Trending: CJP ProtestGyanesh KumarSIRBigg Boss 20

Shri Suryashtakam Lyrics: सूर्य की विशेष कृपा पाने के लिए पढ़ें श्री सूर्याष्टकम्, जरूर पूरी होगी मनचाही इच्छा

Shri Suryashtakam Lyrics: क्या आप भी सूर्य देव को प्रसन्न कर उनसे कोई विशेष वरदान पाना चाहते हैं? अगर हां, तो इसके लिए आप नियमित रूप से श्री सूर्याष्टकम् का पाठ कर सकते हैं. चलिए जानें श्री सूर्याष्टकम् क्या है. साथ ही आप इसके लिरिक्स और पाठ करने से होने वाले लाभ के बारे में विस्तार से जानेंगे.

विज्ञापन
Shri Suryashtakam Lyrics: सूर्य की विशेष कृपा पाने के लिए पढ़ें श्री सूर्याष्टकम्, जरूर पूरी होगी मनचाही इच्छा
Credit- AI Gemini

Surya Ashtakam Stotram: सूर्य देव को ग्रहों का राजा माना गया है, जिनका कुंडली में संतुलित रहना बेहद जरूरी है. शास्त्रों में बताया गया है कि सूर्य ग्रह की मजबूत स्थिति के कारण व्यक्ति का आत्मविश्वास चरम पर रहता है. साथ ही करियर में सफलता मिलने की संभावना बढ़ जाती है और मानसिक व शारीरिक समस्याएं बहुत दूर रहती हैं, इसलिए अधिकतर लोग रोजाना सूर्य देव को प्रणाम करते हैं और उन्हें जल चढ़ाते हैं.

इसके अलावा नियमित रूप से श्री सूर्याष्टकम् का पाठ करके भी सूर्य देव की विशेष कृपा प्राप्त की जा सकती है. चलिए विस्तार से जानते हैं श्री सूर्याष्टकम् के महत्व, लिरिक्स और लाभ आदि के बारे में.

श्री सूर्याष्टकम् का महत्व और लाभ

श्री सूर्याष्टकम्, ग्रहों के राजा सूर्य देव को समर्पित एक शक्तिशाली व प्रभावशाली स्त्रोत है. इस स्त्रोत में कुल आठ श्लोक हैं, जिनमें सूर्य देव के स्वरूप, गुण, तेज और महत्व आदि का वर्णन किया गया है. साथ ही इसके जरिए सूर्य देव से अच्छे स्वास्थ्य की प्रार्थना की जाती है. शास्त्रों में बताया गया है कि जो व्यक्ति रोजाना श्री सूर्याष्टकम् का पाठ करता है, उसके आत्मविश्वास, बुद्धि, तेज, यश और नेतृत्व क्षमता आदि में इजाफा होता है. इसी के साथ शारीरिक कष्टों से लड़ने की शक्ति मिलती है.

विज्ञापन

हालांकि, कुछ भक्त सूर्य देव से अपनी विशेष मनोकामना पूर्ण करवाने के लिए भी विधिपूर्वक श्री सूर्याष्टकम् का पाठ करते हैं.

ये भी पढ़ें- Shani Jayanti 2026: शनि जयंती आज, जानें शनिश्चरी अमावस्या का महत्व, पूजा का शुभ मुहूर्त और विधि

विज्ञापन

श्री सूर्याष्टकम् के लिरिक्स

॥श्री गणेशाय नमः॥

साम्ब उवाच॥
आदिदेव नमस्तुभ्यं प्रसीद मम भास्कर।
दिवाकर नमस्तुभ्यं प्रभाकर नमोऽस्तुते॥१॥
सप्ताश्वरथमारूढं प्रचण्डं कश्यपात्मजम्।
श्वेतपद्मधरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम्॥२॥
लोहितं रथमारूढं सर्वलोकपितामहम्।
महापापहरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम्॥३॥
त्रैगुण्यं च महाशूरं ब्रह्माविष्णुमहेश्वरम्।
महापापहरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम्॥४॥
बृंहितं तेजःपुञ्जं च वायुमाकाशमेव च।
प्रभुं च सर्वलोकानां तं सूर्यं प्रणमाम्यहम्॥५॥
बन्धूकपुष्पसङ्काशं हारकुण्डलभूषितम्।
एकचक्रधरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम्॥६॥
तं सूर्यं जगत्कर्तारं महातेजःप्रदीपनम्।
महापापहरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम्॥७॥
तं सूर्यं जगतां नाथं ज्ञानविज्ञानमोक्षदम्।
महापापहरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम्॥८॥
सूर्याष्टकं पठेन्नित्यं ग्रहपीडाप्रणाशनम्।
अपुत्रो लभते पुत्रं दरिद्रो धनवान्भवेत्॥९॥
आमिशं मधुपानं च यः करोति रवेर्दिने।
सप्तजन्म भवेद्रोगी प्रतिजन्म दरिद्रता॥१०॥
स्त्रीतैलमधुमांसानि यस्त्यजेत्तु रवेर्दिने।
न व्याधिः शोकदारिद्र्यं सूर्यलोकं स गच्छति॥११॥
इति श्रीसूर्याष्टकस्तोत्रं सम्पूर्णम्॥

विज्ञापन

ये भी पढ़ें- Shani Jayanti 2026: शनि जयंती से स्टार्ट होगा इन 5 राशियों का गोल्डन टाइम, सूर्य-बुध की युति से बनेगा बुधादित्य राजयोग

डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

विज्ञापन

संबंधित खबरें

न्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।

First published on:

Know More: Editorial Guidelines

लेख समाप्त

ताज़ा खबरें

Sponsored Links by Taboola