Kamakhya Mandir Ambubachi Mela Secrets: मां कामाख्या के भक्तों के लिए अंबुबाची सिर्फ एक मेला नहीं है, बल्कि इसे आस्था, शक्ति, रहस्य और प्रकृति का अद्भुत संगम माना जाता है. हर साल असम के प्रसिद्ध कामाख्या मंदिर में अंबुबाची मेला लगता है, जो करोड़ों श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करता है. धार्मिक मान्यता है कि इस दौरान माता कामाख्या रजस्वला (मासिक धर्म (Periods) के दौर से गुजरना) होती हैं, जिसके कारण 3 दिन तक मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं. इस दौरान ही अंबुबाची मेला लगता है. हालांकि, अंबुबाची मेले से जुड़े कई ऐसे रहस्य हैं, जो लोगों को हैरान कर देते हैं.

आज यहां पर आप अंबुबाची मेले और कामाख्या मंदिर से जुड़े 5 ऐसे रहस्यों के बारे में जानेंगे, जो इसे दुनिया के सबसे अनोखे व रहस्यमयी धार्मिक आयोजनों में शामिल करते हैं.

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अंबुबाची मेला से जुड़े प्रमुख रहस्य और मान्यताएं

  • अंबुबाची का अर्थ

अंबुबाची को कुछ धार्मिक शास्त्रों में अंबुवाची के नाम से भी जाना जाता है, जिसका शाब्दिक अर्थ 'जल का प्रवाह' यानी 'जल से निकलने वाला' है, जो संस्कृत शब्द 'अंबु' (जल) और 'वाची' (वाणी) से मिलकर बना है. इस शब्द को मॉनसून की शुरुआत के साथ-साथ धरती माता के रजस्वला होने की मान्यता का प्रतीक भी माना जाता है.

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  • प्राकृतिक योनि की होती है पूजा

बता दें कि कामाख्या मंदिर में देवी कामाख्या की कोई प्रतिमा नहीं है, बल्कि यहां पर प्राकृतिक शिला-खंड में स्थित योनि-आकार की संरचना की पूजा की जाती है, जिसे श्रद्धालु शक्ति का प्रतीक मानते हैं.

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  • सफेद कपड़े का रंग जाता है बदल

मंदिर के कपाट बंद करने से पहले गर्भगृह में स्थित मां कामाख्या की योनि पीठ को सफेद कपड़े से ढका जाता है, जो तीन दिन बाद कपाट खुलने पर लाल रंग का हो जाता है. इस कपड़े को रजस्वला का प्रतीक माना जाता है, जिसे भक्तों के बीच प्रसाद के रूप में बांटा भी जाता है.

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  • तांत्रिक साधना का प्रमुख केंद्र है

बता दें कि अंबुबाची मेले के दौरान आम श्रद्धालु तो मंदिर परिसर में बैठकर पूजा करते ही हैं, साथ ही अघोरी, संन्यासी और तांत्रिकों के द्वारा गुप्त साधना भी की जाती है. मान्यता है कि इन 3 दिनों में देवी की शक्ति विशेष रूप से जागृत रहती है. इस दौरान मंदिर परिसर और उसके आसपास के क्षेत्रों में बड़ी संख्या में तांत्रिक, श्रद्धालु, संन्यासी और अघोरी आपको पूजा करते हुए दिख जाएंगे.

  • कृषि कार्यों पर लग जाता है विराम

मां कामाख्या के भक्त अंबुबाची मेले को प्रकृति की सृजन शक्ति और उर्वरता का महापर्व मानते हैं, जिस दौरान विनाश और श्रम से जुड़े कार्य करने वर्जित होते हैं. मंदिर के आसपास रहने वाले भक्त इन 3 दिन कृषि कार्य नहीं करते हैं और सात्विक जीवन व्यतीत करते हैं. मान्यता है कि इस दौरान कृषि कार्य करने से विश्राम कर रही धरती मां कामाख्या को कष्ट पहुंच सकता है.

डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.