Bhagwan Shiv: भगवान शिव जी का स्वरूप बेहद ही रहस्यमय और अनोखा माना जाता है. शिव जी को तस्वीरों में मृगछाल यानी हिरण की खाल और शरीर पर भस्म लगाए हुए दिखाया जाता है. इसके अलावा शिव जी कई चीजों को धारण करते हैं. जो उनके रूप को और अनोखा बनाता है. भगवान शिव ने गले में सांप और सिर पर चंद्रमा धारण किया हुआ है. इसके साथ ही वह डमरू और त्रिशूल अपने साथ रखते हैं. शिव जी के नाग, चंद्रमा, त्रिशूल और डमरू की महिमा क्या महिमा है आइये इसके बारे में जानते हैं.
हाथों में त्रिशूल
भगवान शिव के हाथों में त्रिशूल को उनका अस्त्र माना जाता है. त्रिशूल के तीनों शूलों को रज, तम, सत तीन गुणों का प्रतीक माना जाता है. इनमें से रज कर्म, इच्छा और मेहनत का प्रतीक है. तम अज्ञान, आलस और नकारात्मक माना जाता है. इसके अलावा तीसरे शूल सत को ज्ञान, शांति और पवित्रता का प्रतीक मानते हैं. इन तीनों के बिना सृष्टि का संचालन करना कठिन है. इसी कारण से भगवान शिव ने त्रिशूल को अपना हाथ में धारण किया है.
ये भी पढ़ें – Numerology: हमेशा नेगेटिव सोचते हैं इन 3 मूलांक वाले लोग, अक्सर कर लेते हैं अपना ही नुकसान, जानिए
मस्तक पर चंद्रमा
भगवान शिव के मस्तक पर चंद्रमा विराजमान हैं. इसके पीछे शिव पुराण की एक कथा है. दक्ष प्रजापति की 27 कन्याओं का विवाह चंद्रमा से हुआ था. जिन्हें आज के समय में चंद्रमाओं का नक्षत्र कहते हैं. चंद्रमा सभी में से सबसे अधिक स्नेह रोहिणी को करते थे. इसको लेकर नाराज सभी कन्याओं ने राजा दक्ष से शिकायत की. इसके बाद राजा दक्ष ने चंद्रमा को सौंदर्य व तेज नष्ट होने श्राप दिया. चंद्रमा श्राप से बचने के लिए शिव जी की शरण में गए. शिव जी ने चंद्रमा की तपस्या से प्रसन्न होकर अपने सिर पर धारण किया था.
हाथों में डमरू
शिव जी के एक हाथ में डमरू होता है. इस डमरू को दुनिया का सबसे पहला वाद्य यंत्र माना जाता है. ऐसा माना जाता है जब शिव जी प्रसन्न होते हैं, तो डमरू बजाकर नृत्य करते हैं. संसार में जब मां सरस्वती ने वीणा के स्वर से ध्वनि को जन्म दिया, तब यह संगीतविहीन थी. उस समय भगवान शिव ने 14 बार डमरू बजाया था. इसी से व्याकरण, संगीत, छंद और ताल का जन्म हुआ.
ये भी पढ़ें – Shani Vakri 2026: वक्री हुए शनिदेव, साढ़ेसाती और ढैय्या वाली राशियों को 138 दिनों तक रहना होगा सतर्क, वरना होगा नुकसान
गले में सर्प माला
भगवान शिव के गले में सांप विराजमान हैं. उनके गले में नागराज वासुकी हैं. नागराज वासुकी भगवान शिव के बड़े भक्त थे. ऐसा माना जाता है कि, समुद्र मंथन के समय नागराज वासुकी को ही मंथन के लिए डोरी बनाया था. भगवान शिव ने वासुकी की अटूट भक्ति को देखते हुए ही गले में आभूषण के तौर पर धारण किया.
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.
संबंधित खबरें
आज शारदीय नवरात्रि का तीसरा दिन, जानिए मां चंद्रघंटा की पूजा विधि और आरती
1 hr agoनवरात्रि में कैसे करनी चाहिए पूजा? पंडित सुरेश पांडेय ने बताया सही तरीका
16 hrs agoनवरात्रि व्रत के दौरान इन नियमों का रखें ध्यान, वरना नहीं मिलेगा पूजा का फल
19 hrs agoकितने दिनों बाद उतारें कलावा? जानिए रक्षासूत्र से जुड़े हुए धार्मिक नियम
20 hrs agoनवरात्रि में नवार्ण मंत्र जाप से दूर होंगे दुख, पंडित सुरेश पांडेय से जानिए
20 hrs agoखाने से जुड़ी गलतियां ही नहीं, इन कारणों से भी टूट सकता है नवरात्रि का व्रत
21 hrs agoआज नवरात्रि के दूसरे दिन करें मां ब्रह्मचारिणी की पूजा, जानिए विधि और मंत्र
1 day agoआज जरूर करें गणेश जी और नवग्रहों की स्थापना, यहां जानिए
1 day agoरसोई में मौजूद मसालों से जुड़े ज्योतिषीय उपाय, बन सकेंगे आपके काम
1 day agoसुख-समृद्धि के लिए धारण करें पीला पुखराज, दूर होगी पैसों की तंगी
1 day agoन्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।
First published on:
Know More: Editorial Guidelines