्ता, आलता बाती, बुद्धि (लाल धागे की माला), अक्षत, सिंदूर और माचिस.
अर्घ्य के लिए: तांबे का लोटा, नया वस्त्र (साड़ी या धोती), कच्चा दूध, गंगाजल और शहद.

ये हैं छठ के खास नियम

छठ का व्रत अपनी शुद्धता के लिए जाना जाता है. इस दौरान घर में पूरी तरह सात्विकता का पालन किया जाता है. लहसुन और प्याज का प्रयोग वर्जित होता है. पूजा का प्रसाद बनाने के लिए नए अनाज और नए चूल्हे का उपयोग किया जाता है. व्रती जमीन पर सोती हैं और अपनी इंद्रियों पर पूर्ण नियंत्रण रखती हैं. मान्यता है कि यदि कोई गलती हो जाए, तो छठी मैया नाराज हो जाती हैं, इसलिए हर कदम पर सफाई और नियमों का ध्यान रखा जाता है.

विज्ञापन

यह भी पढ़ें: Vidur Niti: इन 5 लोगों को भूल से भी न लगाएं पैर, दुख और परेशानियों से भरा रहेगा जीवन

डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

विज्ञापन

संबंधित खबरें

Tags:

न्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।

First published on:

Know More: Editorial Guidelines

लेख समाप्त

लेखक के बारे में

Shyamnandan

श्यामनंदन कुमार News24.com में चीफ सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में 20 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले श्यामनंदन ज्योतिष, अंक शास्त्र, सामुद्रिक शास्त्र, पर्व-त्योहार सहित भारतीय धर्म-संस्कृति के जानकार पत्रकार हैं. उन्होंने पत्रकारिता में एम.ए. की पढ़ाई काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) से की है और ज्योतिष का अध्ययन भारतीय विद्या भवन, नई दिल्ली से किया है. अपने पेशे में डिजिटल करियर की शुरुआत उन्होंने एनडीटीवी कन्वर्जेंन्स के साथ की. श्यामनंदन हिंदुस्तान टाइम्स, बंसल न्यूज (भोपाल) जैसे न्यूज प्लेटफॉर्म्स के साथ भी जुड़े रहे हैं. उन्होंने देश के प्रसिद्ध संतों के सत्संग और समागम की रिपोर्टिंग की है.
... और पढ़ें

ताज़ा खबरें

Sponsored Links by Taboola