Akshaya Tritiya Facts: हर साल वैशाख शुक्ल तृतीया को मनाई जाने वाली अक्षय तृतीया को सनातन परंपरा में बेहद पवित्र और फलदायी दिन माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन किए गए शुभ कार्यों का फल कभी समाप्त नहीं होता है. यही कारण है कि पूजा, दान, निवेश और नई शुरुआत के लिए यह तिथि खास मानी जाती है. आइए जानते हैं, अक्षय तृतीया से जुड़े रोचक यूनिक फैक्ट्
अक्षय का गहरा अर्थ
संस्कृत में ‘अक्षय’ का अर्थ है जो कभी नष्ट न हो. धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन किए गए पुण्य कर्म स्थायी फल देते हैं. इसी विश्वास के कारण लोग दान, जप और तप में विशेष रुचि लेते हैं.
बिना मुहूर्त का शुभ दिन
अक्षय तृतीया को ‘अबूझ मुहूर्त’ कहा जाता है. यानी इस दिन कोई भी शुभ काम बिना पंचांग देखे किया जा सकता है. विवाह, गृह प्रवेश या नया व्यापार शुरू करने के लिए यह दिन सर्वोत्तम माना जाता है.
खरीदारी का विशेष महत्व
सोना, चांदी या संपत्ति खरीदने की परंपरा भी इसी दिन जुड़ी है. माना जाता है कि इस दिन खरीदी गई वस्तु में वृद्धि होती है. आधुनिक समय में लोग इस दिन डिजिटल निवेश और नई योजनाएं भी शुरू करते हैं.
पौराणिक घटनाओं से जुड़ाव
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार इसी दिन भगवान परशुराम का जन्म हुआ था. यह भी कहा जाता है कि महर्षि वेदव्यास ने गणेश जी के साथ महाभारत लेखन की शुरुआत इसी तिथि पर की थी. कुछ मान्यताओं में महाभारत युद्ध का समापन भी इसी दिन माना जाता है.
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गंगा और अक्षय पात्र की कथा
कहते हैं कि मां गंगा ने धरती पर अवतरण के लिए इसी दिन सहमति दी थी. पांडवों को वनवास के दौरान द्रौपदी के लिए अक्षय पात्र भी इसी दिन मिला, जिससे भोजन कभी खत्म नहीं होता था.
विशेष मंदिर परंपराएं
आंध्र प्रदेश के सिम्हाचलम मंदिर में भगवान नरसिम्हा की प्रतिमा साल भर चंदन से ढकी रहती है. केवल इसी दिन भक्तों को उनके वास्तविक स्वरूप के दर्शन होते हैं.
बद्रीनाथ धाम के कपाट
उत्तराखंड में स्थित बद्रीनाथ धाम के कपाट हर साल शीतकाल के बाद इसी दिन खुलते हैं. इसके साथ ही चारधाम यात्रा की शुरुआत का संकेत मिलता है.
जैन धर्म में भी महत्व
जैन परंपरा में यह दिन प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव से जुड़ा है. उन्होंने एक वर्ष के उपवास के बाद इसी दिन इक्षुरस ग्रहण कर पारण किया था.
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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.
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